बैलगाड़ी पर दूल्हा, घोड़ों की अगुवाई; बेगूसराय से समस्तीपुर तक सभी रह गए हैरान, विधायक भी बने बराती
बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड में प्रिंस यादव की शादी एक अनोखी पारंपरिक बारात के साथ संपन्न हुई। आधुनिक वाहनों की जगह 11 घोड़े, लगभग 20 बैलगाड़ियां और रि ...और पढ़ें

बैलगाड़ी पर निकली बरात और भाड़ ले जाते लोग।
HighLights
आधुनिक वाहनों की जगह बैलगाड़ी, घोड़े, रिक्शे शामिल।
विधायक अभिषेक आनंद भी बैलगाड़ी पर सवार होकर पहुंचे।
सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा उदाहरण।
संवाद सहयोगी, छौड़ाही (बेगूसराय)।इस दौर में जहां शादियां पूरी तरह हाईटेक होती जा रही हैं, वहीं बेगूसराय के छौड़ाही प्रखंड के पुरपथार गांव से निकली एक बारात ने लोगों को वर्षों पुरानी परंपराओं की याद दिला दी।
यह अनोखी बारात समस्तीपुर जिले के ऐतिहासिक मंगालगढ़ गांव तक पहुंची और पूरे इलाके में चर्चा का विषय बन गई।
पुरपथार निवासी चंद्रकांत यादव उर्फ चंदू बाबा के पुत्र प्रिंस यादव की शादी मेघा प्रिया (पुत्री सूर्यकांत यादव व कविता देवी) के साथ पूरे पारंपरिक अंदाज में संपन्न हुई।
इस बारात की खासियत यह रही कि इसमें आधुनिक गाड़ियों की जगह 11 घोड़े, करीब 20 बैलगाड़ियां और रिक्शों का लंबा काफिला शामिल था, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

(बैलगाड़ी पर दूल्हे के साथ बैठे विधायक।)
जैसे ही बारात गांव से निकली, रास्ते में जगह-जगह लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग इस अनोखे दृश्य को देखने के लिए उत्साहित दिखे।
कई लोगों ने इस पारंपरिक बारात को अपने मोबाइल में कैद कर सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे यह तेजी से वायरल हो गया। लोगों का कहना था कि 35-40 साल पहले ऐसी ही बारातें निकलती थीं, लेकिन अब यह दृश्य बहुत दुर्लभ हो गया है।
बैलगाड़ी से निकले विधायक
समारोह में क्षेत्रीय विधायक अभिषेक आनंद भी शामिल हुए। उन्होंने बैलगाड़ी पर सवार होकर बारात में हिस्सा लिया और परंपरा के इस अनूठे उदाहरण की सराहना की।
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से भी बेहद प्रासंगिक हैं।
बारात में शामिल सचिन, अमिताभ बच्चन पटेल, शाकिब, सुमित, राणा, प्रदीप और राजीव ने बताया कि उन्होंने अब तक केवल सुना था कि पहले बैलगाड़ियों से बारात जाया करती थी, लेकिन इस बार उन्होंने इसे नजदीक से देखा और अनुभव किया।
यह बारात सिर्फ एक शादी समारोह नहीं रही, बल्कि अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और सादगी का जीवंत उदाहरण बनकर लोगों के दिलों में खास जगह बना गई।