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    कटोरिया में कांवड़िया पथ पर सजने लगीं दुकानें, सैकड़ों परिवारों को मिलेगा एक महीने का रोजगार

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 03:52 PM (IST)

    श्रावणी मेला शुरू होते ही कटोरिया के कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल के साथ स्थानीय आर्थिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। यह मेला सैकड़ों परिवारों क ...और पढ़ें

    कांवड़िया पथ पर सजने लगीं दुकानें ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    कांवड़िया पथ पर सजने लगीं दुकानें ( एआई जेनरेटेड तस्वीर )

    संवाद सूत्र, कटोरिया (बांका)। श्रावणी मेला शुरू होते ही कांवड़िया पथ पर श्रद्धालुओं की चहल-पहल के साथ-साथ आस-पास के गांवों की आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो जाती है। वर्षभर सीमित रोजगार के अवसरों से जूझने वाले ग्रामीणों के लिए श्रावणी मेला अतिरिक्त आय का बड़ा माध्यम बनकर आता है। 

    मेला अवधि के लगभग एक माह तक सैकड़ों परिवार रोजगार से जुड़ जाते हैं। कांवरिया पथ के किनारे अस्थायी दुकानों की कतारें सजने लगी हैं। 

    स्थानीय लोगों को एक महीने तक मिलता है रोजगार

    स्थानीय लोग पूजन सामग्री, बेलपत्र, फूल-माला, अगरबत्ती, प्रसाद, फल, शीतल पेय, चाय-नाश्ता, भोजन, वर्षाती, गमछा, चप्पल, टार्च, कांवर सजाने की सामग्री तथा अन्य जरूरत के सामान की दुकाने लगा रहे है। जैसे-जैसे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती है। 

    इन दुकानों पर ग्राहकों की भीड़ उमड़ने लगती है। मेला के दौरान स्थानीय युवाओं को होटल, ढाबा, भोजनालय, धर्मशाला, सेवा शिविर, पार्किंग स्थल और अस्थायी दुकानों में काम मिल जाता है। कई लोग माल ढुलाई, पानी पहुंचाने, साफ-सफाई और अन्य सेवाओं के माध्यम से भी आमदनी करते हैं। 

    बढ़ती भीड़ को देखते हुए बाजारों में भी रौनक लौट जाती है

    वहीं ग्रामीण महिलाएं भी घर में तैयार किए गए खाद्य पदार्थ, पकवान और अन्य उपयोगी सामग्री बेचकर परिवार की आय बढ़ाने में योगदान देती हैं। व्यापारियों का कहना है कि श्रावणी मेला की कमाई पूरे वर्ष के कारोबार में महत्वपूर्ण स्थान रखती है।

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    मेला शुरू होने से पहले ही दुकानदार आवश्यक सामान का भंडारण कर लेते है। ताकि श्रद्धालुओं की मांग पूरी की जा सके। कांवरिया पथ पर लगातार बढ़ती भीड़ को देखते हुए बाजारों में भी रौनक लौट आती है। 

    श्रावणी मेला का बेसब्री से इंतजार करते हैं लोग

    ग्रामीणों का कहना है कि श्रावणी मेला उनके लिए केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आर्थिक संबल भी है। एक माह तक होने वाली अच्छी आमदनी से परिवारों को घरेलू खर्च चलाने, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरी आवश्यकताओं को पूरा करने में मदद मिलती है। यही वजह है कि हर वर्ष स्थानीय लोग श्रावणी मेला का बेसब्री से इंतजार करते हैं। 

    श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए प्रशासन भी कांवरिया पथ पर पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा, सुरक्षा और साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि इस वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने से उनका कारोबार भी बेहतर होगा और पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आमदनी होगी।

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