यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Mar 01, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
ढैंचा बीज घोटाले में हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने ढैंचा बीच घोटाले के मामले में सरकार को चार सप्ताह में जवाब दा ...और पढ़ें

नैनीताल, [जेएनएन]: ढैंचा बीच घोटाले का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति केएम जोसफ व न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली निवासी अधिवक्ता जयप्रकाश डबराल ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि 2006 में तत्कालीन सरकार द्वारा ढैंचा बीज बाजार रेट से दुगने दामों पर तथा आवश्यकता से अधिक खरीदा गया। सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत कृषि निदेशक से सूचना मांगी गई, उसमें जानकारी चौंकाने वाली है।
सूचना में जिन ट्रकों से ढैंचा बीज उत्तराखंड लाने की जानकारी दी गई है, सेल टैक्स विभाग ने उन नंबरों के ट्रकों को उत्तराखंड में नहीं आना बताया है। याचिका में ढैंचा बीज खरीद में भारी घोटाला होने का जिक्र करते हुए तत्कालीन कृषि मंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, कृषि सचिव ओमप्रकाश, कृषि निदेशक मदन लाल को पूरे मामले में लिप्त करार दिया है। साथ ही उपरोक्त के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
खंडपीठ ने मामले में सुनवाई करते हुए सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। यहां उल्लेखनीय है कि कांग्रेस सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय जांच आयोग ने भी ढैंचा बीज खरीद में तत्कालीन कृषि मंत्री रावत समेत सचिव व निदेशक की भूमिका पर सवाल खड़े किए थे।