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    बांका लाह की खेती से संवरेगा आदिवासी किसानों का भविष्य, प्रति एकड़ 2.5 लाख रुपये तक होगी आय

    Updated: Mon, 29 Jun 2026 10:05 PM (IST)

    बांका के डुमरिया गांव में नाबार्ड और मुक्ति निकेतन ने लाह आधारित वाड़ी परियोजना शुरू की है। इसका लक्ष्य वैज्ञानिक लाह उत्पादन और मूल्य संवर्धन से किसा ...और पढ़ें

    मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह। फोटो जागरण

    मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह। फोटो जागरण

    HighLights

    1. नाबार्ड ने बांका में लाह आधारित वाड़ी परियोजना शुरू की।

    2. परियोजना से 500 आदिवासी परिवारों की आय बढ़ेगी।

    3. प्रति एकड़ 2-2.5 लाख रुपये आय बढ़ाने का लक्ष्य।

    संवाद सूत्र, बांका। नाबार्ड के सहयोग से मुक्ति निकेतन द्वारा संचालित लाह आधारित वाड़ी परियोजना का शुभारंभ सोमवार को चांदन प्रखंड के डुमरिया गांव में हुआ। नाबार्ड बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने पौधारोपण कर कार्यक्रम का आगाज किया।

    इसके पहले स्थानीय आदिवासी समुदाय ने पारंपरिक गीत-नृत्य से अतिथियों का स्वागत किया। प्रतिभा भास्कर विद्यालय के बच्चों ने कृषि आधारित लोकगीत प्रस्तुत किया।

    अपने संबोधन में मुख्य महाप्रबंधक गौतम कुमार सिंह ने कहा कि नाबार्ड किसानों, विशेषकर आदिवासी किसानों के समग्र विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहा है।

    उन्होंने बताया कि बिहार की पहली 5 वर्षीय समग्र लाह आधारित वाड़ी परियोजना के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से लाह उत्पादन और मूल्य संवर्धन कर किसानों की आय प्रति एकड़ 2 से ढाई लाख रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य है। उन्होंने किसानों से इस योजना का अधिकतम लाभ उठाने की अपील की।

    आदिवासी परिवारों को मिलेगा रोजगार

    परियोजना के तहत चांदन एवं फुल्लीडुमर प्रखंड के 500 आदिवासी परिवार लाभान्वित होंगे। इनमें 450 परिवारों को एक-एक एकड़ भूमि पर सेमियालाटा एवं कुसुम के पौधों के माध्यम से लाह उत्पादन के लिए तकनीकी मार्गदर्शन, पौधरोपण एवं अन्य सहयोग मिलेगा।

    साथ ही आम और कैलिएंड्रा के पौधों का रोपण, जल एवं मृदा संरक्षण, लाह उत्पादन प्रशिक्षण, महिला सशक्तिकरण, स्वास्थ्य जागरूकता, लाह प्रसंस्करण केंद्र, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) तथा अंतरवर्ती खेती को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

    कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अभिषेक आलोक, नाबार्ड, बिहार क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारी परमेश कुमार, मुक्ति निकेतन के सचिव चिरंजीव सिंह, सामुदायिक प्रतिनिधि बाल किशोर सोरेन एवं जोगेश्वर मरांडी, बिहार ग्रामीण बैंक और भागलपुर जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रतिनिधि, विभिन्न स्वयंसेवी संस्थाओं के प्रतिनिधि तथा 100 से अधिक महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन सौरभ अश्क ने किया।

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    दौरे के दौरान गौतम कुमार सिंह ने मंदर एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन और थ्रेड्स आफ बांका का भी निरीक्षण कर ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों की सराहना की।

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