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    ईरान युद्ध की तपिश से बांका के बुनकर बेहाल, कच्चे माल के बढ़ते दामों ने तोड़ी कमर

    Updated: Mon, 30 Mar 2026 04:12 PM (IST)

    वैश्विक अस्थिरता और ईरान युद्ध के कारण बांका के डहुआ गांव के बुनकर गंभीर संकट में हैं। कच्चे माल, विशेषकर केमिकल रंगों और धागों की कीमतों में भारी वृद ...और पढ़ें

    बुनकरों की हालत खराब। (जागरण)

    बुनकरों की हालत खराब। (जागरण)

    HighLights

    1. ईरान युद्ध से कच्चे माल की कीमतों में भारी उछाल।

    2. केमिकल रंगों और धागों के दाम बढ़ने से उत्पादन लागत बढ़ी।

    3. सैकड़ों बुनकर परिवारों के रोजगार पर गहराया संकट, मांग मदद।

    संवाद सहयोगी, बौंसी (बांका)। वैश्विक अस्थिरता और ईरान युद्ध का सीधा असर अब जिले के प्रसिद्ध बुनकर बहुल गांव डहुआ के कुटीर उद्योगों पर दिखने लगा है।

    पहले से ही सरकारी अनुदान की कमी और बिजली-पानी जैसी समस्याओं से जूझ रहे बुनकरों के लिए अब इस युद्ध ने कोढ़ में खाज का काम किया है।

    कच्चे माल की कीमतों में आई भारी उछाल ने यहां के बुनकरी व्यवसाय को ठप होने के कगार पर पहुंचा दिया है। बुनकर संघ के सचिव मंसूर आलम ने स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि युद्ध के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसका सीधा असर स्थानीय बाजार पर पड़ा है।

    केमिकल रंगों की बढ़ी कीमत

    उन्होंने बताया कि केमिकल रंगों की कीमतों में प्रति किलो 30 रुपये से लेकर 100 रुपये तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, भेंट ग्रीन रंग 3200 रुपये किलो से बढ़कर 3900 रुपये किलो तक पहुंच गया है।

    रंगों के साथ-साथ कच्चे धागे के दाम भी तेजी से बढ़े हैं। जिससे चादर, गमछा,लुंगी और अन्य कपड़ों की उत्पादन लागत काफी बढ़ गई है।

    स्थानीय बुनकरों का कहना है कि वे पहले से ही सरकारी उदासीनता और सही बाजार न मिलने के कारण आर्थिक तंगी झेल रहे थे। अब कच्चे माल की महंगाई ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी है। लागत बढ़ने और मुनाफ़ा घटने की वजह से कई पावरलूम और हैंडलूम धीरे-धीरे बंद हो रहे हैं।

    रोजगार से दूर हो जाएंगे सैकड़ों परिवार

    बुनकरों ने मांग कि है कि अगर सरकार ने जल्द ही कोई ठोस कदम या विशेष पैकेज की घोषणा नहीं की तो इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े सैकड़ों परिवार रोजगार से दूर हो जाएंगे। डहुआ गांव की पहचान यहां की शानदार बुनाई से है। लेकिन मौजूदा हालात ने यहां के बुनकरों को निराश कर दिया है।

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    युद्ध के बहाने कच्चे माल की जमाखोरी और बढ़ती कीमतों ने बुनकरों के आर्थिक बजट को पूरी तरह बिगाड़ दिया है। बुनकर संघ ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि उन्हें रियायती दरों पर कच्चा माल उपलब्ध कराया जाए ताकि इस पुश्तैनी उद्योग को बचाया जा सके।