भागलपुर में रियल एस्टेट को झटका : विक्रमशिला सैटेलाइट टाउनशिप के 126 गांवों में जमीन रजिस्ट्री पर 30 जून 2027 तक रोक
भागलपुर में विक्रमशिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना के लिए नगर विकास विभाग ने 30 जून 2027 तक भूमि खरीद-बिक्री और निर्माण पर रोक लगा दी है। यह ...और पढ़ें

भागलपुर का मास्टर प्लान: नाथनगर और सुल्तानगंज के दर्जनों गांवों में निर्माण पर पाबंदी, नियम तोड़ा तो होगी जेल
जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार के भागलपुर में बनने जा रही महत्वाकांक्षी 'विक्रमशिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप परियोजना' को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग ने एक बेहद बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी करते हुए भागलपुर आयोजना क्षेत्र के अंतर्गत चिह्नित विशेष क्षेत्र (स्पेशल एरिया) और कोर एरिया में भूमि की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
३० जून २०२७ तक निर्माण कार्यों पर पूरी तरह पाबंदी
सरकार के इस नए आदेश के बाद अब प्रभावित क्षेत्रों में जमीन का हस्तांतरण, भू-विकास (प्लॉटिंग) तथा किसी भी प्रकार के नए भवनों के निर्माण पर 30 जून 2027 तक पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बड़ा निर्णय प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप का मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया को बिना किसी बाधा के पूरा करने को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
बिहार शहरी आयोजना अधिनियम के तहत कड़ा ऐक्शन
नगर विकास एवं आवास विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के मुताबिक, बिहार शहरी आयोजना एवं विकास अधिनियम 2012 की धारा 9(7) तथा बिहार शहरी आयोजना एवं विकास नियमावली 2014 के कड़े प्रावधानों के तहत यह प्रतिबंध लागू किया गया है। मास्टर प्लान के अंतिम रूप से अधिसूचित होने तक संबंधित कोर और विशेष क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि की अनुमति नहीं होगी।
सबसे अधिक प्रभावित होगा भागलपुर का नाथनगर प्रखंड
इससे पहले 26 जून 2026 को भागलपुर आयोजना क्षेत्र का विस्तार किया गया था, जिसके बाद अब इस विस्तारित क्षेत्र के लिए वैज्ञानिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। सरकार के इस बड़े फैसले से सबसे अधिक नाथनगर प्रखंड प्रभावित होने जा रहा है। नाथनगर के बड़ी संख्या में राजस्व गांवों और जमीनों को इस हाईटेक टाउनशिप क्षेत्र के दायरे में शामिल किया गया है।
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सुल्तानगंज और शाहकुंड के गांव भी दायरे में आए
इस महत्वाकांक्षी योजना के दायरे में नाथनगर के अलावा शाहकुंड, सुल्तानगंज और नारायणपुर प्रखंड के भी कई महत्वपूर्ण गांवों को शामिल किया गया है। आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, इस पूरी योजना के भीतर कुल 126 प्रशासनिक इकाइयों और राजस्व गांवों को लाया गया है। इनमें नाथनगर के प्रमुख गांव फतेहपुर, बिहारीपुर, भतौरिया, गंगाप्रसाद, पैगंबरपुर, भोलापुर, खिलाुन और मणियारपुर चौर शामिल हैं।
रियल एस्टेट कारोबारियों और भू-माफियाओं में हड़कंप
इनके अतिरिक्त शाहकुंड, सुल्तानगंज और नारायणपुर के दर्जनों गांवों के साथ-साथ नवगठित अकबरनगर नगर पंचायत क्षेत्र को भी इस मास्टर प्लान का हिस्सा बनाया गया है। इस आदेश के बाद से भागलपुर के जमीन मालिकों, आम लोगों और खासकर रियल एस्टेट कारोबारियों व प्रॉपर्टी डीलरों के बीच भारी हलचल मच गई है, क्योंकि अब अगले साल के मध्य तक यहां कोई रजिस्ट्री नहीं होगी।
नियम तोड़ने वालों पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई
विभाग का कहना है कि प्रस्तावित सैटेलाइट टाउनशिप को पूरी तरह वैज्ञानिक एवं सुनियोजित तरीके से बसाया जाएगा। इसके तहत विश्वस्तरीय चौड़ी सड़कें, जल निकासी (ड्रेनेज सिस्टम), बड़े हरित क्षेत्र (ग्रीन बेल्ट), आवासीय और संस्थागत क्षेत्रों का समुचित विकास होगा। नगर विकास विभाग ने चेतावनी दी है कि प्रतिबंध की अवधि के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इन क्षेत्रों में पूरी तरह ठप रहेगा जमीन का खेल
कुल प्रशासनिक इकाइयां: इस योजना के तहत भागलपुर प्रमंडल के कुल 126 राजस्व गांवों और क्षेत्रों को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है।
शहरी निकाय भी शामिल: ग्रामीण इलाकों के साथ ही अकबरनगर नगर पंचायत क्षेत्र को भी इस व्यापक और आधुनिक मास्टर प्लान के दायरे में रखा गया है।
भविष्य के वर्ल्ड क्लास इंफ्रास्ट्रक्चर की तैयारी
वैज्ञानिक नियोजन: जमीन की खरीद-बिक्री और प्लॉटिंग रुकने से भविष्य में सड़कों, सीवरेज लाइन और ग्रीन पार्क के निर्माण में कोई कानूनी या व्यावहारिक अड़चन नहीं आएगी।
अवैध निर्माण पर रोक: मास्टर प्लान फाइनल होने से पहले लोग अवैध या अनियोजित तरीके से मकान न बना सकें, इसलिए निर्माण कार्यों पर 2027 तक लॉक लगा दिया गया है।