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    शिवालयों में Gen-Z की आस्था: एक हाथ में गंगाजल और दूसरे में स्मार्टफोन, सावन में Reels की धूम

    Updated: Tue, 04 Aug 2026 01:35 PM (IST)

    युवाओं ने पहली सावन सोमवारी को भक्ति और सोशल मीडिया के अनूठे संगम के साथ मनाया, जहां बड़ी संख्या में युवाओं ने व्रत रखकर मंदिरों में डिजिटल अभिव्यक्ति ...और पढ़ें

    भागलपुर में सावन सोमवारी पर युवाओं की भक्ति और सोशल मीडिया का नया ट्रेंड

    भागलपुर में सावन सोमवारी पर युवाओं की भक्ति और सोशल मीडिया का नया ट्रेंड

    HighLights

    1. पहली सोमवारी पर युवाओं ने बढ़-चढ़कर व्रत रखा।

    2. स्मार्टफोन से सेल्फी, रील्स बनाकर भक्ति को किया साझा।

    3. परंपरा और आधुनिकता का अनूठा संगम देखा गया।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर। सावन की पहली सोमवारी पर शहर के शिवालयों में घंटों की अनुगूंज, वैदिक मंत्रों और 'हर-हर महादेव' के जयघोषों से गंजायमान रहा। इसी के साथ सभी पूजा स्थलों पर जेन-जी के मोबाइल कैमरों की चमक भी जैसे बंद होने का नाम नहीं ले रही थी।

    वे सेल्फी, रील्स और डिजिटल अभिव्यक्ति का नया संसार गढ़ते दिखाई दिए। गंगा जल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने पहुंचे युवाओं की आंखों में आस्था थी, तो उनके हाथों में स्मार्टफोन भी।

    एक ओर वे श्रद्धा से जलाभिषेक कर रहे थे तो दूसरी ओर उनमें अपने इस यादगार इवेंट को सोशल मीडिया के माध्यम से अपने मित्रों और परिचितों तक पहुंचाने की ललक भी उफान मार रही थी। इससे बदलते समय में सावन की परंपरा अब नई पीढ़ी की जीवनशैली से जुड़कर एक नए स्वरूप में सामने आती साफ तौर पर दिखी।

    इस वर्ष 18 से 25 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं में सोमवारी व्रत को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। पहले जहां सावन का व्रत मुख्य रूप से महिलाओं की धार्मिक परंपरा माना जाता था, वहीं अब बड़ी संख्या में युवक भी पूरे विधि-विधान से व्रत रख रहे हैं। शहर के प्रमुख शिवालयों में युवाओं की लंबी कतारें इस परिवर्तन की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत कर रही थीं।

    भागलपुर के खंजरपुर निवासी एक युवा देवाशीष कहते हैं, 'भोलेनाथ के प्रति आस्था पहले भी थी, लेकिन सोमवारी व्रत रखने से मन को अलग तरह की शांति मिलती है। पूरे दिन अनुशासन में रहना और पूजा करना मानसिक संतुलन भी देता है।'

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    इसी तरह प्रेमशंकर का कहना है कि वे अपने बेहतर भविष्य और सफल करियर की कामना से भगवान शिव की आराधना करते हैं। उनके अनुसार कठिन प्रतिस्पर्धा के दौर में आध्यात्मिक जुड़ाव आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच प्रदान करता है।

    पहली श्रावण सोमवारी को रील्स बनाने की रही धूम

    शहर के मंदिरों में इस बार एक और नया दृश्य देखने को मिला। पूजा-अर्चना के बाद युवा मंदिर परिसर, दीपों, घंटियों और सजावट के बीच फोटो और वीडियो बनाते नजर आए। इंस्टाग्राम और फेसबुक पर 'गेट रेडी विथ मी फार सावन मंडे', 'हर हर महादेव' जैसे शीर्षकों के साथ बड़ी संख्या में रील्स और पोस्ट साझा किए गए। कई युवाओं ने जलाभिषेक की पूरी यात्रा को भी डिजिटल डायरी का रूप दिया।

    सोमवारी व्रत रख रहीं स्नेहलता कहती हैं, 'भक्ति हमारी प्राथमिकता है। मंदिर के सुंदर क्षणों को कैमरे में कैद करना हमारी पीढ़ी का तरीका है। जब अच्छी यादें साझा होती हैं तो दूसरे लोग भी धर्म और संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित होते हैं।' हालांकि इस बदलते चलन को लेकर समाज के वरिष्ठ लोगों की नजर भी बनी हुई है।

    उनका मानना है कि आधुनिक माध्यमों का उपयोग स्वागत योग्य है, लेकिन धार्मिक आस्था का केंद्र पूजा और साधना ही रहना चाहिए, न कि केवल प्रदर्शन। उनका कहना है कि यदि सोशल मीडिया श्रद्धा का संदेश फैलाने का माध्यम बने तो यह सकारात्मक परिवर्तन है।

    अभिभावकों का मानना है कि आज सावन और सोमवारी व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं रह गए हैं, बल्कि आत्म अनुशासन, संयम और आध्यात्मिक संतुलन का माध्यम भी बन रहे हैं।

    सावन की सोमवारी का यह बदलता स्वरूप बताता है कि परंपराएं समय के साथ अपना रूप बदल सकती हैं, लेकिन उनका मूल भाव नहीं। जेन-जी के लिए भगवान शिव की आराधना अब केवल मंदिर तक सीमित नहीं है।

    यह उनके जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, आत्मानुशासन और डिजिटल अभिव्यक्ति तीनों का संतुलित संगम बनती जा रही है। आज शिवालयों में भक्ति और तकनीक आमने-सामने नहीं, बल्कि साथ-साथ चलती दिखाई दे रही हैं।