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    भागलपुर : शिव मंदिर के शिखर पर नीलकंठ श्वेतकण्ठ कौड़िल्ला, अद्भुत पक्षी ने किया रोमांचित, वेदज्ञ पंडितों ने कह दी यह बड़ी बात

    Updated: Sat, 10 Jan 2026 06:01 AM (GMT+05:30)

    भागलपुर के नाथनगर स्थित चंपानगर शिव मंदिर में नाग के फन पर नीलकंठ पक्षी के बैठने का दुर्लभ दृश्य दैनिक जागरण के छायाकार राजकिशोर ने कैद किया। पंडितों ...और पढ़ें

    भागलपुर के चंपानगर शिव मंदिर के शिखर पर बैठी नीलकंठ, श्वेतकण्ठ कौड़िल्ला। छाया : राजकिशोर

    भागलपुर के चंपानगर शिव मंदिर के शिखर पर बैठी नीलकंठ, श्वेतकण्ठ कौड़िल्ला। छाया : राजकिशोर

    HighLights

    1. भागलपुर शिव मंदिर में नीलकंठ पक्षी का दुर्लभ दृश्य।

    2. पंडितों ने इसे महादेव की कृपा और शुभ संकेत बताया।

    3. सौभाग्य, विजय और समृद्धि का प्रतीक माना गया।

    डिजिटल डेस्क, भागलपुर। भागलपुर के नाथनगर इलाके में चंपानगर एक प्रसिद्ध जगह है। जहां शिव मंदिर के ऊपर लगे नाग के फन पर नीलकंठ, श्वेतकण्ठ कौड़िल्ला पक्षी बैठी हुई थी। इस दौरान दैनिक जागरण के छायाकार राजकिशोर ने इस दृश्य को अपने कैमरे में कैद की। यह दृश्य केवल एक संयोग नहीं, बल्कि भक्तों के लिए एक शुभ संकेत है। यह चंपानगर के उस मंदिर की जागृत ऊर्जा और महादेव की उपस्थिति का प्रमाण माना जा सकता है। ऐसे दर्शन सौभाग्यशाली लोगों को ही प्राप्त होते हैं।

    Neelkanth Shwetkanth Kaudilla on the top of the Shiva temple Bhagalpur1

    सौभाग्य की प्राप्ति, विजय और समृद्धि का सूचक 

    सियाराम ज्योति शोध संस्थान के ज्योतिषाचार्य पंडित कथावाचक ऋषिकेश जी महाराज कहते हैं कि भगवान शिव को नील कण्ठेश्वर के नाम से भी जाना जाता है। भगवान शिव ने समुद्र मंथन से निकले हुए विष का जब पान किया था, तभी उनका शरीर नीला हो गया था। मान्यता है कि नीलकंठ पक्षी भगवान शिव का प्रतीक है और उनका दर्शन शिव दर्शन के ही स्वरूप फलदाई होता है। यदि इस पक्षी का दर्शन शिव मंदिर के समीप हो जाए तो इसे साक्षात शिव दर्शन के रूप में मानना चाहिए। यह सौभाग्य की प्राप्ति, विजय और समृद्धि का सूचक होता है। भगवान राम को रावण पर विजय के बाद ब्रह्महत्या के दोष से मुक्ति दिलाने के लिए शिव इसी रूप में प्रकट हुए थे। इसलिए नीलकंठ का दर्शन शिव मंदिर के पास या शिखर पर होना अन्यंत शुभ संकेत है।

    Neelkanth Shwetkanth Kaudilla on the top of the Shiva temple Bhagalpur2

    "नीलकंठ" स्वयं महादेव का एक नाम है

    वेद विद्यापीठ गुरुधाम बौंसी गुरुधाम के आचार्य सम्पूर्णाननंद कहते हैं कि यह वाकई में एक अत्यंत दुर्लभ और भक्तिमय दृश्य है। चंपानगर के शिव मंदिर का यह नजारा धार्मिक दृष्टि से बहुत गहरा महत्व रखता है। "नीलकंठ" स्वयं महादेव का एक नाम है, जो उन्होंने समुद्र मंथन के दौरान विष पान करने के बाद धारण किया था। शिव मंदिर के शिखर पर, विशेषकर नाग के ऊपर नीलकंठ का बैठना और इसका दर्शन यह दर्शाता है कि महादेव अपनी कृपा आपपर बरसा रहे हैं।

    विजय और शुभता का प्रतीक

    आचार्य सम्पूर्णाननंद ने कहा कि नीलकंठ के दर्शन को "विजयदशमी" और अन्य शुभ अवसरों पर अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। इसके दर्शन मात्र से मनुष्य के पापों का नाश होता है और उसे अपने कार्यों में सिद्धि प्राप्त होती है। नाग के फन पर इसका बैठना शत्रु बाधा की समाप्ति और आध्यात्मिक उन्नति का संकेत है। शिवलिंग या मंदिर के ऊपर स्थित नाग कुंडलिनी शक्ति और पृथ्वी के भार के संतुलन का प्रतीक है। नाग और पक्षी प्रकृति में स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के विरोधी माने जाते हैं। जब एक पक्षी बिना किसी भय के नाग के फन पर बैठता है, तो यह "परम शांति" और द्वेष की समाप्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि शिव की शरण में आने पर सभी जीव अपनी शत्रुता भूलकर एकाकार हो जाते हैं।

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