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    श्रावणी मेला में 25 दिन बाकी, कांवड़िया पथ की तैयारी अब भी अधूरी; गड्ढों के भरोसे कैसे तय होगा बाबाधाम का सफर?

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 08:29 AM (GMT+05:30)

    श्रावणी मेला शुरू होने में 25 दिन शेष हैं, लेकिन बांका में कांवड़िया पथ की तैयारियां अब भी अधूरी हैं। रास्ते में गड्ढे, कीचड़ और नल-जल योजना की खराबी ...और पढ़ें

    कांवड़िया पथ की तैयारियां अब भी अधूरी

     कांवड़िया पथ की तैयारियां अब भी अधूरी

    HighLights

    1. श्रावणी मेला शुरू होने में केवल 25 दिन बाकी।

    2. कांवरिया पथ पर गड्ढे, कीचड़ और जलजमाव की समस्या।

    3. अधूरी तैयारियों से श्रद्धालुओं को भारी परेशानी की आशंका।

    संवाद सूत्र, बेलहर (बांका)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने में अब महज 25 दिन शेष रह गए हैं। 30 जुलाई से मेले का शुभारंभ जिला सीमा स्थित धौरी यात्री प्रवेश द्वार से होगा। उद्घाटन समारोह में प्रभारी मंत्री के साथ मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पहुंचने की चर्चा है।

    हालांकि प्रशासन की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पूर्व डीएम नवदीप शुक्ला के दौरे के दौरान धौरी में हेलीपैड के लिए स्थल चयन की प्रक्रिया शुरू होने से इस चर्चा को बल मिला है।

    नए डीएम अंशुल अग्रवाल और एसपी अमितेश कुमार के पदभार ग्रहण करने के बाद अब तक कांवरिया पथ का कोई संयुक्त निरीक्षण नहीं हुआ है। हालांकि कुछ विभागों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। विद्युत विभाग ट्रांसफार्मर, पोल और बिजली तार लगाने में जुटा है, जबकि पीएचईडी ने भी कार्य शुरू किया है। बावजूद इसके कई कार्य केवल खानापूर्ति तक सीमित होने की चर्चा है।

    धौरी से जिलेबिया मोड़ तक कच्ची कांवरिया पथ पर कई स्थानों पर बड़े गड्ढे बन गए हैं। जोरीपार, मधुकरपुर, शिवलोक, तिलवरिया, चंदननगर और कौआदह में बारिश के बाद कीचड़ और जलजमाव से श्रद्धालुओं को परेशानी होने की आशंका है। कुराबा नहर, मधुकरपुर और दसपसैया के पास कंकड़ बिखरे होने से भी आवागमन प्रभावित हो सकता है। पिछले वर्ष भी बड़ी संख्या में कांवरिये फिसलकर घायल हुए थे।

    शिवलोक से तिलवरिया तक नल-जल योजना के नल बेकार पड़े हैं। स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा शिविरों के लिए स्थल चयन शुरू कर दिया है। संवेदक ने शिवलोक सहित अन्य स्थानों पर गंगा की महीन बालू का भंडारण कर लिया है, लेकिन समय रहते पथ का समतलीकरण, झाड़ियों की सफाई और बालू बिछाने का कार्य पूरा नहीं हुआ तो मेले के दौरान श्रद्धालुओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

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