यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 05, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
बिहार के नंबर-1 अस्पताल में सफाईकर्मी करते हैं शवों की चीर-फाड़, तेजस्वी के विभाग का सच कर देगा हैरान
दैनिक जागरण के पोस्टमॉर्टम का पोस्टमॉर्टम पड़ताल के तहत बिहार के सरकारी अस्पतालों की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था की पड़ताल की गई है। इस पड़ताल ने बिहार के अ ...और पढ़ें

HighLights
- बिहार के नंबर वन अस्पताल में पोस्टमार्टम व्यवस्था को 'फारेंसिक जांच' की जरूरत।
- बेगूसराय में पोस्टमार्टम के लिए नहीं हैं विशेषज्ञ चिकित्सक।
- सफाई कर्मी करते हैं चीर-फाड़, शव को हाथ नहीं लगाते चिकित्सक।
बिहार में जागरण की पड़ताल 'पोस्टमॉर्टम का पोस्टमॉर्टम' में अधिकांश अस्पताल ऐसे मिले, जहां पोस्टमॉर्टम के मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। कई अस्पतालों में तो मृतक के परिजनों से पोस्टमॉर्टम करने के लिए जरूरी सामान मंगाया जाता है।
एक अस्पताल में तो बिजली चली जाने पर मोबाइल की टॉर्च के उजाले में पोस्टमॉर्टम किया जाता है। पड़ताल में ऐसे कई अस्पताल मिले, जहां पोस्टमॉर्टम के लिए परिजनों को अच्छी-खासी रकम घूस के रूप में चुकानी पड़ती है।
नंबर वन अस्पताल का ये है हाल
बिहार के नंबर वन सरकारी अस्पताल का तमगा पाने वाले बेगूसराय सदर अस्पताल में तो पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को ही पोस्टमॉर्टम की जरूरत है। यहां विशेषज्ञ चिकित्सक का पदस्थापन नहीं है। सफाईकर्मी ही शव का चीर फाड़ करते हैं। आपातकालीन सेवा में नियुक्त चिकित्सक पोस्टमॉर्टम के दौरान शव को हाथ तक नहीं लगाते हैं।
मौत के कारणों की गहन जांच व अंदरूनी अंगों की पड़ताल भी सफाईकर्मियों के सहारे किया जाता है।
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