औरंगाबाद में NH-139 के डायवर्जन रूट पर संकट, हादसे के डर से पुल पर भारी वाहनों की एंट्री पर रोक
दोमुहान पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग हो रहा जगई-देव बालूगंज सड़क का पुल भारी वाहनों के दबाव से जर्जर हो गया है। ग्रामीण ...और पढ़ें

पुल पर भारी वाहनों की एंट्री पर रोक
HighLights
जगई-देव बालूगंज पुल भारी वाहनों से हुआ जर्जर।
ग्रामीणों ने बड़े हादसे के डर से रोके भारी वाहन।
प्रशासन से पुल की मरम्मत और जांच की मांग।
संवाद सूत्र, कुटुंबा (औरंगाबाद)। राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर स्थित दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्ग के रूप में उपयोग किए जा रहे जगई-देव बालूगंज सड़क का पुल अब खुद जर्जर होकर हादसे को आमंत्रित कर रहा है।
लगातार भारी वाहनों के आवागमन से पुल की स्थिति काफी खराब हो गई है। पुल में दरारें आने और संरचना कमजोर होने की आशंका के बीच ग्रामीणों ने किसी बड़े हादसे की संभावना जताते हुए भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी है।
भारी वाहनों के परिचालन पर रोक
ग्रामीणों ने बताया कि दोमुहान पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग-139 पर भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी थी। इसके बावजूद कई ट्रक और अन्य भारी वाहन एरका कॉलोनी नहर मार्ग से होकर जगई-देव बालूगंज सड़क का उपयोग कर रहे हैं।
यह पुल भारी वाहनों के निरंतर दबाव को झेलने के लिए उपयुक्त नहीं है। क्षमता से अधिक भार पड़ने के कारण पुल में दरारें दिखाई देने लगी हैं और इसकी स्थिति दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
ग्रामीणों का कहना है कि पुल से प्रतिदिन बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, स्कूली बच्चे, किसान तथा दोपहिया और छोटे चारपहिया वाहन गुजरते हैं। यदि समय रहते पुल की तकनीकी जांच कर आवश्यक मरम्मत नहीं कराई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
उनका कहना है कि प्रशासन को इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए।
भारी वाहनों का परिचालन नहीं होगा
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए ग्रामीणों ने एकजुट होकर पुल से भारी वाहनों के आवागमन पर रोक लगा दी। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि पुल की तकनीकी जांच कर उसकी मरम्मत कराई जाए और भारी वाहनों के लिए सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था की जाए, ताकि ग्रामीणों की जान जोखिम में न पड़े।
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ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुल की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक किसी भी कीमत पर भारी वाहनों का परिचालन नहीं होने दिया जाएगा। उनका कहना है कि प्रशासन की अनदेखी का खामियाजा स्थानीय लोगों को नहीं भुगतना चाहिए।
ग्रामीण बिनोद पांडेय, दिलीप पासवान, बिरजू पासवान, संदीप पासवान, सलेंद्र कुमार, विकास शर्मा, नंदू रिकियासन सहित कई ग्रामीणों ने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।