यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 06, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
आपदा पीड़ितों के लिए अब चंद घंटों में तैयार हो सकेगा घर
केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की की ओर से विकसित की गई टेक्नोलॉजी के माध्यम से आपदा पीड़ितों को कुछ ही घंटों में सुरक्षित ठौर उपलब्ध करवाया जा सकेगा।

रुड़की, [जेएएनएन]: किसी भी क्षेत्र में बाढ़, भूकंप, चक्रवात, सुनामी जैसी आपदाएं आने पर सैकड़ों-हजारों लोग बेघर हो जाते हैं। ऐसे में आपदा प्रभावितों को तुरंत अस्थायी आश्रय उपलब्ध करवाना सरकार और स्थानीय प्रशासन के लिए चुनौती बन जाता है। लेकिन, अब आपदा पीड़ितों को कुछ ही घंटों में सुरक्षित ठौर उपलब्ध करवाया जा सकेगा। यह संभव हो पाएगा केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआइ) रुड़की की ओर से विकसित की गई डिजास्टर रिलीफ शेल्टर (आपदा राहत आश्रय) टेक्नोलॉजी के माध्यम से।
आपदाओं से संबंधित भविष्यवाणी करना अभी भी वैज्ञानिकों के लिए संभव नहीं है। वैज्ञानिकों की मानें तो समय-समय पर भूकंप, बाढ़ आदि आपदाओं का आना भी तय है। ऐसे में जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए आपदाओं में भी सुरक्षित रहने की क्षमता रखने वाले भवनों का निर्माण और आपदा पीडि़तों को तुरंत राहत आश्रय उपलब्ध करवाने की जरूरत है।
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इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए सीबीआरआइ रुड़की के विकास, निर्माण और प्रसार समूह के वरिष्ठ प्रधान वैज्ञानिक एसके नेगी ने डिजास्टर रिलीफ शेल्टर तकनीक विकसित की है। इसके जरिये मात्र दो-तीन घंटे में डिजास्टर रिलीफ शेल्टर का निर्माण कर आपदा पीड़ितों को राहत दी जा सकती है।
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नेगी के अनुसार 200 से 250 वर्ग फीट क्षेत्र में एल्युमीनियम फ्रेम का प्रयोग करके पांच-छह सदस्यीय परिवार के लिए राहत आश्रय बनाया जा सकता है। डिजास्टर रिलीफ शेल्टर बनाने में एल्युमीनियम फ्रेम के अलावा जरूरत के अनुसार साधारण तिरपाल, पॉली कॉर्बन एवं जीआइ शीट का प्रयोग किया जा सकता है। काफी कम वजनी होने के कारण इसे फोल्ड कर एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।
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ऐसे में यदि किसी भी क्षेत्र में आपदा आती है तो एक ट्रक में लगभग 100 फ्रेम एक साथ ले जाए जा सकते हैं। जो एक समय में सैकड़ों लोगों को राहत देने में मददगार होंगे। नेगी के अनुसार केवल एल्युमीनियम फ्रेम और तिरपाल से बनाए गए शेल्टर का वजन 60-65 किलो, पाली कॉर्बन से बने शेल्टर का 70-80 किलो और जीआइ शीट से बनाए गए शेल्टर का वजन 120 किलो तक है।
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पर्यटन के क्षेत्र में भी हो सकता है प्रयोग
वैज्ञानिक एसके नेगी के अनुसार इस तकनीक का प्रयोग टूरिस्ट हट््स बनाने में भी किया जा सकता है। इसके अलावा स्कूल, रेस्ट हाउस, गोदाम आदि भी बनाए जा सकते हैं।
इस तकनीक से बनाए गए राहत आश्रयों का वजन काफी कम है, इसलिए ये सुरक्षित भी हैं। इन्हें सामान्य मैदान में धरातल पर फिक्स किया जा सकता है। संस्थान परिसर के रूरल पार्क में भी डिजास्टर रिलीफ शेल्टर बनाया गया है।
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