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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 05, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सुनी सौ से ज्यादा समस्याएं

    By BhanuEdited By:
    Updated: Tue, 05 Sep 2017 10:55 PM (IST)

    भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सौ से अधिक कार्यकर्ताओं व लोगों की समस्याएं सुनी। साथ ही इनके निस्तारण का आश्वासन भी दिया। ...और पढ़ें

    कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सुनी सौ से ज्यादा समस्याएं
    कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने सुनी सौ से ज्यादा समस्याएं

    देहरादून, [राज्य ब्यूरो]: मुख्यमंत्री की पहल पर भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में चल रहे मंत्रियों के जनसमस्याएं सुनने के कार्यक्रम की कड़ी में कृषि मंत्री सुबोध उनियाल ने पार्टीजनों के साथ ही आमजन की समस्याएं सुनीं। उन्होंने कई मामलों में विभागीय अधिकारियों को फोन कर शिकायतों के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। 

    साथ ही उन्हें निर्देशित किया कि छोटी-छोटी दिक्कतों को लेकर आमजन को परेशान न होना पड़े, यह सुनिश्चित किया जाए। मुख्यमंत्री के विशेष कार्याधिकारी उर्बा दत्त भट्ट के मुताबिक जनता दरबार में सौ से ज्यादा शिकायतें-समस्याएं दर्ज हुई। इनमें से अधिकांश का निस्तारण करा दिया गया। इस मौके पर विधायक खजानदास समेत अन्य भाजपा नेता भी मौजूद थे।

    ढाई साल से नहीं मिली इमदाद

    घनसाली ब्लाक के द्वारी गांव निवासी वयोवृद्ध हीरामणि सेमवाल ने मंत्री को अवगत कराया कि वह लंबे समय से गले की समस्या से पीड़ित हैं। इसे देखते हुए 2014 में उन्होंने सरकार से आर्थिक मदद की गुहार की, ताकि वह ऑपरेशन करा सकें, लेकिन अभी तक कोई मदद नहीं मिली है। उन्होंने क्षेत्र में जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाए जाने का मामला भी उठाया।

    पछवादून के किसानों को नहीं हुआ भुगतान

    पछवादून के किसानों की ओर से मंत्री के समक्ष बात रखी गई कि वहां के गन्ना किसानों को फरवरी से गन्ने का भुगतान नहीं हुआ है। इससे उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सभी किसानों को जल्द भुगतान करा दिया जाएगा।

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    समीक्षा की गुंजाइश हर जगह

    कृषि मंत्री ने कहा कि जनसुनवाई का यह कार्यक्रम बेहतर ढंग से चल रहा है। बड़ी संख्या में जनता की शिकायतों का निस्तारण हो रहा है और लोग इससे खुश भी हैं। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में शिकायतें-समस्याएं कम आएगी तो दूसरी व्यवस्था के बारे में सोचा जा सकता है। उनका मत है कि समीक्षा की गुंजाइश हर मसले पर रहती है।

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