बिहार में केज कल्चर का धमाका : बांका के जलाशयों से हर साल निकलेगी 2000 टन मछली, युवाओं को मिलेगा बंपर रोजगार
बिहार के बांका जिले में मत्स्य विभाग केज कल्चर तकनीक को बढ़ावा दे रहा है, जिससे चार जलाशयों में 554 अत्याधुनिक केज स्थापित किए गए हैं। इससे सालाना 200 ...और पढ़ें

बांका को मत्स्य हब बनाने की तैयारी: 4 जलाशयों में 554 केज से उत्पादन होगा दोगुना, किसानों की चमकेगी किस्मत
HighLights
बांका में केज कल्चर तकनीक से मत्स्य उत्पादन में वृद्धि।
चार जलाशयों में 554 अत्याधुनिक केज सफलतापूर्वक स्थापित किए गए।
सालाना 2000 टन मछली उत्पादन और रोजगार के अवसर।
संवाद सूत्र, बांका। बिहार के बांका जिले में मत्स्य उत्पादन को एक नए और आधुनिक स्तर पर ले जाने के लिए मत्स्य विभाग ने अपनी कमर कस ली है। पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़ अब जिले के बड़े जलाशयों में केज कल्चर (पिंजरा मत्स्य पालन) तकनीक का दायरा बहुत ही तेजी से बढ़ाया जा रहा है।
चार जलाशयों का हुआ चयन
जिले के चार प्रमुख जलाशयों ओढ़नी, चानन, बधुआ और बेलहरना में इस आधुनिक एवं वैज्ञानिक तकनीक से बड़े पैमाने पर मत्स्य पालन शुरू किया गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इन चारों जलाशयों को मिलाकर वर्तमान में कुल 554 अत्याधुनिक केज सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं।
बधुआ जलाशय में सबसे ज्यादा
विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे अधिक 350 केज बधुआ जलाशय में, 144 ओढ़नी में, जबकि चानन और बेलहरना में 30-30 केज लगाए गए हैं। स्थापित किए गए इन प्रत्येक केज की मानक लंबाई नौ मीटर, चौड़ाई चार मीटर तथा पानी के भीतर की गहराई चार मीटर निर्धारित की गई है।
सालाना दो हजार टन उत्पादन
इन आधुनिक केजों के माध्यम से जिले में अब प्रतिवर्ष करीब दो हजार टन मछली उत्पादन की एक विशाल क्षमता पूरी तरह से विकसित हो चुकी है। एक केज के भीतर औसतन तीन से चार हजार उच्च गुणवत्ता वाले मत्स्य बीज छोड़े जाते हैं, जिससे कम समय में बंपर पैदावार मिल रही है।
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मत्स्य पालकों की बढ़ी आय
जिला मत्स्य पदाधिकारी कृष्ण कन्हैया ने बताया कि केज कल्चर तकनीक के माध्यम से जिले के प्राकृतिक जलाशयों का पहले से बेहतर उपयोग हो रहा है। इस उन्नत तकनीक के इस्तेमाल से स्थानीय मत्स्य पालकों को पारंपरिक मत्स्य पालन की तुलना में कई गुना अधिक उत्पादन और मुनाफ़ा मिल रहा है।
मिलेगा तकनीकी और वित्तीय सहयोग
उन्होंने आगे बताया कि आने वाले दिनों में जिले के अन्य छोटे-बड़े जलाशयों में भी इस केज कल्चर योजना का व्यापक विस्तार किया जाएगा। इसके लिए विभाग मत्स्य पालकों को आधुनिक किट, ल प्रशिक्षण, वित्तीय अनुदान और विशेषज्ञ तकनीकी मार्गदर्शन भी मुफ्त में उपलब्ध करा रहा है।
रोजगार के बढ़ेंगे नए अवसर
सरकार की इन विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से बांका जिला बहुत जल्द ही मत्स्य उत्पादन के मामले में पूरी तरह से आत्मनिर्भर बन जाएगा। मछली उत्पादन बढ़ने से न सिर्फ सीमांचल और अंग क्षेत्र में व्यावसायिक प्रगति होगी, बल्कि ग्रामीण इलाकों में रोजगार के बंपर अवसर भी पैदा होंगे।