विक्रमशिला पुल हादसे के बाद जागा प्रशासन, बांका में 1200 से अधिक पुलों का होगा सेफ्टी ऑडिट
बांका जिला प्रशासन ने हाल की घटनाओं के बाद 1200 से अधिक पुलों का विशेष सुरक्षा ऑडिट कराने का निर्णय लिया है। मानसून से पहले सभी पुलों का 'हेल्थ कार्ड' ...और पढ़ें

पुराने ब्रिज की फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
संवाद सूत्र, बांका। बिहार के बांका में पुलों की सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। हाल के दिनों में पुल गिरने की घटनाओं, विशेषकर विक्रमशिला सेतु और उसके ठीक बाद जेठौरनाथ पुल में दरार से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए प्रशासन ने जिले के सभी छोटे-बड़े पुलों और पुलियों की विशेष जांच कराने का निर्णय लिया है।
इसके तहत नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और ग्रामीण सड़कों पर बने करीब 1200 पुल-पुलियों का सेफ्टी ऑडिट कराया जाएगा तथा प्रत्येक पुल का अलग से ‘हेल्थ कार्ड’ तैयार किया जाएगा।
जिला प्रशासन की ओर से ग्रामीण कार्य विभाग, पथ निर्माण विभाग, पुल निर्माण निगम लिमिटेड समेत सभी संबंधित विभागों के कार्यपालक अभियंताओं को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
अधिकारियों से कहा गया है कि मानसून शुरू होने से पहले सभी पुलों की तकनीकी जांच पूरी कर ली जाए, ताकि बरसात के दौरान किसी प्रकार की दुर्घटना की आशंका न रहे।
सेफ्टी ऑडिट के दौरान पुलों के गर्डर, स्लैब, पिलर, ज्वाइंट और जल निकासी व्यवस्था की गहन जांच की जाएगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि पुलों के आसपास जलजमाव की स्थिति तो उत्पन्न नहीं हो रही है।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जहां भी अवरोध, दरार या क्षति की संभावना मिलेगी, वहां तत्काल सफाई और मरम्मत कार्य कराया जाएगा।
तकनीकी टीम करेगी जांच
पुलों की जांच के लिए सभी विभागों को तकनीकी टीम गठित करने का निर्देश दिया गया है। इन टीमों में जूनियर इंजीनियर, एसडीओ और सहायक अभियंताओं को शामिल किया जाएगा।
टीम मौके पर पहुंचकर पुलों की वर्तमान स्थिति का आकलन करेगी और उसकी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलों का हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा, जिसमें उनकी मजबूती, मरम्मत की आवश्यकता और संभावित खतरे से जुड़ी जानकारी दर्ज रहेगी।
समय सीमा के अंदर करनी है जांच
प्रशासन का मानना है कि समय रहते तकनीकी जांच और आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा कर लेने से मानसून के दौरान किसी बड़ी दुर्घटना को रोका जा सकेगा। खासकर ग्रामीण इलाकों में बने पुल-पुलिया आवागमन की मुख्य कड़ी हैं।
ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता बन गई है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जांच कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाए और निर्धारित समय सीमा के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए।
थोड़ी सी लापरवाही पड़ रही भारी
जेठौरनाथ पुल के ज्वाइंट में दरार के कारण भारी वाहनों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है। जिससे काफी परेशानी बढ़ गई है। दरअसल, समय रहते अगर ज्वाइंट के दरार को ठीक कर लिया जाता, तो इस तरह की स्थिति उत्पन्न नहीं होती।
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रजौन प्रखंड में रजवार गांव में कतरिया नदी पर बना पल भी डैमेज होने लगा है। अगर समय रहते पहुंच पथ और पुल को ठीक नहीं किया गया तो स्थिति और खराब हो जाएगी। इसी तरह कई अन्य बड़े और छोटे पुलों की स्थिति है।
सभी विभाग को अपने-अपने पुलों की जांच का निर्देश दिया गया है। इसके लिए टीम गठित कर जांच करनी है। तय समय सीमा के अंदर जांच कर रिपोर्ट तैयार करनी है। -उपेंद्र सिंह, डीडीसी।