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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 16, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    डीलरों से सेकेंड हैंड कार खरीदते समय नहीं रहेगा धोखेबाजी का डर, सरकार लाने जा रही है नए नियम

    By Sonali SinghEdited By:
    Updated: Fri, 16 Sep 2022 10:49 AM (IST)

    Used car कर बाजार में डीलरों और खरीदारों के विश्वास को बढ़ाने के लिए परिवहन मंत्रालय ने एक ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को जारी किया है। इसके तहत पूर्व स्वामित् ...और पढ़ें

    भारत में सेकेंड हैंड कार बाजार से जुड़े नए नियम
    भारत में सेकेंड हैंड कार बाजार से जुड़े नए नियम

    नई दिल्ली, ऑटो डेस्क। अगर आप एक सेकेंड हैंड कार खरीदने का प्लान बना रहे हैं, लेकिन डर है कि कहीं डीलर आपको चोरी की कार या किसी ऐसे मॉडल को न थमा दे, जिसके कोई मान्य कागजात नहीं है, तो अब आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने प्री-ओन्ड वाहनों के एक नए नियम को लाने के लिए एक ड्राफ्ट नोटिफिकेश जारी किया है।

    राजमार्ग मंत्रालय ने सेकेंड हैंड कार बाजार में नए नियम को रेगुलेट करने के लिए के लिए केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के चैप्टर III में संशोधन का प्रस्ताव करते हुए इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लाया है। 

    क्या होगा नया नियम?

    ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब यूज़्ड कारों डीलरों को वाहनों का मालिक समझा जाएगा। हालांकि, इसके लिए पहले कुछ प्रक्रिया करनी होगी। वाहन के मालिक को अपनी पुरानी कार डीलर को बेचते समय क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) को ऑनलाइन या ऑफलाइन माध्यमों से इसके बारे में सूचित करना होगा। जिससे डीलर एक रजिस्टर्ड मालिक बन जाएगा।

    गाड़ी को ले लेने के बाद कार डीलरों को रजिस्टर्ड वाहनों के लिए एक ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करना होगा।

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    ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट के ये होंगे फायदे

    सेकेंड हैंड कार खरीदने वाले डीलर को ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद, वे इसके आधार पर अपने नाम पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (RC), डुप्लिकेट आरसी, फिटनेस सर्टिफिकेट, नो ऑबजेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) और ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप के लिए आवेदन कर सकेंगे। गौरतलब है कि ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट की मान्यता केवल पांच सालों के लिए ही रहेगी। इसके बाद डीलर को उस कार का मालिक नहीं समझा जाएगा।

    खरीदार को ऐसे मिलेगा फायदा

    ड्राफ्ट नोटिफिकेशन में प्रस्तावित नियमों का लाभ डीलरों के साथ-साथ खरीदारों को भी होगा। उल्लेख किए गए नियमों के मुताबिक, एक बार ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट जारी होने के बाद उस कार से हुई किसी भी दुर्घटना के लिए कार डीलर पूरी तरह से जिम्मेदार होगा। साथ ही आरटीओ के पास इसकी पूरी जानकारी होगी कि डीलर ने सभी मानदंड का पालन किया है कि नहीं।

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    ऐसे में खरीदार सीधा आरटीओ जाकर कार के बारे में पूरी जानकारी ले सकता है और किसी भी धोकेबाजी से बच सकता है। इसके अलावा अगर डीलर ने मानदंड का पालन नहीं किया तो उसका ऑथराइजेशन सर्टिफिकेट पूरी तरह से रद्द हो सकता है।

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