बांका चांदन डैम में बिहार के शाहबाज का केज कल्चर मॉडल हिट; CCTV व सोलर लाइट के साथ 100 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य
बांका के चांदन डैम में शाहबाज आलम का केज कल्चर फिश फार्मिंग मॉडल सफल रहा है, जो पूरे बिहार के लिए प्रेरणा बन गया है। आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी और सोलर ला ...और पढ़ें

पारंपरिक मत्स्य पालन छोड़ अपनाई आधुनिक फ्लोटिंग केज तकनीक; सोलर इन्वर्टर और CCTV कैमरे से रख रहे नजर
HighLights
चांदन डैम में शाहबाज का केज कल्चर मॉडल हिट।
आधुनिक तकनीक, सीसीटीवी, सोलर लाइट से निगरानी।
100 टन मछली उत्पादन का रखा है लक्ष्य।
संवाद सूत्र, जयपुर (बांका)। पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे बढ़ते हुए बांका का चांदन डैम अब आधुनिक केज कल्चर फिश फार्मिंग का सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। डैम में स्थापित फ्लोटिंग केजों में वैज्ञानिक तरीके से मत्स्य पालन कर रहे शाहबाज आलम न सिर्फ जिले, बल्कि पूरे बिहार के युवाओं और मत्स्य पालकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गए हैं। आधुनिक तकनीक के जरिए कम जल क्षेत्र में अधिक, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण मछली उत्पादन संभव हो रहा है।
आंधी में केज पलटने और नुकसान के बाद भी नहीं मानी हार
शाहबाज आलम ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2024 में चांदन डैम में केज कल्चर की शुरुआत की थी। शुरुआती सफर चुनौतियों से भरा रहा। पिछले वर्ष तेज आंधी में मछलियों से भरा एक केज पलट गया था, जिससे उन्हें भारी आर्थिक क्षति हुई। इसके अलावा बीमारियों के कारण भी कई मछलियां मर गईं।
इन तमाम दिक्कतों के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और तकनीकी सुधार करते हुए अपने व्यवसाय को नई दिशा दी।
-1785919240977.jpg)
CCTV कैमरे और सोलर लाइट से निगरानी, 100 टन उत्पादन का लक्ष्य
डैम के फ्लोटिंग केजों में रोहू, कतला और पंगासियस प्रजाति की मछलियां पाली जा रही हैं। वजन बढ़ने के अनुसार मछलियों को अलग-अलग केज में शिफ्ट किया जाता है।
हाई-टेक सुरक्षा: केजों की निगरानी के लिए CCTV कैमरे लगाए गए हैं।
सोलर ऊर्जा: रोशनी और कैमरों का संचालन सोलर इन्वर्टर से होता है।
बाजार में मांग: उत्पादित मछलियां बांका जिले के विभिन्न प्रखंडों के अलावा कहलगांव के बाजारों में सप्लाई होती हैं।
लक्ष्य: शाहबाज ने अगले दो महीनों में लगभग 100 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
अधिकारियों ने की सराहना, बढ़ेगी केज की संख्या
शाहबाज ने सफलता का श्रेय बिहार सरकार और मत्स्य संसाधन विभाग से मिले प्रशिक्षण व तकनीकी सहयोग को दिया है।
"ओढ़नी, बदुआ एवं चांदन डैम में केज कल्चर फिश फार्मिंग की शुरुआत की गई है। इनमें से चांदन डैम में शाहबाज द्वारा संचालित केज कल्चर सबसे बेहतरीन है। बहुत जल्द यहां और अधिक केज बढ़ाए जाएंगे।"
— कन्हैया कुमार, जिला मत्स्य पालन पदाधिकारी, बांका