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    कांवड़िया पथ पर सिक्का बदलने का अनोखा रोजगार, बांका में नोट के बदले सिक्के देकर हो रही दोगुनी कमाई

    Updated: Thu, 23 Jul 2026 08:30 AM (IST)

    डिजिटल लेनदेन के बावजूद, बांका में कांवड़िया पथ पर दान के लिए सिक्कों की भारी मांग है। इससे सिक्का बदलने का एक अनोखा और लाभदायक व्यवसाय पनपा है, जो कई ...और पढ़ें

    नोट के बदले सिक्के देकर हो रही दोगुनी कमाई

    नोट के बदले सिक्के देकर हो रही दोगुनी कमाई

    HighLights

    1. कांवड़िया पथ पर दान के लिए सिक्कों की मांग।

    2. सिक्का बदलने का अनोखा व्यवसाय युवाओं को रोजगार दे रहा।

    3. डिजिटल युग में भी सिक्कों से हो रही दोगुनी कमाई।

    जागरण संवाददाता, बांका। डिजिटल लेनदेन के बढ़े चलन ने बाजार में सिक्कों की खनक कमजोर कर दी है। लोग चाय-पान से लेकर सब्जी वालों को भी अब ऑनलाइन पेमेंट से खाने पीने लगे हैं। इसके भारी होने के कारण इसे दो-चार से अधिक लेने में भी परहेज करने लगे हैं। मगर सावन का मेला शुरू होने से पहले ही कांवड़िया पथ पर खोटे सिक्के की खनक गूंजने लगी है। 

    अजगैवीनाथ धाम से बाबाधाम तक करीब करीब सौ किलोमीटर लंबे कच्चे कांवर पथ पर अब सिक्के की खनक गूंजती भी रहेगी। इस पथ पर अब भी परंपरा से सिक्कों की मांग बनी हुई है। हालत यह कि ये सिक्के मेला में हर दिन दर्जनों-दर्जन युवाओं का रोजगार बन रहा है। 

    सिक्का दान करते हैं कांवड़िए

    दरअसल, पैदल कांवड़ यात्रा पर बाबाधाम जाने वाले कांवड़िया परंपरा से पथ पर बैठे भिखारियों, अपंग, दिव्यांगों को सिक्का दान करते रहते हैं। इतना ही नहीं पथ पर अभी कदम-कदम पर देव-देवाताओं की प्रतिमा, कीर्तन-भजन, सपेरा, बसहा बैल वाले कांवड़िया से मांगने के लिए बैठे रहते हैं। 

    कांवडिया इन पर एक-दो रुपये से लेकर पांच से 10 रुपये तक डालते आगे बढ़ते हैं। इस कारण अजगवीनाथ धाम से यात्रा शुरु करते ही कांवड़ियों को जगह-जगह दान में देने के लिए सिक्के की जरूरत होती है। अमनून वे हर दिन की पैदल यात्रा शुरू करने से पहले सौ-दो सौ रुपये का सिक्का अपने पास रख लेते हैं।

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    अब देखिए सिक्के का खेल

    बाजार का सामान्य ग्राहक आमतौर पर सिक्का लेने से बचता है। नजीता,दुकानदार इन सिक्कों को हर दिन सौ के बदले 110 रुपये तक का सिक्का देकर निपटाते हैं। लेकिन, कांवड़िया पथ पर सिक्का दोहरी कमाई करता है। 

    नोट की बोली सिक्कों के सामने कमजोर पड़ जाती है। कोई कांवड़िया सौ रुपये का नोट देकर अधिकतम 90 से 95 रुपये का ही सिक्का ले पाता है। पथ किनारे खुले सिक्के की दुकानों से वे इसे प्राप्त करते हैं। 

    सौ रुपये में 10 से 20 रुपये तक की कमाई 

    फिर यही सिक्का कांवड़िया के माध्यम से हर शाम को भिखारी, सपेरा, देवता का चढ़ावा बन जाता है। जिसे भिखारी, मंदिर के पुजारी, सपेरा आदि सिक्के बदलने वाली दुकानों में जाकर 110 का सिक्का देकर सौ रुपये का नोट प्राप्त करते हैं। यानी सिक्का दुकानदार सिक्का देने और लेने दोनों के नाम पर सौ रुपये में 10 से 20 रुपये तक की कमाई कर लेता है। यह आमदनी सिक्का बदलने का दुकान चलाने वालों की जीविका बनता है। 

    सुग्गासार के पास मिले ग्रामीण शंकर लैया, मुरारी आदि बताते हैं कि कांवड़ पथ पर दिन भर कुछ युवा एक टेबल लगाकर इस तरह का दुकान चलाते मिल जाते हैं।

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