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    बिहार में भी लगेगा महाकुंभ, पापहरणी सरोवर बना मोक्ष का द्वार, प्रत्येक 12 वर्ष में आइए

    Updated: Tue, 13 Jan 2026 10:09 PM (IST)

    मंदार महोत्सव : मंदार पर्वत स्थित पापहरणी सरोवर अब हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन करेगा, जिसे अखिल भारतीय सनातन समाज ने आदिवासी बलिदानियों के मोक्ष का ...और पढ़ें

    मंदार महोत्सव : बिहार के बांका जिला अंतर्गत बौंसी पापहरणी में लगेगा महाकुंभ

    मंदार महोत्सव : बिहार के बांका जिला अंतर्गत बौंसी पापहरणी में लगेगा महाकुंभ

    HighLights

    1. पापहरणी सरोवर अब हर 12 साल में महाकुंभ का आयोजन करेगा।

    2. आदिवासी बलिदानियों व पूर्वजों के मोक्ष का नया द्वार बना।

    3. रानी कोण देवी ने सातवीं शताब्दी में सरोवर की खोदाई कराई थी।

    बिजेन्द्र कुमार राजबंधु, बांका। मंदार महोत्सव : ऐतिहासिक व धार्मिक मंदार पर्वत स्थित पापहरणी सरोवर आदिवासी समाज के मोक्ष का द्वार बन गया है। अब हर 12 वर्षो के बाद यहां महाकुंभ लगेगा। अखिल भारतीय सनातन समाज ने आदिवासी वीर बलिदानियों व पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पापहरणी सरोवर को ही मोक्ष का द्वार बनाया है। कहा जाता है कि इस सरोवर का इतिहास सातवीं शताब्दी से जुड़ा हुआ है। प्राचीन काल में यह सरोवर मनोहर कुंड के नाम से जाना जाता था। लोक कथाओं के अनुसार मगध के राजा आदित्य सेन अपनी पत्नी रानी कोण देवी के साथ यहां स्नान के लिए आए थे। उस समय राजा चर्मरोग से पीड़ित थे, लेकिन कुंड में स्नान के बाद वे रोगमुक्त हो गए। इस चमत्कारी अनुभव से प्रभावित होकर रानी कोण देवी ने मकर संक्राति पर ही जनकल्याण और धार्मिक आस्था के उद्देश्य से कुंड की खोदाई कराई और इसका नाम पापहरणी सरोवर रखा।

    मकर संक्राति पर स्थापना आज दिवस दिवस मनाएगा पापहरणी सरोवर


    मान्यता है कि इस सरोवर में स्नान करने से पापों का नाश होता है। खास बात यह है कि मकर संक्रांति को पापहरणी सरोवर का स्थापना दिवस माना जाता है। वर्ष 1934 में मकर संक्रांति के दिन ही चंदर दास द्वारा यहां सफा धर्म की स्थापना की गई थी। इस कारण आदिवासी समाज इसे अपना इष्टदेव भी मानते हैं। हर साल बिहार,झारखंड, नेपाल, उड़ीसा सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आदिवासी समाज लोग यहां आकर मंदार में कठिन तपस्या करते हैं। साथ ही प्रभु राम व भगवान शिव के साथ ही ईष्टदेव मरांग की पूजा करते हैं। विभिन्न प्रांतों से पहुंचे आदिवासियों की भीड़ देखकर ऐसा लगता है कि यहां भक्ति की दरिया बहती है।

    • मगध के राजा आदित्य सेन की पत्नी रानी कोण देवी ने कराया था पापहरणी सरोवर की खोदाई
    • दामोदर नदी तट पर पहले होता आदिवासियों के पूर्वजों का मोक्ष कार्यक्रम
    • नेपाल ,उड़ीसा ,बिहार, झारखंड सहित विभिन्न राज्यों से पहुंचते है आदिवासी समाज

     

    यूपी के प्रयागराज की तर्ज पर अब यहां भी प्रत्येक 12 वर्षो के अंतराल पर महाकुंभ आयोजित किया जाएगा। अखिल भारतीय सनातन समाज ने इसका इस बार आयोजन किया है। धर्म जागरण समन्वय के जिला पूर्णकालिक प्रमुख जीव लाल कुमार ने बताया कि संताल समाज के पूर्वजों और बलिदानियों का पिंडदान अब स्थायी रूप से मंदार स्थित पापहरणी सरोवर में किया जाएगा। इससे पूर्व यह पिंडदान झारखंड राज्य के दामोदर नदी में किया जाता था, लेकिन अब यह परंपरा हमेशा के लिए पापहरणी सरोवर से जुड़ गई है। मंगलवार को स्नान के बाद मोक्ष का कार्यक्रम हुआ। इसमें हजारों के लिए मोक्ष का आयोजन हुआ। इसके अलावा आदिवासियों का पवित्र पर्व सोहराय (वंदना) भी इसी अंतराल में 11 जनवरी से 15 जनवरी तक मनाया जाता है। इस कारण मंदार से आदिवासियों का आस्था अटूट हो गया है।

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