गंगा पार की जंग : देर से पहुंचती जहाज और तिल-तिल पिघलते यात्री, भागलपुर-नवगछिया को बांटती गंगा
विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद भागलपुर में गंगा नदी पर जहाज सेवा हजारों लोगों की जीवनरेखा बन गई है, लेकिन जहाजों के समय पर न पहुंचने और तकनीकी खराबी ...और पढ़ें
HighLights
जहाज सेवा में देरी से यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
तकनीकी खराबी और भीड़भाड़ से यात्रियों की परेशानी बढ़ी।
प्रशासन से जहाजों की संख्या बढ़ाने और निगरानी की मांग।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। विक्रमशिला सेतु के बंद होने के बाद गंगा नदी की जलधारा ही हजारों लोगों के लिए जीवनरेखा बन गई है। जिले के प्रशासन ने राहत देने के लिए जलमार्ग से जहाज सेवा शुरू कर दी, लेकिन अब यही व्यवस्था यात्रियों के लिए नई परेशानी का कारण बनती जा रही है।
निर्धारित समय पर जहाज न पहुंचने के कारण रोज यात्रियों की बेचैनी बढ़ रही है। चिलचिलाती धूप, उमस भरी गर्मी और गंगा किनारे घंटों का इंतजार अब लोगों की नियति बन गया है।
समय पर जहाज नहीं पहुंच रही
प्रशासन की ओर से जहाज परिचालन का समय पहले से तय है, लेकिन वास्तविकता यह है कि जहाज अक्सर समय पर घाट तक नहीं पहुँच पाती। पूछने पर अधिकारियों और कर्मियों की ओर से लगभग एक जैसा जवाब मिलता है: "तकनीकी खराबी है, ठीक कराया जा रहा है, जहाज थोड़ी देर से आएगी।" लेकिन यह "थोड़ी देर" कई बार घंटों में बदल जाती है, जिससे यात्रियों की परेशानियां और बढ़ जाती हैं।
सोमवार का दृश्य
सोमवार को बरारी घाट पर कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। दिन के तीन बजे के बाद जहाज घाट पर पहुँची। तब तक सैकड़ों लोग गंगा पार जाने के लिए घंटों इंतजार करते रहे।
जैसे ही जहाज किनारे लगी, यात्रियों का हुजूम अचानक उसकी ओर टूट पड़ा। स्थिति यह हो गई कि जहाज की निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक लोग उस पर चढ़ने को आतुर दिखे।
प्रशासन की ओर से लगातार माइकिंग के जरिए यात्रियों को चेताया गया कि क्षमता से अधिक लोग जहाज पर न सवार हों। लेकिन परेशान और थके यात्रियों पर इन घोषणाओं का खास असर नहीं हुआ। लोग किसी भी कीमत पर उस पार पहुंचना चाहते थे।
घाट पर देखते ही देखते अफरा-तफरी का माहौल बन गया। महिलाएं बच्चों को संभालने में लगी रहीं, बुजुर्ग धक्का-मुक्की से बचने की कोशिश करते रहे और पुलिसकर्मी भीड़ नियंत्रित करने में जुट गए। काफी मशक्कत के बाद स्थिति पर काबू पाया जा सका।
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तकनीकी खराबी का सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जहाजों में आ रही तकनीकी खराबी कब दूर होगी। यदि यही समस्या लगातार बनी रही, तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं। यात्रियों का कहना है कि प्रशासन केवल तकनीकी दिक्कत का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से पलायन नहीं कर सकता। गंगा की धारा पर चलने वाले जहाजों की गति सामान्यतः धीमी रहती है। ऊपर से यदि जहाज समय पर न पहुँचे, तो यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ जाती है।
जलमार्ग ही अब एकमात्र भरोसा
विक्रमशिला सेतु बंद होने के कारण पहले ही सड़क संपर्क बाधित है। ऐसे में जलमार्ग ही लोगों का एकमात्र भरोसा बन गया है। हालांकि, वर्तमान स्थिति यह संकेत देती है कि व्यवस्था अभी भी पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। यात्रियों का कहना है कि यदि जहाजों की संख्या बढ़ाई जाए और तकनीकी निगरानी मजबूत की जाए, तो काफी हद तक परेशानी कम की जा सकती है।
प्रशासन की ओर से प्रयास
जिला प्रशासन लगातार यह दावा कर रहा है कि यात्रियों की सुविधा के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। घाटों पर पुलिस बल तैनात है, एम्बुलेंस, सूचना केंद्र और पेयजल की व्यवस्था भी की गई है।
साथ ही अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबियों को दूर करने और जहाजों को समय पर पहुँचाने के लिए विशेष निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन यह सुनिश्चित करना चाहता है कि यात्रियों को कम से कम परेशानी हो और जलमार्ग से सफर सुरक्षित और सुचारु रूप से जारी रहे।
यात्री बेचैनी में
यात्री बताते हैं कि चिलचिलाती धूप और उमस में घंटों इंतजार करना उनके लिए भारी पड़ रहा है। कई बार जहाज देर से आने के कारण उन्हें कार्यालय, स्कूल या अन्य जरूरी काम में देरी का सामना करना पड़ता है।
कुछ यात्रियों ने कहा, "यदि प्रशासन समय पर जहाजें नहीं भेजता और तकनीकी खराबियों को दूर नहीं करता, तो यह व्यवस्था हमारी समस्या बढ़ा रही है, राहत नहीं दे रही।"
जहाजों की संख्या बढ़ाई जाए
स्थानीय लोगों का सुझाव है कि जहाजों की संख्या बढ़ाई जाए, तकनीकी निगरानी मजबूत की जाए और समय पर संचालन सुनिश्चित किया जाए। इससे यात्रियों की परेशानी में काफी हद तक कमी आ सकती है।
जलमार्ग सेवा विक्रमशिला सेतु बंद होने के बाद राहत का साधन बनी है, लेकिन यदि समय पर जहाज और तकनीकी सुधार सुनिश्चित नहीं किए गए, तो लोगों का भरोसा और परेशानी दोनों बढ़ सकते हैं।