बेटी-रोटी के रिश्ते पर खड़ी हुई 'कागज' की दीवार, नेपाल बॉर्डर पर आईडी नहीं तो एंट्री बंद
नेपाल सरकार द्वारा सीमा प्रवेश और कस्टम नियमों में सख्ती से भारत-नेपाल सीमा पर व्यापार और आवागमन प्रभावित हुआ है। पहचान पत्र की अनिवार्यता से 'रोटी-बे ...और पढ़ें

बेटी-रोटी के रिश्ते पर खड़ी हुई 'कागज' की दीवार, नेपाल बॉर्डर पर आईडी नहीं तो एंट्री बंद (AI Generated Image)

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दीपक कुमार गुप्ता, सिकटी (अररिया)। नेपाल सरकार द्वारा भंसार (कस्टम ड्यूटी) और सीमा प्रवेश के नियमों में की गई सख्ती का भारत-नेपाल सीमा पर गहरा असर दिखाई दे रहा है। सीमावर्ती भारतीय बाजारों में सन्नाटा पसरा हुआ है। वहीं, नेपाल की ओर से सीमा पार कर खरीदारी करने वाले लोगों की संख्या में भारी कमी आई है।
भारत-नेपाल सीमा पर सुरक्षा जांच बढ़ गई है, जिससे नेपाल में प्रवेश के लिए पहचान पत्र अनिवार्य हो गया है। नेपाल सरकार ने सुरक्षा कारणों से यह कदम उठाया है, पर इससे मजदूर, मरीज और रोजमर्रा के यात्री बुरी तरह प्रभावित हैं।
आधार कार्ड, वोटर आईडी जैसे वैध दस्तावेज के बिना लोगों को वापस लौटाया जा रहा है। देखा जाए तो दोनों मित्र राष्ट्र जिनके बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है, इन दिनों कागज की दीवार खड़ी होती दिख रही है।
नो आईडी, नो एंट्री
नेपाल सरकार द्वारा सुरक्षा कारणों और सख्त कस्टम नियमों के लागू होने के बाद, सीमा पर सख्ती काफी बढ़ा दी गई है। अब बिना वैध पहचान पत्र के भारतीय नागरिकों की नेपाल में नो-एंट्री कर दी गई है। कभी-कभी तो आधार कार्ड या पैन कार्ड जैसी डिजिटल/साधारण प्रतियों को बॉर्डर पर वैध नहीं मानकर लोगों को बैरंग वापस भेज दिया जाता है।
नेपाल सरकार के नए नियम से सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नए कस्टम नियमों से सामान की चेकिंग और ज़ब्ती के कारण सीमा के दोनों ओर के बाज़ारों में ग्राहकों की संख्या में कमी आई है।
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सीमावर्ती क्षेत्रों के निवासियों और व्यापारियों में इस बात को लेकर रोष और बेचैनी है कि कागज़ी औपचारिकताओं के कारण सदियों पुराने सामाजिक और सांस्कृतिक संबंधों में खटास आ रही है।
मित्र राष्ट्र के कारण खुली सीमा
दोनों देश के नागरिकों में गीता कार्की, भुवन थापा, श्याम नारायण, बबिता देवी, करुणेश गुरुंग आदि का मानना है कि भारत-नेपाल के बीच रोटी-बेटी का रिश्ता है। जांच का दायरा भी ठीक है, लेकिन रोजमर्रा के सामानों पर लगाया गया कस्टम ड्यूटी गलत है।
सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में खरीदारी नहीं होने के कारण दोनों देश की दुकानदारी प्रभावित हो रही है। सीमावर्ती क्षेत्र के बाजारों में ग्राहकों की भारी कमी देखी जा रही है।
रोजाना सैकड़ों मरीज जाते नेपाल
भारत और नेपाल के बीच बेटी-रोटी का रिश्ता माना जाता है। सोनामनी गुदाम से आमबारी तक लगभग 38 किमी की सीमा में बड़ी संख्या में ऐसे परिवार हैं जिनके रिश्तेदार दोनों देशों में रहते हैं।
यही वजह है कि पहले लोग बिना किसी विशेष जांच के आसानी से सीमा पार कर लेते थे, लेकिन अब स्थिति पूरी तरह बदल गई है।
नेपाल के बिराटनगर, लहान और धरान में बड़े अस्पताल और आंखों के इलाज के प्रसिद्ध केंद्र होने के कारण बिहार के सीमावर्ती जिलों से रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज कराने नेपाल जाते हैं, लेकिन अब पहचान पत्र की अनिवार्यता के कारण इसमें जटिलताएं आ गई है।
नेपाल सरकार ने 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए भी नियम लागू कर दिया है। अब बच्चों के लिए जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल का पहचान पत्र दिखाना जरूरी कर दिया गया है। जिन लोगों के पास कोई दस्तावेज नहीं मिल रहा है, उन्हें सीमा से ही लौटाया जा रहा है।
अधिकारियों ने क्या बताया?
यह अभियान सुरक्षा के दृष्टिकोण से चलाया जा रहा है। भारत ही नहीं बल्कि सभी देशों से आने वाले लोगों के लिए पहचान सत्यापन अनिवार्य किया गया है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से नेपाल प्रशासन द्वारा सीमा पर अतिरिक्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है। - शीतल श्रेष्ठ, एपीएफ, डीएसपी, नेपाल
सीमा क्षेत्र में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखने के लिए दोनों देशों के सुरक्षा बल लगातार समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत हो रही है। सीमा पर हर आने जाने वाले लोगों की गहन जांच के बाद ही प्रवेश की अनुमति दी जा रही है। - पीएन सिंह, कार्यवाहक कमाडेंट, एसएसबी 52वीं वाहिनी अररिया
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