वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे को मिली रफ्तार; औरंगाबाद के धनीवार में जमीन मापी का रास्ता साफ
वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित जमीन की मापी का रास्ता साफ हो गया है। जिला प्रशासन और एनएचएआई अधिकारियों ने किसानों से बैठक क ...और पढ़ें

प्रखंड कार्यालय सभागार में अधिकारी एवं किसान। जागरण
HighLights
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेस-वे जमीन मापी का रास्ता साफ।
प्रशासन-एनएचएआई ने किसानों से बैठक कर सहमति बनाई।
मुआवजे और अदालती मामलों पर किसानों में नाराजगी।
संवाद सूत्र, अंबा (औरंगाबाद)। भारत माला परियोजना के तहत बन रहे वाराणसी-कोलकाता ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित जमीन की मापी के लिए रास्ता साफ हो गया है।
जिला प्रशासन और राष्ट्रीय राजमार्ग के पदाधिकारियों ने शुक्रवार को प्रखंड कार्यालय सभागार में धनीवार गांव के किसानों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की।
जमीन अधिग्रहण मामले से संबंधित समस्याओं पर एक एक कर किसानों से बात कर परियोजना की गति बढ़ाने में किसानों से सहयोग की मांग की।
बैठक में किसानों की सहमति के बाद एडीएम ने आगामी सोमवार से जमीन की मापी शुरू कराने का निर्णय लिया है।
मुआवजा को लेकर नाराज हैं किसान
बैठक के बाद बाहर निकलते ही मुआवजे और अदालती मामले को लेकर किसानों के बीच आपसी मतभेद व नाराजगी भी खुलकर सामने आई है।
प्रशासनिक और एनएचएआई के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह, एसडीएम संतन कुमार सिंह, एडीएम आपदा उपेंद्र पंडित, एनएचएआई पीडी समेत अन्य शामिल रहे।
अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति एवं जमीन मापी को लेकर किसानों के सामने प्रशासनिक पक्ष रखा। बैठक में किसानों का समर्थन मिला।
इसके बाद एडीएम अनुग्रह नारायण सिंह ने घोषणा की कि सोमवार से एक्सप्रेस-वे के लिए तय जमीन की मापी का काम शुरू कर दिया जाएगा।
धनीवार गांव में लगेगा विशेष कैंप
उन्होंने कहा कि जिन रैयतों का एलपीसी या अन्य जरूरी कागजात अभी तैयार नहीं हो पाया है, उन्हें परेशान होने की जरूरत नहीं है। प्रशासन इसके लिए धनीवार गांव में विशेष कैंप लगाएगा।
अधिग्रहित जमीन की मापी को लेकर बैठक में मौजूद किसानों के विचार बंटे हुए नजर आए। कुछ किसानों ने विकास कार्य और मापी का समर्थन किया, वहीं कई किसानों ने इस पर कड़ा एतराज जताया।
विरोध कर रहे किसानों का कहना था कि जमीन से जुड़ा मामला अभी न्यायालय में लंबित है, इसलिए कोर्ट का फैसला आने से पहले मापी कराना पूरी तरह गलत है।
बैठक खत्म होने के बाद सभागार से बाहर निकलते ही किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। किसानों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन पर जबरन दबाव बनाकर मापी कराने की कोशिश कर रहा है।
किसान वैद्यनाथ नाथ तिवारी ने प्रशासनिक कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रशासन फूट डालो और शासन करो की नीति पर चल रहा है। एक ही गांव में किसानों को मुआवजे की दर अलग-अलग दी जा रही है।