शिलान्यास के बाद भी सड़क नहीं, झोपड़ी में चल रहा आंगनबाड़ी केंद्र; बांका का लेटवा गांव बेसिक सुविधाओं से महरूम
बांका जिले का लेटवा आदिवासी गांव आज भी सड़क, पेयजल और आंगनबाड़ी भवन जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। पूर्व विधायक द्वारा शिलान्यास के बावजूद सड़क न ...और पढ़ें

आदिवासी लेटवा गांव की कीचड़मय सड़क। जागरण

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संवाद सूत्र, जयपुर (बांका)। कटोरिया प्रखंड के कटियारी पंचायत का लेटवा आदिवासी गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बदहाल स्थिति में जीवन जीने को मजबूर है।
जिला के अधिकांश गांव जहां सड़क, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं से जुड़ चुके हैं, वहीं यह गांव विकास की मुख्यधारा से काफी पीछे छूट गया है। सूखे दिनों में भी गांव तक पहुंचना मुश्किल रहता है, जबकि बरसात में कच्ची सड़क दलदल में बदल जाती है।
इनारावरण चौक से रूपामरण चौक तक सड़क निर्माण की मांग वर्षों से की जा रही है। चुनाव पूर्व तत्कालीन विधायक निक्की हेंब्रम ने सड़क का शिलान्यास भी किया था, लेकिन निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका।
इसका असर इनारा वरण, मझनिया, मुरली केन, जोरली कुरूम, बालूकुरा, रक्तरोहना, बेलटीकरी, कोठीडिंडा, माथासार और कैथावरण सहित कई गांवों पर पड़ रहा है।
गांव में पेयजल संकट भी गहरा गया है। नल-जल योजना शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद बंद हो गई। पाइप टूटे पड़े हैं और पानी टंकी निष्क्रिय है। वहीं, आंगनबाड़ी भवन नहीं बनने से बच्चों की पढ़ाई झोपड़ी में कराई जा रही है। ग्रामीणों ने जल्द विकास कार्य शुरू कराने की मांग की है।
सबसे गहरा दुख तब होता है जब बरसात के दिनों में तालाब बन चुकी सड़क पर मोटरसाइकिल से जा रही महिलाएं गड्ढे में गिर कर चोटिल हो जाती है। प्रशासन को ध्यान देने की जरुरत है। -बड़का मुर्मू
जब से हो संभाला है इस गांव की सड़क की स्थिति जस की तस बनी है। सड़क के अभाव में इस गांव में पुलिस गाड़ी तक नहीं आती। -जयकांत यादव
आदिवासी के विकास के लिए भले ही बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत हमारा गांव की हालत देखकर खुद पता लगाया जा सकता है। प्रशासन जल्द समस्या का समाधान करें। -मोट हेंब्रम
इस गांव में पानी टंकी बने पांच साल से ऊपर हो गए, लेकिन एक दिन भी लोग पानी नहीं पी सका है। टंकी का पाइप के साथ-साथ सड़कों पर इंची भर नीचे बिछाई गई पाई बीच जगह-जगह फट चुकी है। -बबलू मुर्मू
शादी कर इस गांव में खाली पर पैदल ससुराल आई थी। गांव की सड़क गाड़ी चलने लायक नहीं है। गांव में कोई बीमार हो जाने पर कोई गाड़ी वाला गांव में आना नहीं चाहता है। -फुलमनी बेसरा
इतनी बड़ी आदिवासी गांव में गरीबों के दर्जन भर भी इंदिरा आवास नहीं बने हैं। सरकारी योजना कागजों पर आंकड़ों में दिखता है। -विनोद कुमार तांती
गांव में मात्र दो चापाकल है। नाली के अभाव में गंदा पानी सड़कों पर बह रहा है। गंदे पानी के कारण महामारी फैलने की संभावना से कोई देखने वाला नहीं है। -गुड्डू तांती
इस गांव में कई विधवाओं ना पेंशन मिला है ना आवास मिला है। भगवान भरोसे जिंदगी कट रही है। -बड़का हेंब्रम
तत्कालीन विधायक द्वारा सड़क का शिलान्यास भी किया गया था। इसी बीच निविदा रद हो जाने के कारण कार्य बाधित हो गया। रिटेंडर के बाद सड़क निर्माण कराया जाएगा। - मनोज कुमार, सहायक अभियंता आरईओ-2