भारी वाहनों की आवाजाही से जेठौर पुल के पीलर झुकने लगे, विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद दबाव बढ़ा
भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद जेठौर पुल पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ गया है, जिससे इसके खंभे झुकने लगे हैं। अवैध बालू खनन भी पुल ...और पढ़ें

तीन हजार से अधिक वाहन रोज गुजरते जेठौर पुल से, किसी भी वक्त हो सकता है हादसा
HighLights
जेठौर पुल के खंभे भारी वाहनों से झुक रहे हैं।
विक्रमशिला सेतु क्षतिग्रस्त होने से जेठौर पर दबाव बढ़ा।
अवैध बालू खनन से पुल के खंभों को खतरा है।
संवाद सहयोगी, अमरपुर (बांका)। भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के क्षतिग्रस्त होने के बाद जेठौर पुल पर भारी वाहनों के दबाव से खतरा बढ़ गया है। पुल के पीलर संख्या सात और आठ सहित लगभग आधा दर्जन पीलर का फाइल कप बेड लेबल से लगभग पांच फीट ऊपर आने के कारण पुल टूटने की संभावना जताई जा रही है।
रविवार को पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार सिंह ने अन्य तकनीकी अधिकारियों के साथ पुल का निरीक्षण किया और वस्तुस्थिति का जायजा लिया। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुल के रखरखाव और सुरक्षा की दिशा में आवश्यक कार्य जल्द शुरू किया जाएगा।
भारी वाहनों की आवाजाही से जोखिम
ज्ञात हो कि विक्रमशिला सेतु टूटने के बाद कहलगांव, झारखंड के पाकुड़ और दक्षिण भारत से उत्तर बिहार तथा अन्य राज्यों की आवाजाही मुख्य रूप से जेठौर पुल के जरिए ही हो रही है। प्रतिदिन लगभग तीन हजार से अधिक ट्रक और भारी वाहन इस पुल से गुजर रहे हैं।
पुल के पीलर संख्या सात और आठ के बीच एकाएक भारी वाहनों के दबाव के कारण पुल का मध्य हिस्सा मादाचक की ओर झुकने लगा है। यह स्थिति स्थानीय लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है।
पूल के पीलर का फाइल कप क्यों ऊपर आया
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल के पीलर का फाइल कप नदी की सतह से ऊपर आने का मुख्य कारण नदी से अंधाधुंध बालू का अवैध खनन है। स्थानीय लोगों ने बताया कि मादाचक, पतवैय, रजौन के डुमरिया, चिलकावर और आसपास के गांवों में पिछले तीन-चार वर्षों से फाइल कप बेड से बाहर आ गया था।
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हालांकि दो वर्ष पूर्व पुल के फाइल कप की मरम्मत भी की गई थी, लेकिन पिछले एक पखवाड़े में भारी वाहनों के दबाव से पुल के बीच का हिस्सा झुकने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द से जल्द मरम्मत कार्य नहीं हुआ, तो पुल कभी भी जमींदोज हो सकता है।
एप्रोच पथ में खतरनाक गड्ढे
पुल के दोनों ओर के एप्रोच पथ में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे वाहन चालकों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। ट्रक और अन्य भारी वाहन धीमी गति से ही पुल पार कर पा रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय व्यापारियों ने बताया कि यदि पुल बंद हुआ, तो क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों पर भी बड़ा असर पड़ेगा।
स्थानीय प्रशासन की भूमिका
पथ निर्माण विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान बताया कि पुल की सुरक्षा और मरम्मत के लिए विशेष टीम बनाई जा रही है। उन्होंने कहा कि पुल पर नियमित निगरानी रखी जाएगी और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से अपील की है कि पुल की मरम्मत जल्द से जल्द की जाए, ताकि आने वाले दिनों में किसी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पुल टूटता है, तो क्षेत्र में परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप्प हो जाएगी।
सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
विशेषज्ञों ने चेताया है कि जेठौर पुल पर भारी वाहनों की आवाजाही को तत्काल नियंत्रित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पुल की सुरक्षा के लिए अस्थायी बैरियर और वजन सीमा लागू करना जरूरी है। इसके अलावा नदी किनारे बालू के अवैध खनन पर कड़ी नजर रखने की भी आवश्यकता है।
अभी तक प्रशासन ने पुल पर आने-जाने वाले वाहनों के लिए सावधानीपूर्वक निर्देश जारी किए हैं। अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि पुल पर नियमित निरीक्षण जारी रहेगा और जरूरी मरम्मत कार्य शीघ्र शुरू किए जाएंगे।
जेठौर पुल के पीलर का फाइल कप बेड से उपर हो गया है। जिससे खासकर नदी में पानी के बहाव से पुल पर खतरा होगा। ऐसे में तत्काल पत्थर के बोल्डर से पीलर के फाइल कप को सुरक्षित किया जायेगा।
संजीव कुमार सिंह,कार्यपालक अभियंता पीडब्ल्यूडी, बांका