बाबाधाम से लौट रहे थे 30 श्रद्धालु, पटना में हुआ भीषण सड़क हादसा; बस की छत पर बैठे 2 कांवड़ियों की मौत
पटना के फतुहा में बाबा बैद्यनाथ धाम से लौट रहे दो कांवरियों की सड़क हादसे में मौत हो गई। बस ...और पढ़ें
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सारण के अमनौर राजदेव भगत के दरवाजे पर रोते विलखते स्वजन। फोटो जागरण
HighLights
पटना के फतुहा में सड़क हादसे में दो कांवरियों की मौत।
बाबा बैद्यनाथ धाम से लौटते समय बस की छत पर बैठे थे।
अनियंत्रित हाइड्रा ने बस में टक्कर मारी, कासिमपुर गांव में शोक।
संवाद सूत्र, मढ़ौरा (सारण)। जिले के अमनौर थाना क्षेत्र के कासिमपुर गांव में शुक्रवार को मातम पसरा रहा। बाबा बैद्यनाथ धाम से जलाभिषेक कर लौट रहे गांव के दो कांवरियों की पटना जिले के फतुहा में हुए सड़क हादसे में मौत की खबर जैसे ही गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। शुक्रवार को दोनों के शव गांव पहुंचते ही स्वजन की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।
दर्शन कर लौट रहे थे श्रद्धालु
जानकारी के अनुसार कासिमपुर गांव से करीब 30 श्रद्धालु बस से बाबा बैद्यनाथ धाम गए थे। दर्शन-पूजन के बाद सभी श्रद्धालु बस से अपने गांव लौट रहे थे। इसी दौरान फतुहा के समीप गुरूवार (13अगस्त) को एक अनियंत्रित हाइड्रा ने बस में जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के समय कुछ यात्री बस की छत पर भी सवार थे।
बस की छत पर सवार थे दोनों मृतक
टक्कर इतनी भीषण थी कि बस की छत पर बैठे दो श्रद्धालु दुर्घटना की चपेट में आ गए। गंभीर रूप से घायल होने के कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों की पहचान कासिमपुर गांव निवासी 60 वर्षीय राजदेव भगत तथा 30 वर्षीय पूजन राय के रूप में हुई है।
पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचा शव
घटना की सूचना मिलने पर खुसरूपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शुक्रवार की देर रात शव गांव पहुंचा। शव देखते ही स्वजन बदहवास हो गए और गांव का माहौल शोकाकुल हो उठा।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक पूजन राय अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। उनके निधन से पत्नी शांति देवी, 14 वर्षीय पुत्र भोला और 12 वर्षीय पुत्री प्रीति कुमारी के सामने जीविकोपार्जन का संकट खड़ा हो गया है।
स्वजन ने बताया कि परिवार के पास रहने के लिए पक्का मकान भी नहीं है। हादसे के बाद पूरे कासिमपुर गांव में शोक की लहर है और लोग पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने में जुटे हैं।
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