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    औरंगाबाद को सौगात: 150 मेगावाट के सोलर पार्क को मिली हरी झंडी, 2 साल में बनकर होगा तैयार

    Updated: Thu, 09 Jul 2026 04:17 PM (IST)

    केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक में औरंगाबाद के बारुण प्रखंड में 150 मेगावाट ग्रिड-संलग्न सोलर पार्क और बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली परिय ...और पढ़ें

    जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा

    जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा

    HighLights

    1. औरंगाबाद में 150 मेगावाट सोलर पार्क परियोजना को मिली प्राथमिकता।

    2. परियोजना में 40 मेगावाट/160 मेगावाट-घंटा बैटरी भंडारण प्रणाली शामिल।

    3. स्वच्छ ऊर्जा, औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित होगी।

    जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा को लेकर गुरुवार को केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री और मुख्यमंत्री की संयुक्त अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

    बैठक में जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा (Aurangabad DM Abhilasha Sharma) सहित संबंधित विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

    इस दौरान जिले के बारुण प्रखंड के मेह एवं शेखपुरा गांव में प्रस्तावित 150 मेगावाट ग्रिड-संलग्न सोलर पार्क और 40 मेगावाट/160 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (बीइएसएस) परियोजना को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए।

    बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना, पीएम कुसुम योजना, यूएलए योजना सौर ऊर्जा परियोजनाओं तथा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली सहित राज्य में चल रही विभिन्न नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई। स्वच्छ, सस्ती और विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने के लिए चल रहे प्रयासों पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

    निर्माण की समय-सीमा दो वर्ष निर्धारित

    समीक्षा के दौरान बताया गया कि औरंगाबाद की यह महत्वाकांक्षी परियोजना बिहार स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (बीएसपीजीसीएल) द्वारा विकसित की जा रही है। इसे नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने 15 अप्रैल 2026 को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की है तथा इसके निर्माण की समय-सीमा दो वर्ष निर्धारित की गई है।

    परियोजना के तहत 150 मेगावाट क्षमता का सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित होगा, जिसके साथ 40 मेगावाट क्षमता एवं 160 मेगावाट-घंटा बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली विकसित की जाएगी। यह प्रणाली दिन में उत्पादित अतिरिक्त सौर ऊर्जा का भंडारण कर शाम के पीक आवर्स में बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करेगी।

    बैठक में बताया गया कि परियोजना से विद्युत ग्रीड की विश्वसनीयता बढ़ेगी, पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम होगी, ट्रांसमिशन हानि घटेंगी तथा उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण और निर्बाध बिजली उपलब्ध होगी।

    साथ ही राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने के साथ ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी, ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

    स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी परियोजना

    परियोजना का विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार करने के लिए बीएसपीजीसीएल ने सोलर एनर्जी कारपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड (सेकी) को परामर्शी एजेंसी नियुक्त किया है।

    डीपीआर में तकनीकी, वित्तीय, पर्यावरणीय, भूमि विकास, ट्रांसमिशन कनेक्टिविटी और बैटरी स्टोरेज प्रणाली सहित सभी आवश्यक पहलुओं को शामिल किया जाएगा।

    बैठक के बाद जिला पदाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को भूमि, आधारभूत संरचना, अनापत्ति प्रमाणपत्र एवं अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।

    उन्होंने कहा कि यह परियोजना औरंगाबाद ही नहीं बल्कि पूरे बिहार में स्वच्छ ऊर्जा और औद्योगिक विकास के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी।

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