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    अररिया में हॉस्टल में खाना खाने के बाद 4 छात्राओं की बिगड़ी तबीयत, रेफरल अस्पताल में भर्ती

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 10:57 PM (IST)

    रानीगंज के भिट्ठा स्थित अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास में दोपहर का भोजन करने के बाद चार छात्राएं बीमार पड़ गईं, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया। ...और पढ़ें

    अस्पताल में इलाजरत बीमार छात्राएं।( जागरण)

    अस्पताल में इलाजरत बीमार छात्राएं।( जागरण)

    HighLights

    1. भिट्ठा छात्रावास में भोजन के बाद चार छात्राएं बीमार पड़ीं।

    2. चिकित्सकों ने फूड प्वाइजनिंग की आशंका जताई, स्थिति स्थिर।

    3. प्रशासन ने घटना की जांच के आदेश दिए, व्यवस्था पर सवाल।

    संवाद सूत्र, रानीगंज (अररिया)। रानीगंज प्रखंड के भिट्ठा गांव स्थित अल्पसंख्यक कल्याण छात्रावास में बुधवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब दोपहर का भोजन करने के बाद चार छात्राओं की अचानक तबीयत बिगड़ गई।

    छात्राओं को उल्टी, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने लगी। आनन-फानन में सभी को रानीगंज रेफरल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद उनकी स्थिति खतरे से बाहर बताई है।

    घटना के बाद छात्रावास की भोजन व्यवस्था, रसोई की साफ-सफाई और पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

    बीमार छात्राओं की पहचान कोमल, सोनिका, पल्लवी और अनुराधा के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि चारों छात्राएं भरगामा प्रखंड की रहने वाली हैं और भिट्ठा स्थित छात्रावास में रहकर पढ़ाई करती हैं।

    'कीट-पतंगा युक्त भोजन परोसा गया'

    घटना के बाद अस्पताल पहुंचे एक छात्रा के पिता राजेंद्र मेहता ने छात्रावास प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बच्चियों को कीट-पतंग युक्त दूषित भोजन परोसा गया था। भोजन करने के कुछ ही देर बाद बच्चियों की तबीयत बिगड़ने लगी।

    उन्होंने कहा कि यदि भोजन की गुणवत्ता की नियमित जांच होती और साफ-सफाई का ध्यान रखा जाता तो ऐसी घटना नहीं होती। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा छात्रावास की भोजन व्यवस्था में सुधार की मांग की।

    भोजन में गड़बड़ी से प्रधानाध्यापक का इनकार

    इधर विद्यालय के प्रधानाध्यापक जितेंद्र महाजन ने भोजन में गड़बड़ी के आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में अन्य सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं।

    उन्होंने बताया कि छात्रावास में आयरन युक्त पानी की समस्या बनी हुई है तथा भोजन की व्यवस्था जीविका समूह के माध्यम से कराई जाती है।

    प्रधानाध्यापक ने कहा कि छात्राओं के बीमार होने के पीछे अन्य कारण भी हो सकते हैं, जिसकी जांच आवश्यक है। उन्होंने यह भी बताया कि विद्यालय में बिजली की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है तथा लोड के अनुरूप विद्युत आपूर्ति नहीं होने से कई प्रकार की परेशानियां होती हैं।

    उन्होंने बताया कि सोमवार को विद्यालय की छात्राएं उपवास में थी 7 तारीख को विद्यालय का स्थापना दिवस बनाया जाना है इसका अभ्यास छात्राके द्वारा किया जा रहा था यह भी इस कारण से छात्राएं बीमार हो सकती है।

    रानीगंज रेफरल अस्पताल के चिकित्सक डॉ. राजू कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में मामला फूड प्वाइजनिंग का प्रतीत होता है।

    सभी छात्राओं का तत्काल उपचार किया गया और अब उनकी हालत स्थिर है। उन्होंने बताया कि समय पर इलाज मिलने से स्थिति गंभीर नहीं हुई। घटना के बाद प्रशासन भी सक्रिय हो गया है।

    प्रखंड विकास पदाधिकारी रूबी कुमारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है और इसकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। वहीं, जीविका के बीपीएम चेतन कुमार ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में आया है।

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    उन्होंने बताया कि संसाधनों की कमी और कुछ व्यवस्थागत कारणों से भोजन की रूटिंग में बदलाव होता रहता है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    दहशत का माहौल

    घटना के बाद छात्रावास में रह रही अन्य छात्राओं एवं उनके अभिभावकों में दहशत का माहौल है। अभिभावकों ने मांग की है कि छात्रावास के भोजन, रसोईघर की स्वच्छता, खाद्य सामग्री की गुणवत्ता तथा पेयजल की नियमित जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता। यदि जांच में लापरवाही या मानकों की अनदेखी सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

    फिलहाल छात्राओं की स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन यह घटना छात्रावासों में भोजन व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक जांच पर टिकी हैं।

    जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि छात्राओं की तबीयत वास्तव में दूषित भोजन से बिगड़ी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।

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