क्या सावन से पहले सुधरेगी भागलपुर के बूढ़ानाथ मंदिर की सूरत, अतिक्रमण, जलभराव, जाम और गंदगी की भीषण समस्या?
भागलपुर का प्राचीन बूढ़ानाथ मंदिर श्रावणी मेले से पहले प्रशासनिक उपेक्षा और बदहाली का शिकार है। सफाई, सुरक्षा, यातायात और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधा ...और पढ़ें

क्या बिहार के प्रसिद्ध बूढ़ानाथ मंदिर को मिलेगी बदहाली से मुक्ति, सावन से ठीक पहले प्रशासन क्यों बना हुआ है अनजान?
जागरण संवाददाता, भागलपुर। अंग प्रदेश की आस्था का प्रमुख केंद्र वृद्धेश्वर महादेव (बूढ़ानाथ) मंदिर अपनी प्राचीनता के बावजूद प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार है। इस माह के अंत से पवित्र श्रावणी मेला शुरू होने वाला है, लेकिन मंदिर की व्यवस्थाएं बदहाल हैं।
सावन से पहले बढ़ी चिंता
श्रावण मास में यहां बाबा के जलाभिषेक के लिए लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। मेला सिर पर होने के बावजूद नियमित सफाई, बेहतर प्रकाश व्यवस्था, सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे और यातायात प्रबंधन का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं दिख रहा है।
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टैक्स देकर भी उपेक्षा क्यों
मंदिर प्रबंधन ने एक बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि मंदिर प्रशासन द्वारा निर्धारित टैक्स नियमित रूप से नगर निगम को दिया जाता है। इसके बावजूद नगर निगम द्वारा मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं का विकास नहीं किया जा रहा है।
पार्क पर प्रशासन की नजर
इसके साथ ही प्रबंधन ने आरोप लगाया कि मंदिर की निजी संपत्ति 'बूढ़ानाथ पार्क' पर सरकार और स्थानीय प्रशासन की गिद्ध दृष्टि लगी हुई है। एक तरफ मंदिर की जमीन पर नजर है, तो दूसरी तरफ इसकी समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है।
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अतिक्रमण और जाम से आफत
मंदिर प्रबंधन के अनुसार, वर्ष 2017 से जिला प्रशासन व नगर निगम को लगातार लिखित आवेदन दिए जा रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। मंदिर तक पहुँचने वाले मुख्य मार्गों पर अवैध पार्किंग और अतिक्रमण के कारण हमेशा जाम लगा रहता है।
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वीआईपी और बुजुर्गों को कष्ट
जाम की इस गंभीर समस्या के कारण सावन के दौरान कांवड़ियों, विशेषकर महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्रशासन द्वारा प्रभावी यातायात प्रबंधन न होने से रोष व्याप्त है।
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57 वर्षों से लंबित नाला
मंदिर की सबसे बड़ी समस्या इसके पीछे स्थित नाला है, जिसकी सफाई व निर्माण की मांग पिछले 57 वर्षों से की जा रही है। बरसात के समय नाले का गंदा पानी बैक मारकर मंदिर परिसर में फैल जाता है, जिससे हर तरफ गंदगी हो जाती है।
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दुर्गंध के बीच दर्शन को मजबूर
जलभराव और बदबू के कारण दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को भारी असुविधा होती है। मंदिर के महंत श्री शिव नारायण गिरी महाराज और प्रबंधन प्रमुख वाल्मीकि कुमार सिंह ने जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है।
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25 साल से गुरुकुल बंद
समस्या यहीं खत्म नहीं होती, स्वतंत्रता से पूर्व यहाँ संचालित होने वाले गुरुकुल भवन की छत जर्जर होकर ध्वस्त हो चुकी है। रख-रखाव के अभाव में पिछले 25 वर्षों से यह ऐतिहासिक गुरुकुल पूरी तरह बंद पड़ा हुआ है।
प्रशासन से कॉरिडोर की मांग
महंत और स्थानीय नागरिकों ने बिहार सरकार, पर्यटन विभाग व नगर निगम से मांग की है कि सावन से पहले यहां स्वच्छता अभियान चलाया जाए। इसके साथ ही इस प्राचीन धरोहर को भव्य मंदिर कॉरिडोर के रूप में विकसित किया जाए।
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बदहाल नागरिक और मूलभूत सुविधाएं
नियमित सफाई का घोर अभाव: मंदिर परिसर और उसके आसपास दैनिक स्तर पर नियमित साफ-सफाई की कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है।
अंधेरे में डूबा रहता है इलाका: परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उच्च गुणवत्ता वाली प्रकाश व्यवस्था (लाइटिंग) का इंतजाम नहीं है।
सुरक्षा व्यवस्था राम भरोसे: इतनी भीड़ होने के बावजूद सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर परिसर में सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की भारी कमी है।
पानी और शौचालय की किल्लत: दूर-दराज से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए पेयजल और आधुनिक शौचालय की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
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अतिक्रमण और भयंकर जाम की समस्या
मुख्य मार्गों पर अवैध कब्जा: मंदिर तक पहुँचने वाले रास्तों पर फुटकर विक्रेताओं के अतिक्रमण से सड़कें बेहद संकरी हो गई हैं।
अवैध पार्किंग से बढ़ी आफत: वाहनों और टोटो की बेतरतीब अवैध पार्किंग के कारण मंदिर मार्ग पर चौबीसों घंटे जाम की स्थिति बनी रहती है।
श्रद्धालुओं को होती है भारी पीड़ा: इस जाम के कारण सावन में कांवड़ियों, महिलाओं और बुजुर्ग श्रद्धालुओं को पैदल चलने में भी भारी कष्ट होता है।
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जलभराव और जर्जर नाले का संकट
57 साल पुरानी लंबित मांग: मंदिर के पीछे स्थित बड़े नाले की मुकम्मल सफाई और निर्माण का कार्य पिछले 57 वर्षों से अटका पड़ा है।
परिसर में बहता गंदा पानी: बरसात के मौसम में नाले का गंदा पानी बैक मार देता है, जिससे पूरे मंदिर परिसर में जलभराव हो जाता है।
बदबू के बीच दर्शन की मजबूरी: हर तरफ फैली गंदगी और नाले की भीषण दुर्गंध के बीच ही श्रद्धालु बाबा का दर्शन करने को मजबूर हैं।
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ऐतिहासिक गुरुकुल की बदहाली
25 वर्षों से बंद है शिक्षण: रख-रखाव के अभाव में गुरुकुल भवन की छत पूरी तरह जर्जर होकर क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिससे यह ऐतिहासिक धरोहर पिछले 25 साल से बंद पड़ी है।
संतों की तपोभूमि: 108 से अधिक उम्र के महंत की साधना
पिछले कुछ माह से यहां प्रवास पर रहे तांत्रिक क्रियायोगी एवं ज्योतिषाचार्य स्मार्त परमहंस आचार्य पंकज अथर्व ने बूढ़ानाथ मंदिर की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक मंदिर की ख्याति संपूर्ण देश में फैली है और गंगा तट पर स्थित यह पावन स्थल शिव आराधना का एक प्रमुख केंद्र है।
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समर्पण की सराहना
आचार्य पंकज ने बताया कि यहां शिवलिंग की स्थापना स्वयं महर्षि वशिष्ठ द्वारा की गई थी। उन्होंने मंदिर के 108 वर्षीय महंत श्री शिव नारायण गिरी जी महाराज की साधना शक्ति, दीर्घायु तपस्या और अटूट समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि सरकार व प्रशासन को इस प्राचीन आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण पर तुरंत विशेष ध्यान देना चाहिए।
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शादी-विवाह और आयोजनों का बड़ा केंद्र
बूढ़ानाथ मंदिर के प्रबंधक वाल्मीकि कुमार सिंह ने बताया कि बूढ़ानाथ मंदिर न केवल पूजा-अर्चना, बल्कि सामाजिक व धार्मिक आयोजनों का भी मुख्य केंद्र है। यहां बेहद कम शुल्क पर आम लोगों के लिए विवाह और उपनयन (जनेऊ) संस्कार जैसे बड़े आयोजन आयोजित किए जाते हैं। मंदिर परिसर में जो भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध हैं, वे यहां आने वाले हर आम-ओ-खास को पूरी निष्ठा के साथ प्रदान की जाती हैं।
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जन-जन की आस्था
वाल्मीकि कुमार सिंह ने बताया कि सामान्य दिनों में भी यहां प्रतिदिन हजारों लोग आते हैं, लेकिन पवित्र सावन माह में यह संख्या प्रतिदिन 50 हजार से अधिक हो जाती है। सावन की सोमवारी पर तो यहाँ लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है, जिसमें बिहार और बाहर के राज्यों से आने वाले बोलबम के कांवड़ियों की संख्या सबसे अधिक होती है।