बिहार की लाइफलाइन भागलपुर का विक्रमशिला सेतु संकट में, सचिव ने पूछा- गंगा पर फोरलेन पुल निर्माण में क्यों हो रही देरी
भागलपुर में पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने विक्रमशिला सेतु और समानांतर फोरलेन पुल का निरीक्षण किया। ...और पढ़ें
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बिहार की लाइफलाइन विक्रमशिला सेतु संकट में, फोरलेन निर्माण में देरी पर सचिव नाराज
HighLights
विक्रमशिला सेतु में तकनीकी खामियां, तत्काल मरम्मत के आदेश।
फोरलेन पुल निर्माण में देरी पर सचिव ने जताई नाराजगी।
एजेंसी को मई 2027 तक काम पूरा करने की चेतावनी।
जागरण संवाददात, भागलपुर। भागलपुर में शनिवार को पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के दौरे के दौरान विक्रमशिला सेतु और इसके समानांतर बन रहे फोरलेन पुल की स्थिति को लेकर कई अहम जानकारियां सामने आईं। हवाई अड्डा से हेलीकॉप्टर द्वारा पहुंचे सचिव ने अधिकारियों के साथ मौके पर पहुंचकर परियोजनाओं की प्रगति और खामियों का जायजा लिया।
हवाई निरीक्षण से शुरू हुआ दौरा
पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल हेलीकॉप्टर से भागलपुर पहुंचे और सीधे विक्रमशिला सेतु क्षेत्र का निरीक्षण करने निकल पड़े। उनके साथ जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी, डीडीसी प्रदीप कुमार सिंह और अन्य विभागीय अधिकारी भी मौजूद थे।
निरीक्षण की शुरुआत बरारी स्थित समानांतर फोरलेन पुल निर्माण स्थल से हुई, जहां परियोजना की प्रगति और तकनीकी स्थिति का विस्तृत आकलन किया गया।
विक्रमशिला सेतु की स्थिति पर चिंता
निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने सचिव को बताया कि विक्रमशिला सेतु के स्ट्रक्चर में कई तरह की तकनीकी खामियां सामने आई हैं। जानकारी के अनुसार, एक्सपेंशन जॉइंट खराब हो चुके हैं और उनमें दरारें बढ़ गई हैं।
इसके अलावा कई पिलरों के बाल बेयरिंग भी क्षतिग्रस्त पाए गए हैं, जिससे पुल की सुरक्षा और स्थायित्व को लेकर चिंता जताई गई। इस पर सचिव ने तत्काल कहा कि सभी तकनीकी खामियों को जल्द से जल्द ठीक कराया जाएगा और आवश्यक मरम्मत कार्य सुनिश्चित किया जाएगा।
मरम्मत और सुधार कार्य पर जोर
सचिव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि एक्सपेंशन जॉइंट और बेयरिंग जैसे महत्वपूर्ण हिस्सों को जल्द बदला जाए। उन्होंने कहा कि संरचना की मजबूती से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और गुणवत्ता मानकों का पूरा पालन होना चाहिए।
फोरलेन पुल निर्माण में देरी पर नाराजगी
निरीक्षण के दौरान मोर्थ के कार्यपालक अभियंता अभिनव कुमार ने सचिव को बताया कि कुछ तकनीकी कारणों और डिजाइन मंजूरी में देरी के चलते फोरलेन पुल निर्माण का लक्ष्य मई 2027 तक पूरा होना संभव नहीं है।
कार्य एजेंसी ने निर्माण पूरा करने के लिए मई 2029 तक का समय मांगा है। इस पर सचिव ने कड़ी नाराजगी जताई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि निर्धारित समयसीमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
सचिव का सख्त रुख
सचिव पंकज कुमार पाल ने कहा कि यदि मई 2027 तक कार्य पूरा नहीं हुआ, तो पुराने विक्रमशिला सेतु के मेंटेनेंस की जिम्मेदारी भी संबंधित एजेंसी को उठानी होगी। उन्होंने कहा कि परियोजना में देरी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है और कार्य एजेंसी को तय समय पर काम पूरा करना ही होगा।
डीएम आवास में भोजन, फिर पटना रवाना
निरीक्षण के बाद सचिव जिलाधिकारी आवास पहुंचे, जहां उन्होंने दोपहर का भोजन किया। इसके बाद वे डीएम के साथ हवाई अड्डा पहुंचे और पटना के लिए रवाना हो गए।
मरीन ड्राइव परियोजना पर भी हुआ एरियल सर्वे
जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने बताया कि बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDC) द्वारा मुंगेर-भागलपुर-सबौर गंगा पथ परियोजना का भी हवाई सर्वेक्षण किया गया। सुलतानगंज स्थित कृष्णानंद सूर्यमल उच्च विद्यालय मैदान में बने हेलिपैड पर हेलीकॉप्टर की लैंडिंग हुई, जहां से पूरी टीम ने निरीक्षण कार्य किया।
सवालों से बचते नजर आए सचिव
निरीक्षण के बाद जब मीडिया ने सचिव से सवाल पूछे, तो वे कई मुद्दों पर जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा कि वे केवल डीएम से मिलने आए थे और आगे की जानकारी जिला प्रशासन द्वारा दी जाएगी। मरीन ड्राइव और विक्रमशिला सेतु से जुड़े सवालों पर उन्होंने सीधे टिप्पणी करने से परहेज किया।
विक्रमशिला सेतु की तकनीकी स्थिति
भागलपुर में हुआ यह उच्चस्तरीय निरीक्षण न केवल विक्रमशिला सेतु की तकनीकी स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण रहा, बल्कि फोरलेन परियोजना की गति और गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब सभी की नजर इस पर है कि निर्धारित समयसीमा में परियोजनाएं पूरी होती हैं या नहीं।
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