बिहार के अस्पताल में फ्रैक्चर पैर पर प्लास्टर की जगह बांध दिया कागज का गत्ता, वायरल हुआ वीडियो
अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल का एक वीडियो वायरल हुआ है जिसमें सड़क दुर्घटना में घायल युवक के टूटे पैर को कार्टून/गत्ता से बांधकर रेफर किया गया। ...और पढ़ें
HighLights
टूटे पैर को कार्टन से बांधकर रेफर करने का वीडियो वायरल।
अस्पताल ने इसे चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के तहत प्राथमिक उपचार बताया।
संसाधनों की कमी के बावजूद मरीजों को सुरक्षित उपचार का प्रयास।
संवाद सूत्र, मंझौल (बेगूसराय)। अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित होने के बाद प्राथमिक उपचार की व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
वीडियो में सड़क दुर्घटना में घायल युवक के टूटे पैर को कार्टून/गत्ता के सहारे बांधकर बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर करते हुए दिखाया गया है।
हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने इसे लापरवाही नहीं, बल्कि चिकित्सकीय प्रोटोकॉल के अनुरूप अपनाया गया प्राथमिक उपचार बताया है।
जानकारी के अनुसार, नावकोठी थाना क्षेत्र के महेशवारा गांव निवासी कृष्ण कुमार 15 जुलाई की रात सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
बेगूसराय के मंझौल अस्पताल से बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। सड़क दुर्घटना में घायल एक युवक के पैर में प्लास्टर करने के बजाय डॉक्टरों ने कार्टून बांधकर उसे रेफर कर दिया। डॉक्टर ने सफाई दी है कि यह प्रोटोकॉल के तहत किया गया है।@Nishantjdu
— Piyush Pandey (@piyush_bebak_) August 6, 2026
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डायल-112 की पुलिस टीम उन्हें अनुमंडलीय अस्पताल मंझौल लेकर पहुंची। जांच के दौरान चिकित्सकों ने पैर में गंभीर चोट और फ्रैक्चर की आशंका जताई। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर किया गया।
रेफर करने से पहले घायल पैर को कार्टून की मदद से स्थिर कर बांधा गया, इसका वीडियो अब इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हो रहा है।
अस्पताल ने दी सफाई
अस्पताल प्रभारी डॉ. अभिनव प्रियदर्शी ने बताया कि फ्रैक्चर की स्थिति में घायल अंग को हिलने से रोकना सबसे जरूरी होता है। यदि फ्रैक्चर स्प्लिंट उपलब्ध नहीं हो तो कार्डबोर्ड, लकड़ी या अन्य कठोर सामग्री का उपयोग कर अस्थायी स्प्लिंट बनाना प्राथमिक उपचार की मान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया है।
इससे रेफर के दौरान हड्डी के और अधिक खिसकने तथा मरीज को अतिरिक्त दर्द से बचाया जा सकता है। अस्पताल प्रबंधक गौरी शंकर ने बताया कि अस्पताल में आर्थोपेडिक चिकित्सक सीमित संख्या में हैं और फ्रैक्चर स्प्लिंट सहित कई आवश्यक संसाधनों की कमी है।
उन्होंने कहा कि अस्पताल लगभग 30 प्रतिशत मानव संसाधनों के सहारे संचालित हो रहा है। इसके बावजूद उपलब्ध संसाधनों के बीच मरीजों को सुरक्षित और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
अस्पताल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि वायरल वीडियो को अधूरी जानकारी के साथ प्रस्तुत किया गया, जबकि कार्टून का उपयोग मरीज की सुरक्षा और प्राथमिक उपचार के उद्देश्य से किया गया था।
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