श्रावणी मेला : बांका के 54 KM कांवरिया पथ पर उमड़ा यूथ; भक्ति संग फिटनेस का संगम, 24 घंटे में 48 हजार रवाना
बांका के 54 किमी कांवरिया पथ पर श्रावणी मेले में युवाओं की भारी भीड़ उमड़ रही है, जो भक्ति के साथ फिटनेस का भी संगम है। पिछले 24 घंटों में 48 हजार से ...और पढ़ें

दुम्मा बॉर्डर से 24 घंटे में 48 हजार से अधिक कांवरिये बाबाधाम रवाना; यात्रा में आधे से अधिक संख्या युवाओं की
HighLights
बांका के कांवरिया पथ पर युवा कांवरियों की भारी भीड़।
भक्ति के साथ फिटनेस का अनूठा संगम दिखा।
24 घंटे में 48 हजार से अधिक कांवरिये रवाना।
जागरण संवाददाता, बांका। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला अब अपने पूरे शबाब पर है। बांका जिले से गुजरने वाले 54 किलोमीटर लंबे कच्चे कांवरिया पथ पर सावन की दूसरी सोमवारी को लेकर चारों ओर भगवा परिधान, बोल-बम के जयघोष और शिवभक्ति की अनूठी छटा बिखरी हुई है। सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम से पवित्र गंगाजल लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम देवघर की ओर बढ़ते श्रद्धालुओं में सबसे अधिक संख्या युवा कांवरियों की देखी जा रही है।
बेलहर, कटोरिया और चांदन प्रखंड होकर गुजरी कांवरिया पथ में युवाओं के कंधों पर सजी आकर्षक कांवर, माथे पर भगवा पट्टी, एक जैसी शिव-थीम वाली टी-शर्ट और गले में रुद्राक्ष की माला आस्था के साथ-साथ अद्भुत ऊर्जा का संचार कर रही है।
युवाओं के लिए आस्था के साथ आत्मिक शांति और फिटनेस का माध्यम
कांवर यात्रा पर निकले युवाओं और श्रद्धालुओं ने अपने अनुभव साझा किए:
विकास अग्रवाल (धनबाद): पिछले 20 वर्षों से लगातार पैदल बाबाधाम जा रहे हैं। उनका मानना है कि यह यात्रा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मिक शांति का जरिया है।
महारानी (खगड़िया): यह उनकी चौथी यात्रा है। बाबा के दरबार तक पैदल पहुंचने से मन को असीम सुकून और जीवन में नई ऊर्जा मिलती है।
रवि व मासूम (बाराबंकी, UP): पहली बार कांवर यात्रा पर निकले इन युवाओं ने बाबा की महिमा सुनकर यात्रा शुरू की है और अब इसे हर वर्ष जारी रखने का संकल्प लिया है।
सुमा देवी (कोलकाता) व विजय कुमार (गिरिडीह): मनोकामना पूरी होने के बाद शुरू हुई यह यात्रा अब जीवनशैली का हिस्सा बन चुकी है। युवाओं का कहना है कि पैदल चलना आस्था के साथ-साथ शरीर को फिट रखने का भी सबसे श्रेष्ठ माध्यम है।
दुम्मा बॉर्डर पर पर्यटन विभाग की काउंटिंग मशीन के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 48 हजार से अधिक कांवरिये बाबानगरी के लिए रवाना हुए, जिनमें आधे से ज्यादा युवा हैं।
डॉक्टरी सलाह: पैदल चलने से मजबूत होते हैं दिल और फेफड़े
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के सचिव डॉ. शैलेंद्र कुमार ने कांवर यात्रा के स्वास्थ्य लाभ बताते हुए कहा कि:
"चार-पांच दिनों तक प्रतिदिन लंबी दूरी पैदल चलना हृदय (Heart), मांसपेशियों और फेफड़ों के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभदायक है। यात्रा के दौरान मिलने वाला सात्विक भोजन, पर्याप्त जल का सेवन और नशे से दूरी शरीर की इम्युनिटी (रोग प्रतिरोधक क्षमता) बढ़ाती है। यह यात्रा आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का भी सशक्त जरिया है।"