औरंगाबाद के 93 पंचायतों में बनेंगे मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप, 40 में शुरू हुई निर्माण प्रक्रिया
औरंगाबाद में मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत 93 पंचायतों में मंडप निर्माण को मंजूरी मिली है। पहले चरण में 46 पंचायतों को स्वीकृति मिली, जिसम ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप
HighLights
93 पंचायतों में मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप निर्माण को मंजूरी।
40 पंचायतों में निर्माण प्रक्रिया शुरू, मिट्टी जांच पूरी।
सामाजिक आयोजनों हेतु गांवों में बेहतर सुविधा मिलेगी।
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। मुख्यमंत्री कन्या विवाह मंडप योजना के तहत 93 पंचायतों में विवाह मंडप निर्माण के प्रस्ताव को हरी झंडी मिल गई है। महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत पहले चरण में 46 पंचायतों को निर्माण की स्वीकृति प्रदान कर दी गई है, जिसमें 40 पंचायतों में भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू की गई है।
इन पंचायतों में मिट्टी जांच की कार्रवाई पूरी की गई है और जहां मिट्टी जांच हो चुकी है, वहां निर्माण कार्य के लिए निविदा प्रक्रिया आरंभ की जा रही है।
पंचायतों में निर्माण की कार्रवाई तेज
जिला पंचायती राज पदाधिकारी कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार रफीगंज प्रखंड के बघौरा, लोहरा, भदवा, सिहुली, दुगुल, भदुकीकला, गोरडिहा, चौबड़ा, पौथू, चरकावां, लट्टा, ईटार, कोटवारा, केराप, बलिगांव, भेटनिया और अरथुआ पंचायतों में मंडप निर्माण की स्वीकृति दी गई है।
गोह प्रखंड के तेयाप, चापुक, फाग और हथियारा पंचायत, देव प्रखंड के एरौरा, पश्चिमी केताकी, दुलारे, इसरौर और बनुआ पंचायत में योजना को मंजूरी मिल चुकी है।
बारुण प्रखंड के कोचाढ़, हसपुरा प्रखंड के अहियापुर, मलहारा और जैतपुर पंचायत तथा मदनपुर प्रखंड के सलैया, घटराइन, बेरी, खिरियावां, पिरथू, वार, पिपरौरा, मनिका और घोड़ा डिहरी पंचायतों में भी निर्माण कार्य के लिए स्वीकृति प्रदान की गई है।
वहीं दाउदनगर प्रखंड के तरारी पंचायत में निर्माण की स्वीकृति मिली है। चयनित पंचायतों में विवाह मंडप निर्माण हेतु भूमि का चयन किया गया है। विभाग की ओर से निर्माण के लिए आवश्यक नक्शा एवं भूमि का विस्तृत विवरण जारी किया गया है।
13,200 वर्गफीट भूमि की आवश्यकता
प्रत्येक मंडप के निर्माण के लिए लगभग 120 × 110 फीट यानी कुल 13,200 वर्गफीट भूमि की आवश्यकता निर्धारित की गई है। भूमि चयन की प्रक्रिया ग्राम पंचायत की अनुशंसा पर जिला पदाधिकारी द्वारा की जाएगी। विभाग के नियम के अनुसार पंचायत सरकार भवन के समीप उपलब्ध सरकारी या सार्वजनिक भूमि को प्राथमिकता दी गई है।
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यदि वहां भूमि उपलब्ध नहीं हो, तो अधिक जनसंख्या वाले राजस्व ग्राम को प्राथमिकता के आधार पर चुना जाएगा। भूमि के अभाव में दान स्वरूप भूमि भी स्वीकार की जा सकती है, जिसका पंजीकरण बिहार राज्यपाल के नाम से होना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही चयनित भूमि विवादमुक्त, जल-जमाव से मुक्त तथा सभी वर्गों के लोगों के लिए सुगम आवागमन वाली होनी चाहिए। जिला पंचायती राज पदाधिकारी इफ्तेखार अहमद के अनुसार कन्या विवाह मंडप भवन बनने से गांवों में सामाजिक आयोजनों के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी।