Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले थे, बलिदान देकर इतिहास के पन्नों में अमर हो गए औरंगाबाद के जगतपति

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 10:27 AM (IST)

    औरंगाबाद के खरांटी निवासी स्वतंत्रता सेनानी जगतपति ने पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराते हुए बलिदान दिया था। उनके पैतृक घर और स्मारकों की उपेक्षा हो रही है ...और पढ़ें

    HighLights

    1. जगतपति ने पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराते हुए बलिदान दिया।

    2. उनका पैतृक घर खरांटी गांव में जर्जर होकर गिर चुका है।

    3. ग्रामीण उनके स्मारकों और प्रतिमाओं के संरक्षण की मांग करते हैं।

    सनोज पांडेय, औरंगाबाद। देश की आजादी के लिए पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने निकले और अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों का सामना करते हुए बलिदान देने वाले औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड के खरांटी निवासी जगतपति की कहानी ग्रामीणों को गर्व से भर देती है।

    ग्रामीण उनकी कहानी सुनाते रो पड़ते हैं। विडंबना यह है कि जिस वीर सपूत ने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर किए, उनके पैतृक गांव खरांटी में उनका घर पूरी तरह जर्जर होकर गिर चुका है। इनके कोई स्वजन यहां नहीं रहते हैं।

    ग्रामीण 75 वर्षीय रामलखन पांडेय, 80 वर्षीय वृहस्पति पांडेय एवं उनके परिवार से जुड़े 80 वर्षीय शिशिर कुमार सिन्हा बताते हैं कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने के लिए निकले आंदोलनकारियों में जगतपति शामिल थे।

    पटना सचिवालय पर तिरंगा फहराने में हुए थे बलिदान 

    अंग्रेजी शासन ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चलाईं, जिसमें उन्होंने वीरगति प्राप्त की। उनके बलिदान की चर्चा लंबे समय तक गांवों में होती रही। अब भी लोग उन्हें क्षेत्र का गौरव मानते हैं।

    उनके परिवार से जुड़े 60 वर्षीय कुमार सत्य प्रकाश, ग्रामीण अरुण पांडेय, सत्येंद्र पांडेय एवं प्रभात कुमार सिन्हा ने बताया कि समय बीतने के साथ शहीद की स्मृतियां धुंधली पड़ती जा रही हैं।

    खरांटी गांव में जहां कभी उनका घर हुआ करता था, वहां अब टूटे अवशेष दिखाई देते हैं। देखभाल के अभाव में मकान धराशायी हो चुका है।

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन पहल करे तो इस स्थल को शहीद स्मृति स्थल के रूप में विकसित किया जा सकता है। सरकार की ओर से गांव के बाहर उनकी याद में एक स्मारक का निर्माण कराया गया है। 

    खबरें और भी

    लेकिन वहां भी नियमित सफाई और संरक्षण की व्यवस्था नहीं है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों को छोड़ दें तो अधिकांश दिनों में स्मारक सुनसान पड़ा रहता है।

    aurangabad

    (औरंगाबाद के ओबरा प्रखंड के खरांटी गांव स्थित बलिदानी जगतपति का घर)

    औरंगाबाद शहर में जगतपति की है दो प्रतिमाएं

    औरंगाबाद शहर में बलिदानी जगतपति की दो प्रतिमाएं स्थापित हैं। इनमें से एक रमेश चौक एवं दूसरा अनुग्रह नारायण नगर भवन परिसर में। दोनों मूर्ति सार्वजनिक स्थल पर लगी है, लेकिन उपेक्षा साफ दिखाई देती है।

    प्रतिमाओं के आसपास गंदगी, टूट-फूट और रंग-रोगन के अभाव से आमजन में नाराजगी है। शहर के क्लब रोड निवासी अरविंद सिन्हा, अधिवक्ता डाॅ. रामकिशोर शर्मा कहते हैं कि बलिदानियों की प्रतिमाएं केवल औपचारिक श्रद्धांजलि का माध्यम नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को देशभक्ति का संदेश देने वाली प्रेरणा हैं।

    पैतृक स्थल को संरक्षित करने, स्मारक का सुंदरीकरण एवं औरंगाबाद में स्थापित दोनों प्रतिमाओं की नियमित देखभाल सुनिश्चित करने की मांग ग्रामीण करते हैं।

    उनका कहना है कि आजादी के 79वीं वर्षगांठ पर ऐसे अमर बलिदानियों को केवल भाषणों में नहीं, बल्कि ठोस संरक्षण और सम्मान के माध्यम से सच्ची श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए।