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    स्वतंत्रता दिवस पर बिहार के 30 हजार भूमिहीन लाभुकों को मिलेगा वासभूमि का पर्चा; 'अभियान बसेरा-2' की प्रक्रिया समझें

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:27 PM (IST)

    स्वतंत्रता दिवस पर बिहार सरकार 'अभियान बसेरा-2' के तहत 30 हजार भूमिहीन परिवारों को वासभूमि का पर्चा देगी। राजस्व विभाग ने धीमी प्रगति पर सख्ती दिखाते ...और पढ़ें

    15 अगस्त को राज्य के 30 हजार योग्य भूमिहीन परिवारों को वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र बांटने का लक्ष्य निर्धारित

    15 अगस्त को राज्य के 30 हजार योग्य भूमिहीन परिवारों को वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र बांटने का लक्ष्य निर्धारित

    HighLights

    1. स्वतंत्रता दिवस पर 30 हजार भूमिहीन परिवारों को मिलेगा वासभूमि का पर्चा।

    2. 'अभियान बसेरा-2' के तहत मिलेगा कानूनी मालिकाना हक।

    3. राजस्व विभाग ने धीमी प्रगति पर दिए सख्त निर्देश।

    जागरण संवाददाता, भागलपुर।  स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर बिहार सरकार राज्य के 30 हजार भूमिहीन परिवारों को बड़ा तोहफा देने जा रही है। 'अभियान बसेरा-2' के तहत आगामी 15 अगस्त को प्रदेश भर के 30 हजार योग्य लाभुकों को वासभूमि का बंदोबस्ती प्रमाणपत्र (पर्चा) वितरित किया जाएगा।

    हालांकि, इस अभियान की राज्यस्तरीय धीमी प्रगति पर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। विभाग के अपर सचिव डॉ. महेंद्र पाल ने सभी जिलाधिकारियों (DM) को पत्र भेजकर तय समय-सीमा के भीतर लक्ष्य पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया है। समीक्षा में पाया गया था कि अधिकांश जिले अब तक अपने निर्धारित लक्ष्य का 35 प्रतिशत काम भी पूरा नहीं कर सके हैं।

    जानिए क्या है 'अभियान बसेरा-2' और कैसे मिलती है जमीन

    'अभियान बसेरा-2' बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रह रहे ऐसे निर्धन परिवारों को चिह्नित कर आवासीय भूमि का कानूनी मालिकाना हक देना है, जिनके पास अपना कोई घर या जमीन नहीं है।

    समझें पर्चा मिलने की पूरी प्रक्रिया (Step-by-Step):

    1. लाभुकों का चिन्हीकरण: अंचल स्तर पर अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी गांवों-टोले में जाकर भूमिहीन गरीब परिवारों का सर्वेक्षण करते हैं और सूची तैयार करते हैं।

    2. सरकारी भूमि का चयन: गैरमजरुआ (खास/आम) या सिलिंग से प्राप्त सरकारी जमीनों में से वासभूमि के लिए उपयुक्त प्लॉट चिह्नित किया जाता है।

    3. बंदोबस्ती व पर्चा निर्माण: योग्य परिवारों को जमीन आवंटित कर अंचल कार्यालय स्तर पर वासभूमि का आधिकारिक बंदोबस्ती प्रमाणपत्र (पर्चा) तैयार होता है।

    4. समीक्षा व वितरण: एडीएम और डीएम रोजाना प्रगति की समीक्षा कर सूची को अंतिम रूप देते हैं। इसके बाद 15 अगस्त को समारोहपूर्वक लाभुकों को पर्चा सौंपा जाता है।

    रोजाना समीक्षा के निर्देश, ढिलाई बरतने पर होगी कार्रवाई

    राजस्व विभाग ने निर्देश दिया है कि जिलाधिकारी और अपर समाहर्ता (एडीएम) अपने-अपने जिलों में इस अभियान की प्रतिदिन समीक्षा करें। विभागीय पत्र में स्पष्ट किया गया है कि कार्य में किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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    सरकार का मानना है कि वासभूमि का पर्चा मिलने से भूमिहीन परिवारों को अपनी जमीन का कानूनी अधिकार तो मिलेगा ही, साथ ही वे प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए भी पूरी तरह पात्र हो जाएंगे। 

    अभियान बसेरा-2 क्या है?

    यह बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की एक महत्वपूर्ण योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में रह रहे ऐसे निर्धन परिवारों को चिह्नित कर आवासीय भूमि का कानूनी मालिकाना हक (पर्चा) देना है, जिनके पास अपना कोई घर या जमीन नहीं है।

    इसके मुख्य लाभ क्या हैं?

    • कानूनी मालिकाना हक: भूमिहीन परिवारों को उनकी जमीन का स्थायी और कानूनी पर्चा मिल जाता है।

    • सरकारी योजनाओं की पात्रता: पर्चा मिलने के बाद लाभुक प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) या मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत मकान बनाने की वित्तीय सहायता पाने के योग्य हो जाते हैं।

    • सशक्तीकरण: इससे समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्गों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा मिलती है।

    प्रक्रिया कैसे काम करती है 

    लाभुकों का चिन्हीकरण (Identification): अंचल स्तर पर अंचलाधिकारी (CO) और राजस्व कर्मचारी (Halka Karamchari) गांवों और टोलों में सर्वेक्षण करके भूमिहीन परिवारों की सूची तैयार करते हैं।

    भूमि का चयन व बंदोबस्ती (Land Allotment):

    • सरकारी (गैरमजरुआ आम/खास) या सिलिंग से प्राप्त उपयुक्त भूमि को चिन्हित किया जाता है।
    • पात्र परिवार को तय मानकों के अनुसार वासभूमि (आवासीय जमीन) आवंटित की जाती है।

    सत्यापन और पर्चा निर्माण (Verification & Documentation): आवेदन और सर्वे रिपोर्ट का सत्यापन करने के बाद अंचल कार्यालय में बंदोबस्ती प्रमाणपत्र (पर्चा) तैयार किया जाता है।

    समीक्षा और अंतिम स्वीकृति: जिला स्तर पर अपर समाहर्ता (ADM) और जिलाधिकारी (DM) द्वारा तैयार सूची और प्रगति की रोजाना समीक्षा की जाती है।

    वितरण (Distribution): स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) जैसे विशेष अवसरों पर जिले व प्रखंड स्तर पर आयोजित समारोहों में लाभुकों को आधिकारिक पर्चा सौंपा जाता है।