बांका जेल को इको-फ्रेंडली बनाने की पहल, गीले कचरे से कैदी तैयार करेंगे जैविक खाद
बांका मंडल कारा को इको-फ्रेंडली बनाने की पहल के तहत बंदी रसोई के कचरे से जैविक खाद बनाएंगे, जिससे कचरा प्रबंधन और उनका कौशल विकास होगा। ...और पढ़ें
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HighLights
बंदी रसोई के कचरे से जैविक खाद बनाएंगे।
खाद बनाने का तकनीकी प्रशिक्षण बंदियों को मिलेगा।
जेल में वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा लगेगी।
संवाद सूत्र, बांका। मंडल कारा को इको-फ्रेंडली बनाने की पहल शुरू कर दी गई है। जेल प्रशासन ने कचरे के सही प्रबंधन और जैविक खाद तैयार करने की पहल की है। इसके तहत जेल के बंदियों को ही इसमें मुख्य रूप से शामिल किया जाएगा, जिससे वे हुनरमंद बन सकें।
दरअसल, जेल परिसर की रसोई से रोजाना भारी मात्रा में सब्जियों के छिलके और गीला कचरा निकलता है। इस अपशिष्ट के साथ-साथ परिसर से निकलने वाले अन्य कचरों को अब फेंकने के बजाय उससे जैविक खाद तैयार की जाएगी। इस पहल से जेल परिसर में कचरों का सही प्रबंधन भी हो सकेगा। इस खाद का उपयोग जेल की बागवानी में किया जाएगा, जिससे परिसर की क्यारियां महक उठेंगी।
बंदियों को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
जेल के बंदियों को जैविक खाद बनाने की पूरी प्रक्रिया का व्यावहारिक और तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा। विशेषज्ञों की देखरेख में बंदियों को कचरों की छंटनी, खाद बनाने के सही तरीके और उसके रख-रखाव के गुर सिखाए जाएंगे। जेल अधिकारियों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से बंदियों में सकारात्मक बदलाव आएगा।
वर्षा जल संचयन और सौर ऊर्जा पर जोर
भूजल स्तर को सुधारने के लिए कारा परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाई जाएगी। इससे बारिश के जल का संचयन किया जा सकेगा। दूसरी तरफ, बिजली की खपत कम करने और पारंपरिक ऊर्जा पर निर्भरता घटाने के लिए जेल परिसर में सोलर पैनल लगाए जाएंगे।
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कारा परिसर में कचरे के सही प्रबंधन और जैविक खाद तैयार करने की पहल की है। इसके लिए बंदियो को प्रशिक्षण भी दिलाया जाएगा। साथ ही औषधि उद्यान भी विकसित किया जाना है।
आशीष रंजन, अधीक्षक, मंडल कारा।