'दुनिया में किसी को नहीं देखना, बस बाबा के करने हैं दर्शन'; आंखों पर पट्टी बांध भोलेबाबा को देखने निकले शिवभक्त
श्रावणी मेले में सुल्तानगंज से देवघर जा रहे शिवभक्तों के बीच दो अनोखी कांवर यात्राएं देखने को मिलीं। एक भक्त आंखों पर पट्टी बांधकर 'नयनबंद' यात्रा पर ...और पढ़ें

खगड़िया के मासिक डाकबम सुधांशु कुमार की अनूठी भक्ति: 'दुनिया में किसी को नहीं देखना, बस बाबा के करने हैं दर्शन'
HighLights
आंखों पर पट्टी बांधकर 'नयनबंद' यात्रा कर रहे सुधांशु।
हावड़ा के कांवरियों का 100 किलो का 'महाकाल कांवर'।
भारत को 'हिंदू राष्ट्र' बनाने की विशेष कामना।
संवाद सूत्र, अजगैवीनाथ धाम (भागलपुर)। विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले में बाबा बैद्यनाथ के प्रति अगाध आस्था और भक्ति के एक से बढ़कर एक अनूठे रूप देखने को मिल रहे हैं। सुल्तानगंज स्थित उत्तरवाहिनी गंगा तट (अजगैवीनाथ धाम) से देवघर के लिए निकले शिव भक्तों का उत्साह चरम पर है। रविवार को यहाँ दो ऐसी अनोखी कांवर यात्राएं देखने को मिलीं, जिन्हें देखकर हर कोई हैरान और भावविभोर हो गया।
आंखों पर पट्टी बांध नयनबंद यात्रा पर निकले डाकबम
अजगैवीनाथ धाम के कच्चे कांवरिया पथ पर खगड़िया जिले के मासिक डाकबम सुधांशु कुमार आकर्षण का केंद्र बने रहे। सुधांशु अपनी आंखों पर मोटी पट्टी बांधकर 'नयनबंद' यात्रा पर निकले हैं। उनके इस अनोखे और कठोर रूप को देखकर श्रद्धालुओं ने उन्हें 'नयनबंद डाकबम' का नाम दिया है।
सुधांशु ने अपनी इस भक्ति के बारे में बताते हुए कहा, "मुझे इस भौतिक दुनिया में किसी और को नहीं देखना है, मुझे सिर्फ और सिर्फ अपने बाबा बैद्यनाथ के दिव्य दर्शन करने हैं।" इसी संकल्प के साथ उन्होंने उत्तरवाहिनी गंगा से पवित्र जल भरकर कांवर उठाया और अपनी आंखों पर पट्टी बांधकर देवघर के लिए पैदल यात्रा शुरू की। उन्होंने बताया कि नयनबंद होकर बाबा धाम की यह उनकी तीसरी कठिन यात्रा है।
क्विंटल का महाकाल कांवर और 95 हजार की लागत
वहीं दूसरी ओर, बाबा बैद्यनाथ को प्रसन्न करने के लिए हावड़ा सेवा संघ के 30 कांवरियों का एक विशेष जत्था भी अजगैवीनाथ धाम पहुँचा। इस जत्थे की खासियत उनका करीब एक क्विंटल (100 किलो) वजन का कांवर है, जिस पर उज्जैन के महाकाल शिवलिंग की बेहद भव्य और आकर्षक आकृति स्थापित की गई है।
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चार दिन में 105 किमी की पैदल यात्रा करेंगे पूरी
सावन कृष्ण चतुर्थी पर लिया जल संकल्प: हावड़ा के कांवरियों ने उत्तरवाहिनी गंगा में डुबकी लगाकर कांवर पूजन किया और देवघर के लिए पैदल प्रस्थान किया।
12 वर्षों की परंपरा: जत्थे के सदस्य सुनील गुप्ता ने बताया कि उनका समूह पिछले 12 वर्षों से हर साल अलग-अलग अनोखे और भव्य कांवर लेकर यहाँ आता है।
95 हजार रुपये आए खर्च: इस विशाल महाकाल कांवर को तैयार करने में करीब 95,000 रुपये का खर्च आया है।
विशेष मनोकामना: कांवरियों ने बताया कि वे भारत के 'हिंदू राष्ट्र' बनने की विशेष कामना लेकर बाबा बैद्यनाथ के दरबार में अर्जी लगाने जा रहे हैं। यह जत्था 4 दिन की कठिन पैदल यात्रा तय कर शुक्रवार को बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करेगा।