Tomato prices : बांका का जयपुर है टमाटर उत्पादन का हब, व्यापारी कम दाम में यहां से खरीदते हैं, महंगे में बेचते हैं
बांका के जयपुर क्षेत्र में टमाटर किसान 'एक जिला-एक उत्पाद' योजना में शामिल होने के बावजूद नुकसान झेल रहे हैं। तकनीकी मार्गदर्शन, बेहतर बीज और सरकारी स ...और पढ़ें

Tomato prices : बांका के जयपुर में होता है टमाटर का उत्पादन
HighLights
जयपुर के टमाटर किसान ओडीओपी योजना के बावजूद नुकसान में।
तकनीकी मार्गदर्शन और सरकारी सहयोग की कमी से फसल खराब।
कमजोर बीज और मौसम की अनिश्चितता से आधे पौधे नष्ट।
संवाद सूत्र, जयपुर (बांका)। Tomato prices : एक जिला–एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना में शामिल होने के बावजूद जयपुर क्षेत्र में टमाटर की खेती करने वाले किसानों को राहत नहीं मिल पा रही है। बिना तकनीकी मार्गदर्शन और समुचित सरकारी सहयोग के बड़े पैमाने पर की जा रही टमाटर की खेती इस बार किसानों के लिए भारी नुकसान का सौदा साबित हुआ।
बांका के जयपुर क्षेत्र में करीब 200 एकड़ से अधिक जमीन पर किसान अपने संसाधनों से टमाटर की खेती करते आ रहे हैं। और यहां के किसानों ने अपने दम पर जिले में जयपुर को टमाटर उत्पादन का हब बना दिया है।
मगर इस वर्ष मौसम की अनिश्चितता और बीज की गुणवत्ता कमजोर रहने के कारण आधे से अधिक टमाटर के पौधे नष्ट हो गए। जो पौधे बचे, उनमें फल तो आए, लेकिन अधिकांश टमाटर दागदार निकलने से बाजार में उचित कीमत नहीं मिल सकी। जबकि अच्छे टमाटर होलसेल रेट में 25 से 30 रुपए किलो बिक रहे हैं। जबकि खुले बाजार में टमाटर का भाव 40 रुपया प्रति किलो है।
जयपुर क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु टमाटर उत्पादन के लिए अनुकूल मानी जाती है। यहां के उप जे टमाटर बिहार के अलावा झारखंड व बंगाल के कई जिलों में भेजी जाती रही है।
झारखंड के दुमका जिला अंतर्गत मोरने गांव निवासी पिंटू यादव ने जयपुर के कधार में लगभग 40 बीघा जमीन लीज पर लेकर टमाटर की खेती की। उन्होंने बताया कि खेती में नौ लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं, जबकि टमाटर 25 से 30 रुपये प्रति किलो की दर से बिकने के बावजूद अब तक मात्र पांच लाख रुपये की आमदनी हो सकी है। 15 अगस्त से मजदूरों के साथ लगातार खेत में मेहनत करने के बाद भी अभी एक माह तक फसल तुड़ाई का कार्य शेष है।
स्थानीय किसान सुभाष कुमार ने कहा कि ओडीओपी योजना में शामिल किए जाने के बाद भी न तो उनके क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज, न फूड प्रोसेसिंग यूनिट, न ही बेहतर बीज और प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराई गई। किसानों का मानना है कि यदि विशेषज्ञों की सलाह, रोग नियंत्रण की व्यवस्था और बाजार सुविधा मिलती, तो निश्चित तौर पर टमाटर खेती किसानों की दूसरी बड़ी आमदनी बन सकती थी।