करोड़ों के कारोबारियों पर भागलपुर नगर निगम की नजर, बढ़ेगा ट्रेड लाइसेंस शुल्क; 619 करोड़ का बजट पास
भागलपुर नगर निगम बड़े व्यापारियों के ट्रेड लाइसेंस शुल्क में संशोधन की तैयारी कर रहा है। मेयर डॉ. बसुंधरा लाल की अध्यक्षता में बजट बैठक में यह निर्णय ...और पढ़ें

करोड़ों के कारोबारियों पर भागलपुर नगर निगम की नजर, बढ़ेगा ट्रेड लाइसेंस शुल्क

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जागरण संवाददाता, भागलपुर। बड़े व्यापारियों के ट्रेड लाइसेंस शुल्क को अब भागलपुर नगर निगम रिवाइज करने की तैयारी में है। नगर निगम का मानना है कि करोड़ों रुपये का व्यापार और इनकम टैक्स देने वाले बड़े कारोबारियों से वर्तमान में अपेक्षाकृत कम शुल्क लिया जा रहा है। अब उनके कारोबार के आधार पर नया स्लैब तय किया जाएगा।
इसी दिशा में व्यापारिक प्रतिष्ठानों की श्रेणी तय करने के लिए समिति गठित की जाएगी। मंगलवार को मेयर डॉ. बसुंधरा लाल की अध्यक्षता में हुई बजट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे तक चर्चा के बाद वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 619 करोड़ रुपये का बजट पारित किया गया।
बैठक में शहर के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने और निगम की आय बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर दिया गया। इस बजट में 26 लाख रुपये के फायदे का अनुमान है। बैठक में नगर आयुक्त, उपमेयर, पार्षद, उप नगर आयुक्त और निगम की विभिन्न शाखाओं के प्रभारी मौजूद थे।
ट्रेड लाइसेंस के स्लैब में बदलाव की तैयारी
ट्रेड लाइसेंस से मिलने वाले राजस्व को बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। वर्तमान में इससे लगभग 28 लाख रुपये का राजस्व मिल रहा है, जबकि आगामी वर्ष के लिए 50 लाख रुपये का लक्ष्य रखा गया, जिस पर पार्षदों ने आपत्ति जताई।
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नगर आयुक्त किसलय कुशवाहा ने बताया कि शहर में करीब 30 हजार दुकानें हैं, लेकिन अभी सीमित व्यापारियों से ही लाइसेंस शुल्क लिया जा रहा है। 10 लाख से नीचे कारोबार करने वालों के लिए एक हजार रुपये प्रति वर्ष लाइसेंस शुल्क तय है और 10 लाख से ऊपर वालों से ढाई हजार रुपये।
अब दो से 10 करोड़ रुपये तक के कारोबार वाले व्यापारियों के लिए अलग स्लैब तय करने के लिए समिति गठित की जाएगी। साथ ही गोदाम और ट्रांसपोर्टरों की भी जांच कर उनसे भी लाइसेंस शुल्क तय किया जाएगा। सभी कारोबारियों को ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य होगा।
मेयर ने खींचा विकास का रोडमैप
मेयर डॉ. बसुंधरा लाल ने कहा कि यह बजट शहर की जनता की अपेक्षाओं का प्रतिबिंब है और पारदर्शी व भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था के साथ विकास योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पार्षदों के भ्रमण मद को 1.25 लाख से बढ़ाकर 20 लाख रुपये करने और उन्हें इंदौर भ्रमण पर भेजने का प्रस्ताव रखा गया है। उन्होंने बताया कि शहर को 10 जोन में बांटा गया है और प्रत्येक जोन से 30 लाख रुपये से अधिक राजस्व आने की संभावना है।
ड्रेनेज, सड़क और स्ट्रीट लाइट पर फोकस
बजट में शहर की जल निकासी व्यवस्था को सुदृढ़ करने, जर्जर सड़कों के पुनर्निर्माण और स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए विशेष प्रावधान किया गया है।
नगर आयुक्त ने कहा कि सफाई, रोशनी, सड़क, नाला और जलजमाव की समस्या को कम करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जाएगा, जिससे यातायात व्यवस्था भी सुगम होगी।
नगर निगम और बिहार सरकार की जमीन को चिह्नित कर घेराबंदी की जाएगी और वहां भवन, मार्केटिंग कॉम्प्लेक्स तथा पार्किंग जैसी व्यावसायिक योजनाएं विकसित की जाएंगी।
अतिक्रमण और अवैध वसूली पर सख्ती
पार्षद अश्विनी जोशी मोंटी ने वेरायटी चौक से खलीफाबाग चौक तक लगने वाले रविवार बाजार में अवैध वसूली का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बाजार लगाने के नाम पर वेंडरों से प्रति व्यक्ति 100 रुपये वसूले जा रहे हैं, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होती है।
इस पर नगर आयुक्त ने स्पष्ट किया कि बाजार लगाने की अनुमति निगम से लेनी होगी और शुल्क भी निगम ही वसूलेगा। इसके अलावा घरों के सामने सड़क पर किए गए पक्के अतिक्रमण और बिना नक्शा पास कराए बने भवनों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
समर प्लान के तहत जलापूर्ति और सीवरेज पर होगा काम
गर्मी को देखते हुए जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने और सीवरेज सिस्टम के बेहतर निस्तारण के लिए तीन माह का रिसर्च आधारित कार्यक्रम चलाया जाएगा। सिविल वर्क, स्ट्रीट लाइट और कल्वर्ट निर्माण जैसे कार्य आउटसोर्सिंग एजेंसी से कराए जाएंगे, जिन्हें तीन दिनों के भीतर समस्या का समाधान करना होगा।
बुडको द्वारा निर्मित आनंदगढ़ जलमीनार की आपूर्ति व्यवस्था और दरारों की जांच के लिए समिति गठित की जाएगी। जल संकट को लेकर बुधवार को बुडको के साथ बैठक भी प्रस्तावित है।
सफाई व्यवस्था पर 200 करोड़ खर्च होगा
शहर की सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए चार वर्षों में 200 करोड़ रुपये खर्च करने का निर्णय लिया गया है। यानी हर वर्ष लगभग 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सफाई कर्मियों की संख्या दोगुनी करने, डोर-टू-डोर कचरा उठाव को मजबूत करने और अत्याधुनिक मशीनों की खरीद पर सहमति बनी।
मेडिकल कचरा फेंकने के मामलों की जांच की जाएगी। साथ ही शव वाहन की संख्या बढ़ाने और उसका संचालन एजेंसी के माध्यम से कराने का निर्णय लिया गया। कंपनीबाग, दीपनगर और लोहिया पुल के नीचे वाहन पार्किंग विकसित करने की योजना भी बनाई गई है।
पेयजल और डिजिटल टैक्स सिस्टम पर जोर
प्रत्येक वार्ड में पाइपलाइन विस्तार और नए नलकूप लगाने की योजना बजट में शामिल है, ताकि लोगों को नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। पार्कों के सौंदर्यीकरण, सामुदायिक भवनों के जीर्णोद्धार और वेंडिंग जोन को व्यवस्थित करने की योजना भी है।
राजस्व बढ़ाने के लिए होल्डिंग टैक्स और अन्य शुल्क की वसूली प्रणाली को डिजिटल बनाने पर भी जोर दिया गया है।