सहयोग पोर्टल की शिकायत से खुला घोटाले का राज; बेगूसराय की करोड़ों की राइस मिल 6 साल से बंद
छौड़ाही के शाहपुर पैक्स में करोड़ों की लागत से बनी राइस मिल छह साल से बंद पड़ी है, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। सहयोग पोर्टल पर शिकायत के ब ...और पढ़ें

बेगूसराय के छौड़ाही स्थित राइस मिल।
HighLights
शाहपुर राइस मिल छह साल से बंद, करोड़ों का नुकसान।
सहयोग पोर्टल पर शिकायत से अनियमितताएं उजागर हुईं।
शिकायतकर्ता ने दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की।
बलबंत चौधरी, छौड़ाही (बेगूसराय)। बिहार सरकार का सहयोग पोर्टल आम लोगों की शिकायतों के त्वरित समाधान का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है।
इसी पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बाद छौड़ाही प्रखंड के शाहपुर पैक्स परिसर में करोड़ों रुपये की लागत से स्थापित राइस मिल परियोजना में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है।
किसानों के धान का स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण करने के उद्देश्य से करीब छह वर्ष पहले स्थापित यह राइस मिल आज तक शुरू नहीं हो सकी है। स्थिति यह है कि यहां से अब तक एक दाना चावल का भी उत्पादन नहीं हुआ है।
सहयोग पोर्टल पर दोबारा आवेदन देकर एफआईआर की मांग
संयुक्त जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद शिकायतकर्ता पवन कुमार महतो ने सहयोग पोर्टल पर दोबारा आवेदन देकर तत्कालीन अधिकारियों एवं अन्य जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में कहा है कि जिला सहकारिता पदाधिकारी भुवनेश्वर झा की ओर से प्रस्तुत संयुक्त जांच रिपोर्ट में राइस मिल के निर्माण, मशीनरी की खरीद, भुगतान प्रक्रिया और संचालन से संबंधित कई गंभीर अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है।
इसके बावजूद अब तक किसी भी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये की सरकारी परियोजना छह वर्षों से बंद पड़ी है।
इससे क्षेत्र के किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि राइस मिल के निर्माण, मशीनों की खरीद, इंस्टॉलेशन और अन्य कार्यों का भुगतान नियमों की अनदेखी कर किया गया।
साथ ही वर्तमान पैक्स अध्यक्ष पर भी नियमों के विपरीत हस्ताक्षर कर भुगतान कराने का आरोप लगाया गया है।शिकायतकर्ता ने जांच में जिम्मेदारों पर आपराधिक मामला दर्ज कर विधिसम्मत कार्रवाई की मांग की है।
जंग खा रही मशीनें, किसान निराश
इधर, शाहपुर पैक्स की राइस मिल आज भी पूरी तरह बंद पड़ी है। भवन पर ताले लटके हैं, मशीनें निष्क्रिय हैं और करोड़ों रुपये की यह परियोजना धीरे-धीरे जर्जर होती जा रही है।
किसानों का कहना है कि यदि समय पर राइस मिल चालू हो जाती तो उन्हें धान की प्रोसेसिंग के लिए निजी मिलों या दूसरे जिलों का रुख नहीं करना पड़ता। इससे किसानों को सुविधा मिलने के साथ-साथ पैक्स की आय भी बढ़ती।
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अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग संयुक्त जांच रिपोर्ट और नई शिकायत के आधार पर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई करता है या फिर करोड़ों रुपये की यह परियोजना फाइलों तक ही सीमित रह जाएगी।
जांच रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष
- छह वर्ष बीतने के बाद भी राइस मिल से एक दाना चावल का उत्पादन नहीं हुआ।
- निर्माण एवं मशीनरी का भुगतान पूरा होने के बावजूद मिल का संचालन शुरू नहीं कराया गया।
- बिजली आपूर्ति के लिए आवश्यक ट्रांसफार्मर नहीं लगाया गया।
- मिल परिसर का फर्श धंसा हुआ मिला तथा पक्कीकरण अधूरा पाया गया।
- छत की एस्बेस्टस शीट क्षतिग्रस्त मिलने से मशीनों के खराब होने की आशंका जताई गई।
- निर्माण एवं भुगतान प्रक्रिया में गंभीर प्रक्रियागत अनियमितताएं पाई गईं।
- मशीनों की सुरक्षा और भवन की मरम्मत के लिए तत्काल कार्रवाई की अनुशंसा की गई।
- तत्कालीन जिला सहकारिता पदाधिकारी समेत संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए आगे की कार्रवाई की सिफारिश की गई।