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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 17, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    भारी घाटे से उभरने के लिए BSNL और MTNL का विलय जरुरी: एमटीएनएल

    By Shilpa SrivastavaEdited By:
    Updated: Mon, 17 Apr 2017 11:00 AM (IST)

    पुरवार के मुताबिक, उद्योग का एकीकरण हो रहा है। यह बीएसएनएल और एमटीएनएल का मुद्दा नहीं है। दोनों का विलय वांछित है ...और पढ़ें

    भारी घाटे से उभरने के लिए BSNL और MTNL का विलय जरुरी: एमटीएनएल
    भारी घाटे से उभरने के लिए BSNL और MTNL का विलय जरुरी: एमटीएनएल

    नई दिल्ली (जेएनएन)। सार्वजनिक क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों एमटीएनएल और बीएसएनएल का विलय परिचालन में तालमेल के लिए जरूरी है। महानगर टेलीफोन निगम लिमिटेड यानी एमटीएनएल के चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर पीके पुरवार ने कहा कि बेहद प्रतिस्पर्धी दूरसंचार बाजार में अखिल भारतीय स्तर पर मजबूत मौजूदगी के लिए ऐसा विलय जरूरी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब बीएसएनएल-एमटीएनएल के विलय को लेकर चर्चा चल रही है। एक संसदीय समिति ने हाल में कहा है कि दूरसंचार विभाग की इस विलय प्रस्ताव को जून में केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखने की योजना है। पुरवार के मुताबिक, उद्योग का एकीकरण हो रहा है। यह बीएसएनएल और एमटीएनएल का मुद्दा नहीं है। दोनों का विलय वांछित है। एमटीएनएल दिल्ली व मुंबई में टेलिकॉम सेवाएं मुहैया कराने वाली सरकारी कंपनी है। यह कंपनी भारी घाटे में चल रही है।

    संसद समिति ने दिया था सुझाव:

    आपको बता दें कि संसद की एक समिति ने बीएसएनएल और एमटीएनएल के विलय का सुझाव दिया गया था। संसद की एक स्थाई समिति के मुताबिक, इन कंपनियों की दीर्घकालिक सफलता के लिए विलय एक अच्छा प्रस्ताव हो सकता है। इसका सीधा मतलब ये है कि अगर इन दोनों कंपनियों का विलय होता है, तो एमटीएनएल खत्म होकर सिर्फ बीएसएनएल रह जाएगी।

    क्या है रिपोर्ट में?

    संसदीय समिति ने सरकार को सुझाव दिया कि वो दोनों कंपनियों के मर्जर के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी गठित करें, जिससे इनके मर्जर की संभावनाएं तलाशी जा सकें। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर ये कंपनियों एक दूसरे के साथ विलय कर लेती हैं, तो ये दोनों कंपनियां मार्किट में मौजूद बड़ी कंपनियों के साथ मुकाबला कर पाएंगी। साथ ही इनकी सर्विसेस में भी सुधार हो जाएगा। इसके अलावा यह भी सुझाव दिया गया है कि अगर ये मर्जर न भी करना चाहें, तो टेक्नोलॉजिक एडवांसमेंट और नेटवर्क इम्प्रूवमेंट करने के साथ इन कंपनियों को वन-टाइम फंड मुहैया कराया जाए, जिससे इनकी सर्विसेस में सुधार आ सके।

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