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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 27, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आशा बोलीं, अचानक सोनिया गांधी का फोन आया तो रह गई अचंभे में

By Kamlesh BhattEdited By:
Updated: Mon, 27 Jun 2016 08:01 PM (IST)

पंजाब की नवनियुक्त कांग्रेस प्रभारी आशा कुमारी ने कहा कि जब उन्हें प्रभारी बनाने के लिए सोनिया गांधी का फोन आया तो वह अचंभे में पड़ गई।

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चंडीगढ़ (कैलाशनाथ)। कांग्रेस की नवनियुक्त पंजाब प्रभारी आशा कुमारी नई चुनौतियों को स्वीकार करने को तैयार हैं। वह बड़ी ही सहजता से कहती हैं- 'आपÓ के बारे में अभी नहीं सोचा, लेकिन चुनौती स्वीकार है। कांग्रेस पंजाब में सरकार बनाएगी। प्रभारी बनने के बाद दैनिक जागरण से बातचीत के दौरान आशा कुमारी ने कहा, 'पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी का फोन आया। उन्होंने कहा-आपको पंजाब का प्रभारी बनाया जा रहा है। कुछ देर तक मुझे समझ में ही नहीं आ रहा था, क्योंकि करीब एक माह से मेरी उनसे मुलाकात नहीं हुई थी। यह पल मेरे लिए अद्भुत थे। कुछ पल अचंभे में रही।

पंजाब के नेताओं से अच्छे संबंध

पंजाब में प्रचार कमेटी की चेयरपर्सन अंबिका सोनी के साथ लंबे समय से जुड़ी रही आशा कुमारी एक सवाल के जवाब में कहा, 'पंजाब के नेताओं के साथ मेरे अच्छे संबंध रहे हैं। इनका निश्चित रूप से लाभ मिलेगा। अंबिका जी के साथ मैं एनएसयूआइ और यूथ कांग्र्रेस से जुड़ी रही।

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कैप्टन अमरिंदर सिंह, सुनील जाखड़ के साथ भी अच्छे संबंध रहे। एआइसीसी की तरफ से अमृतसर और गुरदासपुर का ऑब्जर्वर लगाए जाने के कारण प्रताप सिंह बाजवा से भी संपर्क में रही। उन्होंने कहा, 'वरिष्ठ नेताओं के साथ काम करके निश्चित रूप से काफी कुछ सीखने को मिलेगा और उनका सहयोग भी प्राप्त होगा।


सोनिया से मिल लेंगी गाइडलाइंस

पंजाब में आम आदमी पार्टी के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, 'अभी वास्तविक रूप से ज्यादा नहीं पता हैं। चूंकि डॉ. शकील अहमद के साथ हरियाणा में सह प्रभारी की भूमिका निभाई है। इस दौरान उनसे कुछ न कुछ जानकारियां मिलती रहती थी। वह पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर उनकी गाइडलाइंस लूंगी। उसके बाद रणनीति तैयार की जाएगी।

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतरेगी और पंजाब में सरकार बनाएगी। गौरतलब है कि आशा कुमारी को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी का नजदीकी माना जाता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि पंजाब के मामले में सोनिया गांधी ने यह फैसला तब लिया जब राहुल गांधी विदेश में छुट्टियां मनाने के लिए गए हुए हैं।

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