भ्रष्टाचार के मामलों पर पटना हाईकोर्ट सख्त, भागलपुर समेत बिहार के 15 जिलों में शुरू हुई सुनवाई; दागे जाएंगे चार्जशीट
पटना हाईकोर्ट की सख्ती के बाद बिहार के 15 जिलों में भ्रष्टाचार के 145 लंबित मामलों में तेजी लाई जा रही है। पुलिस अधीक्षकों को चार्जशीट या फाइनल रिपोर् ...और पढ़ें

Bihar Crime News: भ्रष्टाचार के 145 मामलों में 20 साल बाद जागी बिहार पुलिस, हाईकोर्ट और निगरानी कोर्ट की सख्ती के बाद हड़कंप
HighLights
पटना हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार के लंबित मामलों पर सख्ती दिखाई।
बिहार के 15 जिलों में 145 केसों पर कार्रवाई शुरू।
पुलिस अधीक्षकों को चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट का अल्टीमेटम।
जागरण संवाददाता, भागलपुर। बिहार में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। प्रदेश के 15 जिलों के विभिन्न थानों में पिछले 20 वर्षों से लंबित पड़े भ्रष्टाचार के 145 केसों पर अब पुलिस महकमे की नींद टूट गई है। विशेष न्यायाधीश (निगरानी) दीपक कुमार की कड़ी सख्ती के बाद इन 15 जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SPs) ने उन पुराने मामलों की फाइलें दोबारा खुलवा दी हैं, जिन पर अब तक थानों में बैठे अनुसंधानकर्ता (IO) कुंडली मारकर बैठे थे।
15 जिलों के पुलिस कप्तानों को मिला कड़ा निर्देश
विशेष निगरानी न्यायालय के कड़े रुख के बाद अब भागलपुर, बांका, मुंगेर, पूर्णिया, जमुई, बेगूसराय, मधेपुरा, शेखपुरा, खगड़िया, अररिया, किशनगंज, सुपौल, सहरसा, कटिहार और लखीसराय जिले के पुलिस अधीक्षकों ने एक्शन शुरू कर दिया है। सभी एसपी ने संबंधित थानाध्यक्षों और केस के अनुसंधानकर्ताओं को इन लंबित मामलों में तुरंत आरोप पत्र (Charge Sheet) या फाइनल रिपोर्ट (Final Report) दाखिल करने का अल्टीमेटम दे दिया है।
वर्ष 2006 से अटके मुकदमों का होगा त्वरित निपटारा
पुलिस अधिकारियों को साफ निर्देश दिया गया है कि वे हर हाल में कानूनी दस्तावेजों की कवायद पूरी करते हुए इसे न्यायालय में सौंपें। ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि वर्ष 2006 से लंबित पड़े इन पुराने मामलों में त्वरित सुनवाई (Speedy Trial) सुनिश्चित की जा सके और केस को जल्द से जल्द फैसले के मुकाम तक पहुंचाया जा सके। इस सिलसिले में इन जिलों के सक्षम पुलिस पदाधिकारियों ने विशेष निगरानी न्यायालय में अभियोजन पक्ष (Prosecution) से संपर्क कर मार्गदर्शन भी लिया है।
हाईकोर्ट का सख्त रुख, डे-टू-डे सुनवाई का आदेश
दरअसल, पटना उच्च न्यायालय (Patna High Court) ने निगरानी से जुड़े इन पुराने और लंबित मामलों को गंभीरता से लेते हुए इनमें डे-टू-डे (रोजाना) सुनवाई करने का निर्देश दे रखा है। लंबे समय से पुलिस की ओर से कोई ठोस कार्रवाई न होने और भ्रष्ट आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट या फाइनल रिपोर्ट कोर्ट में पेश न किए जाने पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया था।
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DGP को पत्र लिखे जाने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप
हाईकोर्ट ने इस सुस्ती पर बेहद तल्ख टिप्पणी करते हुए प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को एक कड़ा पत्र लिखा था। शीर्ष स्तर से आई इस फटकार के बाद ही लंबित केसों से संबंधित जिलों के पुलिस कप्तानों और सक्षम अधिकारियों की नींद टूटी। अब न्यायालय के निर्देशानुसार इन मामलों को तार्किक परिणति तक पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर कागजी और कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।