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कांवड़ियों के लिए राहत की खबर, अजगैवीनाथ धाम की सीढ़ियों तक पहुंची गंगा की धारा; स्नान करने में होगी सुविधा

Published: Fri, 14 Aug 2026 01:16 PM (IST)

विश्व प्रसिद्ध Shravani Mela शुरू होते ही गंगा की धारा अजगैवीनाथ मंदिर की पक्की सीढ़ी घाट तक पहुंच गई है। ...और पढ़ें

अजगैवीनाथ धाम। फोटो जागरण

अजगैवीनाथ धाम। फोटो जागरण

HighLights

  1. श्रावणी मेला शुरू होते ही गंगा अजगैवीनाथ घाट पहुंची।

  2. कांवरियों को अब पक्की सीढ़ी घाट पर सुरक्षित स्नान।

  3. फिसलने या डूबने का डर समाप्त, सुविधा बढ़ी।

संवाद सूत्र, अजगैवीनाथ धाम। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला शुरू होने के साथ ही गंगा की धारा ने अजगैवीनाथ पहाड़ी को अपने घेरे में ले लिया है। इससे कांवरियों को लाभ यह होगा कि अब उन्हें पक्की सीढ़ी घाट पर सुरक्षित स्नान का आनंद मिलेगा। इतना ही नहीं बल्कि उन्हें अब पैर फिसलने से डूब जाने की भी कोई चिंता नहीं रहेगी।

बताते चलें कि कांवरियों की सुविधा की दृष्टि से ही वर्ष 1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ जगन्नाथ मिश्र ने यहां अजगैवीनाथ मंदिर के सामने पक्की सीढ़ी घाट का निर्माण कराया था। तब से लगातार हर वर्ष श्रावणी मेला से पूर्व ही गंगा की धारा इन सीढ़ियों पर पहुंच जाती थी और कांवरियों को सुरक्षित स्नान का आनंद मिलता था।

वर्ष 2002 से वर्ष 2023 तक इन सीढ़ियों पर प्रायः श्रावणी मेला के समापन के समय ही गंगा की धारा पहुंच पाती थी। वह भी सप्ताह-10 दिन बाद लौट जाती थी।

इसका सबसे बड़ा कारण फरक्का बैराज को बताया जाता है। गंगा की पेटी में गाद जमा होने से न केवल गंगा की मुख्य धारा की गहराई घट गई है बल्कि मंदिर और सीढ़ी घाट के बीच जमा मिट्टी-बालू के कारण नदी का तल इतना ऊंचा हो गया कि धारा वहां तक पहुंच ही नहीं पाती है।

बताते चलें कि अजगैवीनाथ मंदिर के सामने 1982 में बने सीढ़ी घाट का दो तिहाई भाग नदी की गाद के नीचे स्थायी रूप से दब चुका है। यदि इस गाद को हटाने का काम हो गंगा पूर्व की तरह हमेशा मंदिर के सामने ही बहेगी।

कांवरिया कर रहे सुरक्षित स्नान

श्रावणी मेला में हर वर्ष कांवरियों को अजगैवीनाथ मंदिर के सामने कच्चा घाट पर ही स्नान करने का जोखिम उठाना होता था। हालांकि नगर परिषद और जिला प्रशासन की ओर से कच्चे घाट पर सीढ़ियां बनाई जाती थीं लेकिन, वह कुछ घंटे बाद ही हजारों कांवरियों के चढ़ने-उतरने से फिसलन भरी हो जाती थी।

बैरिकेडिंग के बांस-बल्ला के सहारे या एक-दूसरे के सहारे लोग स्नान के लिए उतर पाते थे। बैरिकेडिंग के बावजूद कच्ची घाट में स्नान के दौरान पैर फिसलने पर डूब जाने की घटनाएं भी अक्सर हुआ करती थीं, लेकिन इस वर्ष मंदिर के सामने सीढ़ी घाट पर पानी आ जाने के कारण कांवरिया सुरक्षित स्नान कर रहे हैं।

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