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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

SYL पर 'आप' का नया पैंतरा, अब पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी

By Test1 Test1Edited By:
Published: Wed, 27 Jul 2016 04:00 PM (IST)Updated: Wed, 27 Jul 2016 04:27 PM (IST)

एसवाईएल मुद्दे पर अब आम आदमी पार्टी ने नई नीति अपनाई है। अब पार्टी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। जानें इस मुद्दे पर क्या चाहती है पार्टी ?

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राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता एचएस फूलका, कंवर संधू और हिम्मत सिंह शेरगिल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर मांग की है कि एसवाइएल नहर से संबंधित मामले पर सुप्रीम कोर्ट में चल रहे केस को खत्म करने के लिए प्रेसिडेंडिशल रेफरेंस की अर्जी वापस ली जाए।

गौरतलब है कि हाल ही में कांग्रेस के प्रदेश प्रधान अमङ्क्षरदर सिंह ने एलान किया है कि अगर एसवाइएल पर यदि सुप्रीम कोर्ट का फैसला पंजाब के खिलाफ आता है तो वह सांसद पद से इस्तीफा दे देंगे। उनके साथ पंजाब के सभी कांग्रेस विधायक भी पद छोड़ देंगे।

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वहीं, शिअद लगातार एसवाइएसल के खिलाफ पंचायतों के प्रस्ताव पारित करवा रही है। अब तक इस मुद्दे पर अपने स्टैंड को लेकर घिरी आप भी अब मैदान में आ गई है।

रधानमंत्री को लिखे पत्र में आप ने कहा है कि प्रधानमंत्री इस मामले में पंजाब को इंसाफ दिलाने के लिए हरियाणा, पंजाब व राजस्थान के मुख्यमंत्रियों से बैठक कर उन्हें इस बात पर राजी करें कि दरियाई पानी का बंटवारा राइपेरियन कानून के मुताबिक ही किया जाए।

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पंजाब में किसानी को बचाने के लिए जरूरी है कि यहां के पानी को बचाया जाए। उन्होंने पूछा है कि जब 1981 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों पर दबाव बनाकर इकरारनामे लिखवा लिया था, तो क्या मौजूदा प्रधानमंत्री पानी का सही बंटवारा नहीं करवा सकते।

अमरिंदर, बादल को घेरा

आप ने पत्र में लिखा है कि वर्ष 2004 में तत्कालीन कैप्टन अमङ्क्षरदर सिंह की सरकार ने पंजाब टर्मिनेशन ऑफ एग्रीमेंट्स एक्ट (पीटीएए) पास किया था, जो सिर्फ सियासी लाभ लेने के लिए ही किया गया था। दूसरी ओर केंद्र की कांग्रेस सरकार ने संविधान की धारा 143 के अधीन इस मामले में सरकार सुप्रीम कोर्ट को प्रेसिडेंशियल रेफरेंस लेने के लिए कह रही थी।

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वहीं, प्रकाश सिंह बादल के नेतृत्व में शिरोमणि अकाली दल लोगों की भावनाओं से खेलते रहे हैं। एक तरफ तो बादल सरकार सुप्रीम कोर्ट जाने का नाटक कर रही थी और दूसरी तरफसरकार ने 1978 में एसवाइएल के निर्माण के लिए जरूरी जमीन के अधिग्रहण संबंधित अधिसूचना भी जारी कर दी।

हरियाणा सरकार से 3 करोड़ रुपये की राशि की मांग भी की और 1 करोड रुपए वसूल की। इस पत्र पर आप कन्वीनर सुच्चा सिंह छोटेपुर, सांसद भगवंत मान और प्रो. साधू सिंह के भी दस्तखत हैं।

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