चार बार असफल, पांचवीं बार में BPSC से बने SDM; बेगूसराय में ताड़ी बेचने वाले के बेटे की प्रेरक कहानी
नावकोठी के सूरज कुमार ने 70वीं BPSC परीक्षा में एसडीएम पद पर चयनित होकर संघर्ष और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश की है। ताड़ी बेचने वाले पिता के बेटे सूरज न ...और पढ़ें
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बीपीएससी से एसडीएम बने सूरज कुमार। फाइल
HighLights
सूरज कुमार 70वीं BPSC परीक्षा में एसडीएम बने।
ताड़ी बेचने वाले पिता के बेटे ने सफलता पाई।
चार असफलताओं के बाद पांचवें प्रयास में मिली जीत।
संवाद सूत्र, नावकोठी (बेगूसराय)। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त राज्य सिविल सेवा परीक्षा में नावकोठी के सूरज कुमार ने अपनी सफलता से संघर्ष, धैर्य और दृढ़ संकल्प की नई मिसाल पेश की है।
अनुसूचित जाति परिवार से आने वाले सूरज का चयन अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) के पद पर हुआ है। उनकी सफलता की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के आगे टिक नहीं पातीं।
ताड़ी बेचकर बेटे को पढ़ाया, सपनों को नहीं टूटने दिया
सूरज के पिता रामचंद्र चौधरी पुश्तैनी पेशे के रूप में ताड़ी उतारने और बेचने का कार्य करते हैं। इसी आय से उन्होंने परिवार का भरण-पोषण किया।
आर्थिक संसाधन सीमित थे, लेकिन उन्होंने बेटे की शिक्षा से कभी समझौता नहीं किया। परिवार ने हर कठिनाई का सामना किया, ताकि सूरज अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
सूरज ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा एपीएस प्लस टू स्कूल, नावकोठी से पूरी की। इसके बाद जीडी कॉलेज, बेगूसराय से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की।
इसके बाद तमिलनाडु की प्रतिष्ठित अन्ना यूनिवर्सिटी, चेन्नई में प्रवेश लिया और वहां से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बी.ई. (बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग) की डिग्री हासिल की।
इंजीनियरिंग के बाद चुनी प्रशासनिक सेवा की राह
इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद सूरज के सामने निजी क्षेत्र में करियर बनाने के अवसर थे, लेकिन उन्होंने समाज और देश की सेवा को प्राथमिकता देते हुए प्रशासनिक सेवा में जाने का निर्णय लिया।
इसी उद्देश्य से वह दिल्ली पहुंचे और BPSC के साथ-साथ सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में जुट गए। दिल्ली में तैयारी के दौरान सूरज का संघर्ष और भी कठिन हो गया।
उन्हें लगातार चार प्रयासों में असफलता मिली। हर असफलता के साथ आर्थिक तंगी, पारिवारिक दबाव और समाज के ताने भी बढ़ते गए। कई लोगों ने उनकी क्षमता पर सवाल उठाए और तैयारी छोड़ देने की सलाह भी दी।
लेकिन सूरज ने हार नहीं मानी। उन्होंने हर असफलता से सीख ली, अपनी कमजोरियों को दूर किया और पूरे आत्मविश्वास के साथ तैयारी जारी रखी।
आखिरकार पांचवें प्रयास में BPSC की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता हासिल कर एसडीएम बनने का सपना साकार कर दिखाया।
माता-पिता और गुरुजनों को दिया सफलता का श्रेय
सूरज ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और परिवार के सदस्यों को दिया। उन्होंने कहा कि यदि परिवार का विश्वास और शिक्षकों का मार्गदर्शन नहीं मिलता, तो यह मुकाम हासिल करना संभव नहीं था।
उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं से भी अपील की कि असफलता से घबराने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ते रहें।
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