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    बिहार : शिक्षिका के पैर गंदे ना हो जाए...! कीचड़ व पानी से भरे स्कूल परिसर में बेंच लगाकर छात्रों ने कराया प्रवेश

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 01:00 PM (IST)

    जोगबनी के प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी में खराब सड़क और जलभराव के कारण छात्रों को शिक्षिका के लिए कीचड़ में बेंच लगानी पड़ी, जिसका वीडियो वायरल हो गया ...और पढ़ें

    HighLights

    1. प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी में आवागमन मार्ग की गंभीर समस्या।

    2. छात्रों ने शिक्षिका के लिए कीचड़ भरे रास्ते में बेंच लगाई।

    3. स्कूल की बदहाली पर प्रशासनिक उपेक्षा और नागरिकों में आक्रोश।

    संवाद सूत्र, जोगबनी (अररिया)। जोगबनी नगर परिषद के वार्ड संख्या 11 स्थित प्राथमिक विद्यालय खजूरबाड़ी से एक बेहद विचलित और सोचने पर मजबूर करने वाली खबर सामने आई है। स्कूल की बदहाली और प्रशासनिक उपेक्षा की वजह से न सिर्फ नौनिहालों का भविष्य अंधकार में है, बल्कि पवित्र गुरु-शिष्य परंपरा की मर्यादा भी तार-तार हो रही है।

    आवागमन मार्ग का अभाव

    इस स्कूल की सबसे बड़ी और बुनियादी समस्या यह है कि यहां तक सुरक्षित पहुंचने के लिए कोई भी सही सड़क या सुगम आवागमन मार्ग उपलब्ध नहीं है। चारों तरफ फैले गहरे पानी और दलदली कीचड़ के बीच से होकर नन्हे-मुन्ने बच्चे और शिक्षक हर दिन जान जोखिम में डालकर स्कूल आने को विवश हैं।

    बरसात में बढ़ती मुसीबत

    न तो किसी स्थानीय जनप्रतिनिधि ने और न ही शिक्षा विभाग के वरीय पदाधिकारियों ने वर्षों से चली आ रही इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए कोई पहल की है। बरसात के दिनों में तो स्थिति और भी बदतर हो जाती है, जिससे मासूम बच्चों के बीच गंभीर संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा हमेशा बना रहता है।

    वायरल हुआ शर्मनाक वीडियो

    इसी बीच, इंटरनेट मीडिया पर इस बदहाल स्कूल का एक वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसे देखकर हर कोई हैरान और बेहद आक्रोशित है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि छोटे-छोटे बच्चे गहरे पानी और कीचड़ में खड़े होकर अपनी एक शिक्षिका के लिए भारी-भरकम बेंच लगा रहे हैं।

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    Bihar School Access Students Carry Bench for Teacher in Mud (2)

    मासूमों से काम कराना गलत

    शिक्षिका को पानी में पैर रखना गंवारा नहीं था, इसलिए उन्होंने स्कूल के अंदर प्रवेश करने के लिए इन अबोध बच्चों को कीचड़ में उतार दिया। सड़क सुरक्षा और बाल अधिकारों के तहत मासूम बच्चों से अपने व्यक्तिगत आराम के लिए इस तरह का शारीरिक श्रम कराना पूरी तरह से गलत और अनुचित है।

    शिक्षकों की गरिमा सर्वोपरि

    हालांकि, इस संकट की मुख्य जड़ स्कूल का वो रास्ता है, जिसने शिक्षकों को भी इस असहज और गरिमाविहीन स्थिति में लाकर खड़ा कर दिया है। राष्ट्र के निर्माता कहे जाने वाले हमारे शिक्षकों को स्कूल आने-जाने में कोई व्यावहारिक परेशानी न हो, यह सुनिश्चित करना पूरी तरह सरकार का दायित्व है।

    प्रशासनिक उदासीनता से आक्रोश

    इस गंभीर मामले को लेकर पूर्व छात्र व पार्षद मो. मुश्ताक ने नगर परिषद कार्यालय में गुहार लगाई, लेकिन अधिकारियों ने पल्ला झाड़ते हुए इसे शिक्षा विभाग का मामला बता दिया। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि स्कूल के मार्ग को तुरंत दुरुस्त किया जाए, ताकि शिक्षक और छात्र दोनों सम्मानपूर्वक स्कूल पहुंच सकें।