Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    भागलपुर में जिस शख्स की हत्या हुई, थाने के मालखाने से गायब हुआ उसका मोबाइल; जज ने थानाध्यक्ष को थमाया शोकॉज

    Updated: Sat, 11 Jul 2026 07:15 AM (IST)

    भागलपुर के लोदीपुर थाने से आशीष मिश्रा हत्याकांड का अहम डिजिटल सबूत, मृतक का मोबाइल फोन, मालखाने से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। अदालत के आदेश पर ...और पढ़ें

    भागलपुर में मर्डर केस का सबसे बड़ा सबूत थाने के मालखाने से गायब, जज ने लोदीपुर थानाध्यक्ष को थमाया शोकॉज

    भागलपुर में मर्डर केस का सबसे बड़ा सबूत थाने के मालखाने से गायब, जज ने लोदीपुर थानाध्यक्ष को थमाया शोकॉज

    HighLights

    1. आशीष मिश्रा हत्याकांड का मोबाइल मालखाने से गायब।

    2. अदालत ने थानाध्यक्ष को लापरवाही पर शोकॉज दिया।

    3. जमीन विवाद में चचेरे भाई ने की थी हत्या।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार के भागलपुर जिले के लोदीपुर थाने से पुलिसिया लापरवाही और खाकी को कटघरे में खड़ा करने वाला एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। लोदीपुर बाइपास क्षेत्र में पांच फरवरी 2022 को हुई आशीष मिश्रा हत्याकांड का सबसे बड़ा डिजिटल सबूत यानी मृतक का मोबाइल फोन थाने के मालखाने से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया है। इस घोर लापरवाही का खुलासा तब हुआ जब अदालत के आदेश पर वर्तमान थानाध्यक्ष ने पूरे थाने का कोना-कोना छान मारा, लेकिन जब्ती सूची में शामिल वह वीआईपी मोबाइल कहीं नहीं मिला।

    न्यायाधीश प्रशांत झा की अदालत ने लिया सख्त एक्शन

    पूरा मामला तब गरमाया जब मृतक के परिजनों ने जिला सत्र न्यायाधीश-13 प्रशांत झा की अदालत में अपने अधिवक्ता महावीर तिवारी के जरिए एक अर्जी देकर मृतक का मोबाइल वापस करने की गुहार लगाई। न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान लोदीपुर थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार को नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया पूरी कर मोबाइल तुरंत पीड़ित परिवार को सौंपने का लिखित आदेश जारी किया। न्यायालय का पत्र मिलते ही जब थानाध्यक्ष ने मालखाने के रिकॉर्ड खंगाले और वर्तमान केस अनुसंधानकर्ता (आईओ) से पूछताछ की, तो पता चला कि मोबाइल का कोई अता-पता ही नहीं है।

    घंटों छान मारा मालखाना, पूर्व आईओ पर फोड़ा ठीकरा

    थाने में मचे हड़कंप के बीच वर्तमान अनुसंधानकर्ता ने लिखित कैफियत देते हुए साफ कहा कि केस के पूर्ववर्ती अनुसंधानकर्ता दारोगा मुकेश कुमार ने उन्हें चार्ज सौंपते वक्त यह मोबाइल दिया ही नहीं था। इसके बाद थानाध्यक्ष जितेंद्र कुमार ने पुलिस टीम के साथ खुद घंटों तक मालखाने का एक-एक संदूक और फाइल छान मारी, लेकिन जब मोबाइल हाथ नहीं लगा तो उन्होंने अदालत के समक्ष अपने हाथ खड़े कर दिए। शुक्रवार को जब पीड़ित पक्ष के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि पुलिस की लापरवाही से सबूत गायब हो चुका है, तो नाराज न्यायाधीश ने वर्तमान थानाध्यक्ष से इस घोर लापरवाही पर सीधे शोकॉज (कारण बताओ नोटिस) तलब कर लिया।

    जमीन दिखाने के बहाने छाती पर बैठकर गोदा था चाकू

    इस हत्याकांड के पीछे की कहानी बेहद खौफनाक है; बैजानी गांव निवासी आशीष मिश्रा को उसके ही सगे चचेरे भाई दीपक कुमार मिश्रा ने विश्वास में लेकर धोखे से मौत के घाट उतार दिया था। आरोपी दीपक अपने भाई आशीष को बाइपास में जमीन दिखाने के बहाने बुलाकर ले गया था और वहां सुनसान रास्ता देखकर पीछे से उसकी पीठ पर चाकू से ताबड़तोड़ कई वार कर दिए थे। जब आशीष लहूलुहान होकर जमीन पर गिर गया, तो बेरहम दीपक उसकी छाती पर बैठ गया और तब तक चाकू गोदता रहा जब तक कि तड़पते हुए आशीष का शरीर पूरी तरह शांत नहीं हो गया।

    खबरें और भी

    एसएसपी बाबू राम और सिटी एसपी स्वर्ण प्रभात ने खोला था राज

    वारदात को अंजाम देने के बाद शातिर दीपक ने खुद ही शोर मचाकर लोगों को इकट्ठा किया था ताकि किसी को उस पर शक न हो, लेकिन मृतक के छोटे भाई प्रीतम मिश्रा को उसकी गतिविधियों पर संदेह था। प्रीतम ने तत्कालीन एसएसपी बाबू राम से मिलकर दीपक की भूमिका की जांच की मांग की, जिसके बाद एसएसपी ने तत्कालीन सिटी एसपी स्वर्ण प्रभात की निगरानी में एक विशेष टीम गठित की थी। सिटी एसपी स्वर्ण प्रभात ने जब दीपक को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने तोते की तरह जुर्म कबूल कर लिया और उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त खून से सना चाकू भी बरामद हुआ था।

    दो कट्ठा जमीन के हिस्से के विवाद में रची थी खूनी साजिश

    पुलिस जांच में यह बात साफ हुई थी कि बैजानी गांव में दीपक की नानी रुकमणी देवी से हिस्से में मिली दो कट्ठा जमीन को लेकर परिवार में काफी समय से विवाद चल रहा था। दीपक उस जमीन में से एक कट्ठा अपने बंटू चाचा से जबरन मांग रहा था, जिसका विरोध करने में आशीष मिश्रा अपने चाचा का खुलकर सपोर्ट करता था और इसी खुन्नस में दीपक ने मर्डर की स्क्रिप्ट लिखी। अब जबकि अदालत में दोषी दीपक मिश्रा की सजा के बिंदु पर अंतिम सुनवाई होनी है, ऐसे में थाने से मोबाइल का गायब होना पुलिस की कार्यशैली पर कई बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।