विमानों की दुनिया में आने वाला है रफ्तार का तूफान; जापान के नए इंजन के परीक्षण ने उड़ाए दुनिया के होश
हवाई यात्रा की दुनिया में आने वाले समय में और भी कई नए आविष्कार किए जा रहे हैं। इसी क्रम ...और पढ़ें


समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। दुनिया में तकनीक के क्षेत्र में लगातार नए आविष्कार किए जा रहे हैं। जिसके कारण लोगों को यात्रा के बेहतरीन विकल्प मिल रहे हैं। अब इस क्रम में एक ऐसे इंजन का सफल लैब टेस्ट किया गया है। जो अगर विमान में लगाया जाए तो फिर 11 हजार किलोमीटर की यात्रा सिर्फ दो घंटे से भी कम समय में पूरी की जा सकेगी। किस देश ने इस तरह की तकनीक का सफल टेस्ट किया है। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।
नई तकनीक वाले इंजन का हुआ टेस्ट
जानकारी के मुताबिक नई तकनीक वाले इंजन का हाल में ही सफल लैब टेस्ट किया गया है। जिसके कारण हवाई यात्रा में लगने वाले समय को काफी कम किया जा सकता है। नई तकनीक में इंजन के अंदर ब्लेड या घूमने वाला पंखा नहीं है। इसकी जगह इंजन में रफ्तार हवा को दबाती है और तेज हवा लिक्विड हाइड्रोजन ईंधन के साथ मिलती है और फिर धमाका होता है जिससे इंजन को ताकत मिलती है।
किस देश में हुआ टेस्ट
जापान में इस नई तकनीक वाले इंजन का सफल लैब टेस्ट किया गया है। जापान की अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा की लैब में इस तरह के इंजन का सफल लैब टेस्ट किया गया है।
क्या है खासियत
जापानी अंतरिक्ष एजेंसी जाक्सा की लैब में जिस इंजन का सफल लैब टेस्ट किया गया है उसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह आवाज से पांच गुना तेज क्षमता के साथ विमान को उड़ा सकता है। इससे हवाई यात्रा करने में कई घंटों की बचत की जा सकती है।
कितनी होगी बचत
जाक्सा की लैब में सफल टेस्ट किए गए इंजन को अगर भविष्य में हवाई यात्रा के लिए जहाज में उपयोग किया जाएगा तो इससे जापान से अमेरिका के बीच करीब 11 हजार किलोमीटर की दूरी को सिर्फ एक घंटे 45 मिनट में पूरा किया जा सकता है। मौजूदा समय में इतनी दूरी को तय करने में करीब 14 घंटे से ज्यादा का समय लगता है।
कितनी है स्पीड
जाक्सा की ओर से टेस्ट किए गए इंजन की अधिकतम स्पीड 6125 किलोमीटर प्रति घंटा तक है। यह स्पीड अमेरिकी कंपनी बूम सुपरसोनिक के ओवरचर विमान से भी तीन गुना ज्यादा है।
तेज तापमान में भी सुरक्षित
जानकारी के मुताबिक लैब में इस इंजन पर कई तरह के टेस्ट किए जा रहे हैं। जिसके दौरान इसे एक हजार डिग्री सेल्सियस के तापमान पर भी टेस्ट किया गया है। इस दौरान इंजन के अंदरूनी हिस्से और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम पूरी तरह से सुरक्षित रहा।
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