यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 04, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
करियर बनाने के चक्कर में शादी में देरी से महिलाओं में बढ़ रहा बांझपन
महिलाओं में बांझपन के मामले में लगातार बढ़ रहे हैं। इसका कारण करियर बनाने के चक्कर में देर से शादी करना है।

जालंधर [जगदीश कुमार]। करियर की बुलंदियों को छूने का ख्वाब ममता की राह में रोड़ा बन रहा है। जिंदगी की जद्दोजहद में उम्र का अहम पड़ाव कब गुजर जाता है पता ही नहीं चलता। देर से शादी महिलाओं में बांझपन को बढ़ावा दे रही है। नतीजतन, मां बनने की ख्वाहिश को पूरा करने का एकमात्र सहारा आइवीएफ सेंटर ही रह जाता है।
पंजाब में भी यह चलन तेजी से बढ़ रहा है। यहां आइवीएफ सेंटरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। जालंधर इसका हब है। सूबे में कुल 40 आइवीएफ सेंटर हैं, जिनमें से 25 अकेले जालंधर में हैं। इन सेंटरों में आइवीएफ तकनीक से संतान सुख की चाहत में आने वाले मरीजों में से करीब तीस फीसद लोग ऐसे होते हैं जो शादी में देरी की वजह से प्रजनन क्षमता खो देते हैं। लोक लाज के डर से ये लोग विज्ञान का सहारा लेने को मजबूर हो रहे हैं।
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कम होने लगते हैं अंडाणु
नोवा आइवीआइ की मेडिकल डायरेक्टर डॉ. जैसमीन कौर दहिया की मानें तो पंजाब में ऐसी महिलाओं की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ओवेरियन रिजर्व अर्थात अंडाशय के सक्षम अंडाणुओं की संख्या लगभग 35-36 वर्ष की उम्र में घटनी शुरू हो जाती है, लेकिन कुछ ऐसी महिलाएं हो सकती हैं जिनमें अपर्याप्त संख्या में अंडाणु संचित होते हैं। महिलाओं के अंडाशय में जन्म के साथ निश्चित संख्या में अंडाणु होते हैं। उम्र के साथ उनकी प्रजनन क्षमता घटती जाती है, जबकि पुरुषों में शुक्राणु बनने की प्रक्रिया पर उम्र का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है।
अंडाणु व भ्रूण फ्रीज करवाने का प्रचलन शुरू
विर्क आइवीएफ के डायरेक्टर डॉ. एसपीएस विर्क का कहना है कि 30 फीसद दंपती देरी से शादी करवाने के बाद संतान सुख में होनी वाली समस्याओं का समाधान करने के लिए आइवीएफ सेंटरों में पहुंच रहे हैं। वर्तमान में यूथ इस समस्या से निजात पाने के लिए अंडाणु, शुक्राणु और भ्रूण को फ्रीज करवाने लगे हैं। जिंदगी में मुकाम हासिल करने के बाद इन्हीं के सहारे संतान सुख हासिल किया जा सकेगा। इन्हें 20 साल तक फ्रीज रखा जा सकता है। इसके अलावा असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) की मदद से गर्भधारण संभव है।
देर से शादी के कारण मां बनने में परेशानी के मामले बढ़े
वरदान मेडिकल सेंटर के डॉ. सुमित पाल के मुताबिक पंजाब में पिछले कुछ दशक में देर से शादी के कारण मां बनने में आ रही परेशानी के मामले बढ़े हैं। आइवीएफ के बेहतरीन नतीजे के लिए भी सही उम्र का होना बेहद जरूरी है। गर्भ निरोधक की आसान उपलब्धता, बढ़ती तलाक दरें, आर्थिक रूप से अधिक सुरक्षित होने तक विवाहित जोड़ों द्वारा फैमिली प्लानिंग आदि जैसे अनेक कारणों के चलते यह चलन बढ़ा है।
पुरुषों की प्रजनन शक्ति व शुक्राणु कमजोर पडऩे लगते
जैनेसिस आइवीएफ सेंटर के निदेशक डॉ. लखविंदर सिंह देरी से शादी की वजह से पुरुषों की प्रजनन शक्ति व शुक्राणु कमजोर पडऩे लगते हैं। उनमें गति भी नहीं रह जाती है। यही नहीं शुक्राणु भी कम संख्या में बन पाते हैं। इससे गर्भ ठहरने में बाधा और कमजोर बच्चों की पैदाइश एक बड़ी समस्या है।
देर से शादी के मामले
आयु वर्ग प्रतिशत
25-30 15
30-35 30
35-40 25
40 से अधिक 25
देर से शादी के बाद संतान सुख में खतरे
-गर्भ में ठहरे बच्चे में जीन संबंधी विकृतियां।
-देरी से शादी के बाद गर्भ में ठहरे बच्चे के गिरने का खतरा भी बहुत अधिक रहता है।
-महिलाओं की बच्चेदानी में ट्यूमर भी होने लगे हैं।
- प्रेग्नेंसी के दौरान ब्लड प्रेशर बढऩा, डायबिटीज, शुगर
- सीजेरियन की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

