DMRC ने शुरू की दिल्ली की पहली Hydrogen Bus सेवा, जानें क्या होगी टाइमिंग रूट और सुविधाएं
Delhi Hydrogen Bus: दिल्ली मेट्रो द्वारा चलाई जा रही हाइड्रोजन बसें, CNG बसों के मुकाबले पर्यावरण के लिए ज्यादा बेहतर और सुरक्षित विकल्प है। ...और पढ़ें

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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
ऑटो डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने सेंट्रल विस्टा इलाके में पहली हाइड्रोजन-पावर्ड शटल बस सेवा शुरू की है। इस बस सर्विस की शुरुआत 15 मई से की गई है। DMRC ने यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उस अपील के बाद की है जिसमें उन्होंने वैश्विक तनाव के बी ईंधन की खपत को कम करने का आग्रह किया था।
IOCL और DMRC की पहल
इस पहल के तहत इंडियन ऑयल दिल्ली मेट्रो के 2 आधुनिक हाइड्रोजन बसें दे रहा है। इन बसों में कुल 35 यात्रियों के बैठने की जगह है। बसों को सुरक्षित और समय का पाबंद बनाए रखने के लिए इनमें कुछ खास फीचर्स दिए गए हैं जैसे- GPS ट्रैकिंग, CCTV सिस्टम और बसो की रियल-टाइम मॉनिटरिंग की सुविधा दी गई है।
स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी
यह शटल सेवा केंद्रीय सचिवालय (Central Secreterat) और सेवा तीर्थ मेट्रो (Seva Teerth) स्टेशनों के बीच चलेगी। इसका मकसद लोगों को स्टेशनों से उनकी मंजिल तक पहुंचाना है। यह बस डीजल-पेट्रोल जैसे ईंधन से चलने वाले वाहनों का एक अच्छा, स्वच्छ और प्रदूषण फ्री विकल्प है। यह बस TATA Motors द्वारा बनाई गई है जिसे IOCL ने दिल्ली मेट्रो के उपलब्ध कराया है।
कनेक्टिविटी का महत्व
DMRC के निदेशक का कहना है कि यह बस सेवा सेंट्रल विस्टा के सभी दफ्तरों और मेट्रो स्टेशनों को आपस में जोड़ेगी। यह बस सर्विस सुबह 8:30 बजे से शाम 6:30 बजे तक उपलब्ध रहेगी। उन्होंने आगे कहा कि, 'अभी हमारे पास लास्ट-माइल कनेक्टिविटी के लिए पेट्रोल-डीजल के विकल्प मौजूद हैं। ये बसें न सिर्फ ऊर्जा बचाती हैं बल्कि पर्यावरण के लिए भी अच्छी हैं।
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किन रास्तों को करेगी कवर
ये बसें क्लॉकवाइज और एंटी-क्लॉकवाइज दिशाओं में चलेगी और कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों को कवर करेगी जैसे- कर्तव्य भवन, विज्ञान भवन, निर्माण भवन, अकबर रोड, बड़ौदा हाउस, नेशनल स्टेडियम, नेशनल गैलरी ऑफ मॉडर्न आर्ट्स, इंडिया गेट और सेवा तीर्थ मेट्रो स्टेशन।
क्या यह CNG से बेहतर है?
हाइड्रोजन से चलने वाली बसें पर्यावरण के लिए CNG से कहीं ज्यादा बेहतर है क्योंकि इनसे बिल्कुल भी प्रदूषण नहीं फैलता। हालांकि, बड़े स्तर पर शहरों में इनका इस्तेमाल करना अभी बहुत ज्यादा व्यावहारिक नहीं है। हाइड्रोजन बसों के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर की भारी जरूरत, ईंधन की सप्लाई में जटिलता और इनके कम संचालन केंद्रो की वजह, शहर की बसों के लिए फिलहाल CNG ही सबसे आसान समाधान है।
दिल्ली के लिएष इन हाइड्रोजन शटल बसों को CNG के तत्काल विकल्प के बजाय स्वच्छ सार्वजनिक परिवहन की दिशा में एक महत्वपूर्ण परीक्षण के रूप में देखा जाना चाहिए।
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